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लखनऊ बवाल पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख सख्त

Fri, 12 Feb 2016 05:08 AM IST
Updated Fri, 12 Feb 2016 05:08 AM IST
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allahabad high court action on lucknow tension

लखनऊ में अधिवक्ता की हत्या के बाद बुधवार को हुए बवाल, तोड़फोड़, आगजनी और लाठीचार्ज की घटना पर हाईकोर्ट बेहद सख्त है। मीडिया रिपोर्ट के आधार पर इस घटना का संज्ञान लेते हुए बुधवार को सात जजों की वृहद पीठ ने लंच के बाद मामले की सुनवाई की।

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महाधिवक्ता सहित प्रदेश सरकार के तमाम वकील भी मौजूद रहे। वृहदपीठ ने प्रमुख सचिव गृह को निर्देश दिया है कि पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट अदालत को सौंपे। पीठ ने कहा कि मीडिया में छपी तस्वीरों के आधार पर इस मामले के दोषी लोगों की पहचान कर बताया जाए।
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पीठ का कहना था कि अदालतों की सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था को खतरा पैदा करने वालों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। वह इस मामले को सिर्फ सरकार के भरोसे नहीं छोड़ सकते हैं। पीठ खुद इसे मॉनिटर करेगी।
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वृहदपीठ ने कहा कि हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच सहित सभी सूबे की सभी अदालतों की सुरक्षा को कड़ा किया जाए। प्रमुख सचिव गृह से कहा है कि तोड़फोड़ और हिंसा में शामिल रहे लोगों को चिह्नित कर अदालत को बताया जाए।

लाठीचार्ज का आदेश किसने दिया?

allahabad high court action on lucknow tension

वृहद पीठ ने प्रमुख सचिव को यह बताने के लिए कहा है कि कोर्ट परिसर में पुलिस किसकी इजाजत से दाखिल हुई। लाठीचार्ज और आंसू गैस छोड़ने का आदेश किसने दिया। वृहदपीठ ने बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश, सेंट्रल बार एसोसिएशन और अवध बार एसोसिएशन को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

बवाल के दौरान हाथ में रिवॉल्वर लेकर लहराने वाले वकील विशाल दीक्षित पर वृहदपीठ ने प्रतिबंध लगा दिया है। उनको सूबे की किसी भी अदालत में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। विशाल की फोटो मीडिया के जरिए सामने आई है।

लखनऊ बेंच की सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ और पुलिस को निर्देश दिया है कि कोर्ट परिसर में शस्त्र लेकर किसी को भी प्रवेश न करने दिया जाए। वकीलों के वाहनों की पार्किंग की भी सुरक्षा का निर्देश दिया है ताकि कोई उनके वाहनों को क्षतिग्रस्त न करे।

बवाल के दौरान लखनऊ बेंच के सीनियर रजिस्ट्रार कार्यालय में तोड़फोड़ करने और रजिस्ट्रार से बदसलूकी की घटना की भी रिपोर्ट मांगी गई है। रजिस्ट्रार को घटना में शामिल लोगों की पहचान कर बताने के लिए कहा गया है।

पुलिस की भूमिका की रिपोर्ट मांगी

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कोर्ट ने पूरे घटनाक्रम और तोड़फोड़ में पुलिस की भूमिका की भी रिपोर्ट मांगी है। पूछा है कि लाठीचार्ज क्यों और किसकी इजाजत से किया गया। इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया से अदालत ने अनुरोध किया है कि वह घटना की फुटेज और फोटोग्राफ उपलब्ध कराएं।

वृहद पीठ ने यह भी कहा है कि इस घटना से संबंधित कोई भी मुकदमा या याचिका की सुनवाई कहीं और न हो। यदि इससे संबंधित कहीं कोई याचिका दाखिल भी की जाती है तो उसे वृहद पीठ से संबद्ध कर दिया जाएगा।

इस मामले में लखनऊ पीठ के समक्ष जो भी याचिकाएं दाखिल की गई हैं, उनकी भी सुनवाई वृहद पीठ ही करेगी। इस प्रकरण में यदि किसी को कुछ भी कहना है तो वह वृहद पीठ के समक्ष अर्जी दे सकता है।

मुख्य न्यायमूर्ति डॉ.डीवाई चंद्रचूड की अध्यक्षता में गठित वृहदपीठ में न्यायमूर्ति राकेश तिवारी, न्यायमूर्ति वीके शुक्ला, न्यायमूर्ति अरुण टंडन, न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल, न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति एसएस चौहान ने सुनवाई की।

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