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यूपी बोर्ड: सभी विद्यार्थियों को नहीं मिलेंगे लैपटॉप, टैबलेट
वाराणसी/ब्यूरो
Updated Tue, 25 Sep 2012 10:11 AM IST
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सपा सरकार ने इस साल दसवीं पास विद्यार्थियों को टैबलेट और और बारहवीं पास को लैपटॉप देने का वादा किया है। सीबीएसई, आईसीएसई, मदरसा बोर्ड तो दूर यूपी बोर्ड के ही ऐसे सभी विद्यार्थियों को टैबलेट और लैपटॉप नहीं मिल पाएगा।
दरअसल सरकार ने सिर्फ 18 लाख टैबलेट और लैपटॉप के लिए टेंडर जारी किया है, जबकि केवल यूपी बोर्ड से ही दसवीं में 29.80 लाख और इंटर में 23.99 लाख विद्यार्थी सफल हुए हैं। ऐसे में यूपी बोर्ड के ही सिर्फ एक तिहाई विद्यार्थियों को ही योजना का लाभ मिल पाएगा। यानी 35.79 लाख विद्यार्थी योजना से बाहर हो जा रहे हैं।
राज्य सरकार ने घोषणा तो कर दी लेकिन उच्च पदस्थ सूत्र बताते हैं कि राज्य शासन को इतनी बड़ी तादाद में टैबलेट और लैपटॉप मिल ही नहीं रहे। इतना ही नहीं टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि 30 अक्तूबर है पर सूत्र बताते हैं कि अब तक एक भी कंपनी ने टेंडर नहीं डाला है।
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ऐसे में अब अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से संपर्क साधने की तैयारी है। टैबलेट और लैपटॉप संकट के चलते ही अभी तक योजना के आवेदन के लिए फार्म का प्रारूप तक तय नहीं हो सका है।
मदरसा बोर्ड की बात करें तो मुंशी-मौलवी (दसवीं) में 60 हजार और आलिम (12वीं) में 40 हजार विद्यार्थियों ने बाजी मारी है। ऐसे में सीबीएसई, आईसीएसई और मदरसा बोर्ड के विद्यार्थियों का सपना शायद ही पूरा हो पाए।
वैसे भी पहले यूपी बोर्ड के राजकीय विद्यालयों फिर सवित्त और उसके बाद वित्तविहीन विद्यालयों के छात्रों को योजना का लाभ दिया जाना है। इसके बाद संस्कृत शिक्षा बोर्ड, मदरसा बोर्ड है। अंतिम विकल्प हैं सीबीएसई और आईसीएसई के छात्र।
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दरअसल सरकार ने सिर्फ 18 लाख टैबलेट और लैपटॉप के लिए टेंडर जारी किया है, जबकि केवल यूपी बोर्ड से ही दसवीं में 29.80 लाख और इंटर में 23.99 लाख विद्यार्थी सफल हुए हैं। ऐसे में यूपी बोर्ड के ही सिर्फ एक तिहाई विद्यार्थियों को ही योजना का लाभ मिल पाएगा। यानी 35.79 लाख विद्यार्थी योजना से बाहर हो जा रहे हैं।
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राज्य सरकार ने घोषणा तो कर दी लेकिन उच्च पदस्थ सूत्र बताते हैं कि राज्य शासन को इतनी बड़ी तादाद में टैबलेट और लैपटॉप मिल ही नहीं रहे। इतना ही नहीं टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि 30 अक्तूबर है पर सूत्र बताते हैं कि अब तक एक भी कंपनी ने टेंडर नहीं डाला है।
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ऐसे में अब अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से संपर्क साधने की तैयारी है। टैबलेट और लैपटॉप संकट के चलते ही अभी तक योजना के आवेदन के लिए फार्म का प्रारूप तक तय नहीं हो सका है।
मदरसा बोर्ड की बात करें तो मुंशी-मौलवी (दसवीं) में 60 हजार और आलिम (12वीं) में 40 हजार विद्यार्थियों ने बाजी मारी है। ऐसे में सीबीएसई, आईसीएसई और मदरसा बोर्ड के विद्यार्थियों का सपना शायद ही पूरा हो पाए।
वैसे भी पहले यूपी बोर्ड के राजकीय विद्यालयों फिर सवित्त और उसके बाद वित्तविहीन विद्यालयों के छात्रों को योजना का लाभ दिया जाना है। इसके बाद संस्कृत शिक्षा बोर्ड, मदरसा बोर्ड है। अंतिम विकल्प हैं सीबीएसई और आईसीएसई के छात्र।