NDA सरकार ने भुलाया अपने ही सूत्रधार को
पूरा जीवन कांग्रेस से लड़ने वाले,बाबरी मस्जिद टूटने के बाद राजनीति में लगभग अछूत हो चुकी भाजपा को वापस मुख्यधारा में लाने वाले और अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मिलकर एनडीए की नींव रखने वाले जार्ज फर्नांडीस को भाजपा, एनडीए ने भुला दिया है।
राजनीति की डगर पर जार्ज की उंगली पकड़कर जवान हुए समाजवादी धारा के नेताओं को भी उनकी सुधि नहीं है। केंद्र में एनडीए सरकार बने एक सप्ताह से ज्यादा हो गया, लेकिन जार्ज का हाल पूछने की फुर्सत न सरकार को है न भाजपा को।
मंगलवार तीन जून को फर्नांडीस ने दक्षिण दिल्ली के एक घर में अपना 84वां जन्मदिन चंद पुराने समर्थक मित्रों के साथ खामोशी से मनाया। उन्हें बधाई देने कोई बड़ा नेता नहीं पहुंचा।
जार्ज के पुराने अनुयायी और बड़ौदा डाइनामाइट कांड में सह अभियुक्त रहे विजय नारायण कहते हैं कि राजनीति में मौकापरस्ती और स्वार्थपरता का ऐसा मंजर होगा, उन्होंने कभी नहीं सोचा था।
लालू-नीतीश समता पार्टी की ही देन
एक समय सड़क से संसद को गुंजा देने वाले प्रखर समाजवादी और मजदूर नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री जार्ज फर्नांडीस की धारा के नेताओं की जमात खासी लंबी चौड़ी है।
इनमें सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जद(यू) के अध्यक्ष शरद यादव, राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, केंद्र में फिर मंत्री बने लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान जैसे कद्दावर नाम हैं।
इनके अलावा जार्ज के राजनीतिक मित्रों में अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, एच.डी.देवेगौड़ा, सोमनाथ चटर्जी, मुरली मनोहर जोशी, शरद पवार, जैसे कई दिग्गज नेता शामिल हैं। इनमें वाजपेयी की सेहत उन्हें अब चलने फिरने की इजाजत नहीं देती।
खुद जार्ज का स्वास्थ्य भी अच्छा नहीं है और वह अपनी पत्नी लैला फर्नांडीस के दक्षिण दिल्ली के पंचशील पार्क स्थित घर पर ही रहते हैं।
किसी ने नहीं थी जॉर्ज को बधाई
तीन जून को लैला केघर में जब जार्ज फर्नांडीस का 84 वां जन्मदिन बेहद खामोशी और सादगी से मनाया जा रहा था, तो उन्हें बधाई और शुभकामना देने के लिए समाजवादी पार्टी, जनता दल(यू) और भाजपा से कोई भी नहीं था। न ही किसी नेता ने उन्हें फोन करने की जहमत उठाई।
शायद किसी को याद भी नहीं था कि आज जार्ज का जन्मदिन भी है। जार्ज को बधाई देने वालों में आपातकाल में बड़ौदा डाइनामाइट कांड में फर्नांडीस के साथ सहअभियुक्त रहे कमलेश शुक्ला, विजय नारायण, के.विक्रमराव केअलावा पानी बाबा के नाम से मशहूर अरुण अग्रवाल और जामिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राहुल रामगुंडन और फरीदाबाद केमजदूर नेता प्रभुनाथ सिंह समेत कुछ अन्य लोग थे।
इस मौके पर हुए के विचार गोष्ठी में समाजवादी आंदोलन, जयप्रकाश नारायण आंदोलन और आपातकाल केविरुद्ध संघर्ष समेत राजनीति व मजदूर आंदोलन में जार्ज फर्नांडीस के योगदान को याद किया गया।
भाजपा ने भूलाया
जार्ज के इन मित्रों की पीड़ा है कि जो नेता राजनीति की डगर पर जार्ज की उंगली पकड़कर चले, उन्हें भी अपने इस बुजुर्ग की सुध नहीं है ।
और जब आडवाणी की रथयात्रा के बाद भाजपा पर सांप्रदायिक राजनीति का ठप्पा लगा और फिर बाबरी मस्जिद ध्वंस ने उसे राजनीति में लगभग अछूत बना दिया।
तब 1996 में जार्ज फर्नांडीस ने समता पार्टी का गठबंधन भाजपा के साथ करके उसे मुख्यधारा में वापस लाने का काम किया। इसके बाद 1998 और 1999 केचुनावों में भाजपा के नेतृत्व में क्षेत्रीय दलों को जोड़कर एनडीए बनवाने में जार्ज फर्नांडीस ने जबर्दस्त योगदान दिया।
इसी वजह से उन्हें एनडीए का संयोजक बनाया गया। जब तक जार्ज की चली एनडीए अटूट रहा। उनके राजनीतिक और शारीरिक रूप से कमजोर होने केबाद एनडीए में दरार पड़ी।
विजय नारायण कहते हैं जिस वड़ोदरा से नरेंद्र मोदी भारी बहुमत से जीते, उसी बड़ौदा में आपातकाल में जार्ज के ऐतिहासिक डाइनामाइट कांड की भूमिका लिखी गई। जार्ज का देश और गुजरात से पुराना रिश्ता है। लेकिन अब भाजपा भी उन्हें भूल गई है।