मोदी से लड़ने के लिए धुर विरोधियों ने मिलाया हाथ
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केंद्र में पूर्ण बहुमत से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनने के बाद राजनीति ने तेज करवट ली है।
मोदी और भाजपा से मुकाबले के लिए न सिर्फ जनता दल(यू), कांग्रेस, और वाम दल साथ आ रहे हैं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक दूसरे के धुर विरोधी नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव भी हाथ मिलाने जा रहे हैं।
कोशिश है कि बिहार में जद(यू) के नेतृत्व में नई सरकार का गठन करके उसमें राजद और कांग्रेस को भी शामिल किया जाए।
नीतीश ने खेला बड़ा दांव
नीतीश कुमार ने मु्ख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर जो दांव चला है, उसकी सियासी परिणिति बिहार और देश में गैर भाजपा दलों के धर्मनिरपेक्ष मोर्चे केगठन में होने जा रही है।
इसके लिए खुद पहल करके नीतीश कुमार ने राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और कांग्रेस नेताओं से बात की है।
नीतीश ने इस्तीफा देकर यह रास्ता खोला है कि अगर लालू प्रसाद यादव को उनकी जगह जद(यू) के किसी नए नेता के नेतृत्व में राजद को सरकार में शामिल करना चाहें तो पार्टी इसके लिए भी तैयार है।
भाजपा से सीधी लड़ाई
वैसे कोशिश यह है कि लालू को नीतीश के नाम पर राजी करके रविवार को होने वाली विधायक दल की बैठक में नीतीश को दोबारा नेता चुनकर उनका इस्तीफा वापस कराया जाए।
लेकिन अगर लालू इसके लिए नहीं राजी होते हैं तो किसी वरिष्ठ मंत्री को भी मुख्यमंत्री पद के लिए आगे किया जा सकता है।
जनता दल(यू) के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक लोकसभा चुनाव नतीजे आते ही नीतीश कुमार और शरद यादव ने यह तय कर लिया था कि अब गैर कांग्रेसवाद का समय खत्म हो गया और अब भाजपा के खिलाफ सीधी लड़ाई लड़ने की जरूरत होगी।
सेक्यूलर ताकतों को एक होने की अपील
इस आशय का बयान जद(यू) महासचिव के.सी.त्यागी ने अमर उजाला और कुछ टीवी चैनलों से बातचीत में शुक्रवार को देकर अपनी तरफ से कांग्रेस और अन्य दलों को संकेत दे दिए थे।
त्यागी का कहना है कि इस धर्मनिरपेक्ष मोर्चे में समान विचार वाले अन्य दलों को भी शामिल किया जाएगा। इसके बाद शुक्रवार की रात से ही सियासी हलचलें तेज हो गईं।
अहमद पटेल से मिले संकेत!
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल से भी जद(यू) नेता के.सी.त्यागी और नीतीश कुमार की बात हुई। पार्टी अध्यक्ष शरद यादव ने लालू प्रसाद यादव को इस आशय का प्रस्ताव भेजा।
कांग्रेस और लालू से सकारात्मक संकेत मिलने के बाद नीतीश कुमार ने अचानक राजभवन जाकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपा। इसके बाद फिर उन्होंने फोन से दिल्ली में कांग्रेस के अपने कुछ मित्र नेताओं से बात की।
अहमद पटेल के अलावा उनकी कांग्रेस के एक अन्य महासचिव से भी बात हुई।