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हिमाचलियों के मुद्दे को पार्टियों ने हाशिए पर डाला
शिमला/ब्यूरो
Updated Sat, 03 Nov 2012 09:50 AM IST
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हिमाचल विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार शुक्रवार को थम गया। भाजपा और कांग्रेस समेत सभी दलों ने जनता तक अपनी बात पहुंचने के लिए सभी संसाधनों और अपने सितारों को झोंक दिया, लेकिन हिमाचलियों के हितों से जुड़े मुद्दे प्रचार का केंद्र नहीं बन सके।
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भ्रष्टाचार, महंगाई, प्रदेश और केंद्र सरकारों की नाकामियों पर तीखे आरोप-प्रत्यारोप के बीच जनता के मुद्दे चुनाव प्रचार से गायब रहे। सत्ता के दावेदार दोनों प्रमुख दल, भाजपा और कांग्रेस का प्रचार मुद्दों के बजाए व्यक्ति केंद्रित ज्यादा रहा।
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पर्यावरण, टूरिज्म, शिक्षा का निजीकरण, बेरोजगारी, पार्किंग, ट्रैफिक, बागवानी और कृषि से जुड़े सवालों पर सार्थक चरचा नहीं हो सकी। सत्तारूढ़ भाजपा ने अपने पांच साल के कामों को आधार बनाते हुए लोगों के बीच जाने का फैसला किया था। लेकिन प्रचार के गति पकड़ते ही दूसरे मसले छा गए। पिछले पांच साल के काम की नहीं, बल्कि ये चर्चा हुई कि हिमाचल को किसने बेचा?
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कई दिन वीरभद्र सिंह पर आरोपों के इर्द-गिर्द ही प्रचार सिमटा रहा। वीरभद्र सिंह के खिलाफ पहले वीबीएस फाइल और बाद में इनकम टैक्स रिटर्न का मसला उठा तो लांछनों का दौर शुरू हो गया। हालांकि दोनों प्रमुख दल चुनाव प्रचार के छोटे शेडयूल से संतुष्ट दिखे। अब सभी को मतदान और फिर 20 दिसंबर को परिणाम का इंतजार है।
गडकरी फंसे तो डिफेंसिव हुई भाजपा
गडकरी फंसे तो डिफेंसिव हुई भाजपा
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर आरोप लगने के बाद पार्टी रक्षात्मक हो गई और प्रचार की रणनीति बदली गई। बहाना बना इंडक्शन चूल्हा। खासतौर से सब्सिडी वाले सिलेंडरों की सीलिंग पर पलटवार के लिए इंडक्शन चूल्हे को सभाओं में दिखाया गया। फिर शेष प्रचार महंगाई पर निकल गया।
एंटी इनकमबेंसी पर केंद्रित रही कांग्रेस
वहीं, कांग्रेस ने भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार और नाकामी को मुद्दा बनाया। कांग्रेस ने भी शुरू में आक्रामक हमलों के बाद केवल एंटी इनकमबेंसी को भुनाने पर ध्यान केंद्रित किया। केंद्रीय योजनाओं का धन खर्च नहीं करने पर प्रदेश सरकार को घेरने की कोशिश हुई। भाजपा नेताओं पर निजी हमले किए गए। वीरभद्र सिंह के निशाने पर धूमल रहे। इन सारे मसलों में विकास का मुद्दा बचा ही नहीं।
किसका हमला किसकी ओर?
-सोनिया गांधी ने हिमाचल में केंद्र से आए धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के आरोप मुख्यमंत्री धूमल पर दागे। उन्होंने कहा कि विकास का 10 हजार करोड़ रुपये हिमाचल नहीं खर्च पाया।
-प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ऊना में एक रैली के लिए आए और यह वही दिन था, जिस दिन उन्होंने मंत्रिमंडल फेरबदल किया। वह भी हिमाचल सरकार पर नाकामी का आरोप जड़ गए।
-पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने किसी नेता विशेष पर आरोप लगाने के बजाए मतदान को आवश्यक बनाने की राय जाहिर की।
-मोदी ने पीएम से लेकर शशि थरूर और वीरभद्र पर हमला बोले। उनके 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड के बयान पर काफी बवाल हुआ।
-अरुण जेटली जैसे ठान कर आए थे कि वीरभद्र सिंह को ही घेरना है। उन्होंने शिमला में दो प्रेस वार्ताएं की और दोनों में ही वीरभद्र सिंह को मुख्य निशाना बनाया। मसला था उनकी इनकम टैक्स रिटर्न।
-केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा पहली बार 10 हजार करोड़ का आंकड़ा लोगों के सामने लाए कि यह धनराशि केंद्र ने दी, लेकिन हिमाचल खर्च नहीं कर पाया। बाद में इस आंकड़े को सबसे दोहराया। हालांकि इसकी डिटेल किसी ने नहीं दी।