क्या सभी भारतीय हिन्दू हैं?
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देश में पिछले कुछ हफ्तों से यह बहस छिडी हुई है कि भारत के सभी नागरिकों को क्यों न हिन्दू कहा जाए।
कुछ प्रमुख हिंदू संगठनों का तर्क है कि ऐतिहासिक, जातीय और सांस्कृतिक नजर से भारत के प्रत्येक नागरिक को हिंदू ही कहा जाना चाहिए।
हिंदू समर्थक समूहों ने उत्तर प्रदेश में मुसलमानों के खिलाफ एक आंदोलन शुरू किया हुआ है जिसका उद्देश्य उनके अनुसार हिंदू लड़कियों को मुस्लिम लड़कों से शादी करने से रोकना है।
हिंदू समूहों का कहना है कि मुस्लिम लड़के हिंदू लड़कियों को सिर्फ उन्हें मुसलमान बनाने के लिए शादी करते हैं। इस कथित सुनियोजित साजिश को उन्होंने 'लव जिहाद' का नाम दिया है।
उनका यह भी दावा है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों विशेषकर यौन अपराधों के अधिकांश घटनाओं में मुस्लिम युवा शामिल होते हैं।
लव जिहाद का मुद्दा
तेरह साल पहले गुजरात में मोदी के सत्ता में आने के बाद इस तरह के आंदोलन हिंदू संगठनों ने गुजरात में शुरू किए थे और कई शादीशुदा जोडों को हिंसा और बहिष्कार का निशाना बनाया गया था जिसमें लडकी का संबंध हिंदू धर्म से था।
आरएसएस और हिंदू संगठन इस तरह के आंदोलन केरल में भी चला चुके हैं और वहां तो औपचारिक कथित 'लव जिहाद' की सीबीआई से जांच भी कराई गई थी।
हिंदुत्व की चर्चा हो या 'लव जिहाद' के नाम पर मुसलमानों और उनके धर्म को लक्ष्य बनाने की मुहिम, उनसे मोदी सरकार के बारे में संदेह पैदा होने लगे हैं।
मोदी ने अपने चुनाव अभियान के दौरान केवल विकास और बेहतर सिस्टम की स्थापना के नाम पर जनता से वोट मांगा था।
हिंदुत्व का नजरिया
अभी भारत के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिए अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने विकास के एजेंडे को दोहराया और जनता से अपील की कि वे विकास के लिए 10 साल का मौका दें और इस अवधि में धर्म और जाति के नाम पर दंगे और हिंसा न होने दें।
तो क्या ये सब कुछ मोदी के विकास के एजेंडे को नाकाम करने की कोशिश है।
कुछ पर्यवेक्षकों का मानना है कि भाजपा इस समय आंतरिक रूप से वैचारिक मतभेदों का शिकार है। एक तरफ तो वे तत्व हैं जो निर्णायक चुनावी जीत के बाद देश की व्यवस्था को हिंदुत्व के तर्ज पर बदलना चाहते हैं और वे बहुत जल्दबाजी में हैं।
दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोदी और उनके वे साथी जो चुपचाप आर्थिक विकास और सुधारों पर जोर दे रहे हैं। ढाई महीने की सत्ता में देश की अर्थव्यवस्था पिछले ढाई साल के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुंच चुकी है।
इस हफ्ते जब मोदी सरकार अपने 100 दिन पूरे कर रही होगी तब सरकार पहले ही कई मोर्चों पर दूरगामी बुनियादी परिवर्तन की शुरुआत कर चुकी होगी।