जज ने पत्नी को तीन बार तलाक कह तोड़ दिया रिश्ता
रिश्तों के बिखराव का अलीगढ़ में एक ऐसा मामला सामने आया है कि हर कोई हैरत में है। शहर के एक अतिरिक्त जिला जज ने अपनी पत्नी को मौखिक रूप से तीन बार तलाक कहकर शरिया कानून पर नए विवाद को जन्म दे दिया है।
वहीं इसके खिलाफ पीड़ित पत्नी ने भी जज के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार पीड़ित महिला अफशा खान ने अपने पति मोहम्मद जहीरुद्दीन सिद्दीकी की शिकायत हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस से करते हुए गुस्से में दिए गए तलाक की परिभाषा तय करने की मांग की है। अपनी याचिका में अफशा ने कहा कि उसके साथ एक ऐसे व्यक्ति ने अन्याय किया है जिसके ऊपर सभी को न्याय दिलाने की जिम्मेदारी है।
पीड़िता का आरोप है कि उसे जज और उनके परिजनों ने प्रताड़ित किया। उन्होंने कहा कि इस लड़ाई के पीछे उसका मकसद समाज को एक सही संदेश देना है। वहीं मौखिक रूप से तलाक देने के संबंध में जब अतिरिक्त जिला जज सिद्दीकी से बात की गई तो उनका कहना था हम इस संबंध में किसी समझौते तक नहीं पहुंच सके जिसके बाद मैंने शरिया कानून के तहत उसे तलाक दे दिया।
महिला ने पति के खिलाफ खोला मोर्चा
बता दें कि जब मौखिक कानून को लेकर लगातार बहस चल रही है तभी पिछले साल आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा था कि फिलहाल तीन बार तलाक की व्यवस्था में कोई बदलाव होने की उम्मीद नहीं है। बोर्ड ने कुछ मुस्लिम बुद्िधजीवियों की उस सलाह को भी नकार दिया था जिसमें अंतिम तलाक से पूर्व तीन माह के लिए नोटिस पीरियड देने की मांग की गई थी।
वहीं आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना अब्दुल रहीम कुरैशी कहते हैं कि, कुरान और हदीश के अनुसार तीन तलाक एक गुनाह है लेकिन एक बार अगर यह प्रक्रिया हो जाती है तो इसमें बदलाव करना मुश्किल है।
साल 1986 में राजीव गांधी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए एक कानून पास किया था जिसमें मुस्लिम महिलाओं की स्थिति सुधारने और शर्तों के साथ मुस्लिम महिलाओं को आजीवन भत्ते का अधिकार दिया गया था।
वहीं अलीगढ़ का यह मामला उस समय सुर्खियों में आया जब पीड़िता अफशा एक सामाजिक कार्यकर्ता मारिया आलम उमर के पास पहुंची और उन्हें सुप्रीम कोर्ट और हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को भेजे पत्र दिखाए।
मुस्लिम महिला संगठनों ने मौखिक तलाक को बताया अवैध
उमर के अनुसार महिला के पास इसके अलावा कोई रास्ता भी नहीं रह गया था। बता दें कि 49 वर्षीय अफशा का निकाह बीते 16 अगस्त को 59 वर्षीय अतिरिक्त जिला जज सिद्दीकी के साथ मैरिस रोड स्थित होटल पाल्म ट्री में हुआ था।
अफशा ने बताया कि उसकी शादी में उसके परिवार के सभी सदस्यों के अलावा मेरे पहले पति का बेटा और अन्य लोग भी शामिल हुए थे। अफशा ने आरोप लगाया कि वह सिद्दीकी से डरी हुई है क्योंकि उन्होंने उसे धमकी दी है कि तुम मेरी हैसियत नहीं जानती हो, मैं कोई सामान्य आदमी नहीं हूं।
इसलिए मेरे खिलाफ कोई गलत कदम उठाने की हिम्मत मत करना। तुमने अपने भाई और परिवार के बाकी सदस्यों के लिए परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए। वहीं भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की जाकिया सोमन का कहना है कि यह तलाक अवैध है। उसे तलाक नहीं दिया गया।
महिला मदद के लिए काजी के पास जा सकती है और वापस अपने घर भी लौट सकती है। हम इस मुद्दे को लेकर मुस्लिम पर्सनल लॉ में बदलाव की मांग करेंगे, मौखिक तलाक कुरान के अनुसार नहीं है।