आईएस के आतंक से यूपी के इस जिले को सबसे ज्यादा खतरा
दिल्ली में आईएस से जुड़े एक संदिग्ध आतंकी के पकड़े जाने और उसकी यूपी में सक्रियता को लेकर आई सूचनाओं के बाद सहारनपुर में भी पुलिस प्रशासन से लेकर खुफिया विभाग अलर्ट हो गया है। देश की कई बड़ी आतंकी घटनाओं से सहारनपुर का नाम जुड़ने के कारण ऐसे किसी भी संदिग्ध या पुष्ट मामलों को प्रशासन अब हल्के में नहीं लेता है।
सहारनपुर में जैश ए मोहम्मद, लश्कर-ए- तैयबा और इंडियन मुजाहिद्दीन जैसे आतंकी संगठनों की संदिग्ध गतिविधियां सामने आ चुकी हैं। ऐसे में दिल्ली में पकड़े संदिग्ध आतंकी से जुड़ी गतिविधियों और वहां उससे की जा रही पूछताछ तक के हालात पर गोपनीय स्तर पर निगरानी की जा रही है।
बता दें कि इस जिले को आतंकियों ने एक या दो बार नहीं बल्कि कई बार शरणस्थली के रूप में भी प्रयोग किया है। आतंकी संगठनों के स्लीपर सेल की सक्रियता के मामले भी सुर्खियों में रह चुके हैं।
यहीं बंधक बनाए गए थे पांच विदेशी नागरिक
आपको याद दिलाएं कि करीब 20 बरस पहले जैश ए मोहम्मद के चीफ मौलाना मसूद अजहर को छुड़ाने के लिए यहां पांच विदेशी नागरिकों को बंधक बनाने की घटना हो चुकी है। पाक के लिए जासूसी के आरोप में शाहिद इकबाल भट्टी उर्फ देवराज सहगल पकड़ा जा चुका है।
2010 में रुड़की के गंगनहर थाना पुलिस के साथ एटीएस, एसटीएफ द्वारा पकड़े गये आईएसआई एजेंट आबिद अली उर्फ असद अली उर्फ अबू बकर उर्फ अजीत सिंह निवासी हंजरवाल, थाना ठोकर न्याजबेग, लाहौर से भी गोपनीय दस्तावेज और रुड़की छावनी का नक्शा बरामद किया जा चुका है। उसने सहारनपुर के छुटमलपुर में रहकर यह जानकारियां एकत्र की थी।
मुंबई में आतंकी संगठन लश्कर के रियाज, अब्दुल लतीफ को मुंबई एटीएस ने पकड़ा था। उसके पास से सहारनपुर और मऊ के फोन नंबर मिले थे। करीब एक साल पहले लश्कर आतंकी अब्दुल सुभान के पुत्र आलम को भी दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने देवबंद से हिरासत में लिया था।
वह यहां रहकर पढ़ाई कर रहा था। अब्दुल सुभान पर आरोप था कि उसने मुजफ्फरनगर दंगा प्रभावित इलाकों का दौरा कर यहां के युवकों का ब्रेन वॉश कर संगठन से जोड़ा था। वह पाकिस्तान में बैठे लश्कर कंमाडर जावेद बलूची से सीधे संपर्क में था।
पिछले साल ही पकड़ा गया था आतंकी एजाज सईद शेख
छह सितंबर 2014 को सहारनपुर रेलवे स्टेशन से इंडियन मुजाहिद्दीन का आतंकी एजाज सईद शेख की गिरफ्तारी ने एक बार सहारनपुर के आतंकी कनेक्शन को उजागर किया था। पुलिस सूत्र बताते हैं कि सहारनपुर में कई स्लीपर सेल्स सक्रिय हैं, जिसमें विशेष प्रशिक्षण प्राप्त गुप्त एजेंट कार्य कर रहे हैं। इन्होंने ऐसा कौशल और तकनीक विकसित कर ली, जिससे पुलिस को भनक तक न लग सके।
क्या है स्लीपर सेल
स्लीपर सेल अपने मूल प्रदेश या प्रांत में विशेष प्रशिक्षण पाये गुप्त एजेंटों से लेस होता है। हथियार, आधुनिक संचार उपकरण और अन्य साजों सामान से लेस रहने वाले एजेंटों को निशाना बनाने वाले देश या प्रदेश की संस्कृति या समुदाय में खुद को खपाने की जिम्मेदारी देकर भेज दिया जाता है। दहशत फैलाने के साथ साथ आतंकी संगठनों ऐसे ही स्लीपर सेल्स से खुफिया जानकारी भी प्राप्त करते है।