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जब अखिलेश यादव ने सुनाई अपनी रैगिंग की कहानी

Thu, 01 Nov 2012 12:29 PM IST
गोरखपुर/ब्यूरो
गोरखपुर/ब्यूरो Updated Thu, 01 Nov 2012 12:29 PM IST
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akhilesh yadav tells about his ragging

मालवीयंस के स्वर्णिम सफर के 50 साल की पूर्णाहुति नए संकल्प के साथ हुई। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की उपस्थिति ने इस समारोह को कई मायनों में यादगार बना दिया। उन्होंने कॉलेज के दिनों की याद ताजा की और रैगिंग का वाकया बताकर हंसाया। महामना मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कॉलेज ने उसी गर्मजोशी से उनका स्वागत किया। कभी तालियां बजीं तो कभी हाथ लहराकर खुशी का इजहार हुआ।

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मां सरस्वती और मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर मुख्यमंत्री ने परंपराओं के प्रति सम्मान जताया। इस अवसर पर ‘मदन मोहन के चरण में यह मेरा जीवन चढ़ा दो’ के मुखड़े से शुरू हुए कुलगीत ने रोमांचित कर दिया। इस गीत की परिकल्पना जितनी सुंदर है उतना ही सुंदर है इसका सुर और साज भी।
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संबोधन की बारी आई तो मुख्यमंत्री ने अपने कॉलेज के दिनों को याद किया। कहा यहां आकर यादें ताजा हो गईं। प्रवेश परीक्षा न पास करने के कारण सरकारी कॉलेज नहीं मिला। दक्षिण के प्राइवेट कॉलेज में दाखिला लेना पड़ा था। रैगिंग का अनुभव सुनाते हुए उन्होंने कहा, ‘मेरे ही बैच के एक साथी ने कद काठी में मजबूत होने का लाभ उठाते हुए रैगिंग लेने वाले सीनियर्स के साथ शामिल होकर हमें खूब तंग किया। यह भेद तब खुला जब दूसरे दिन की रैगिंग में वह भी हमारी ही लाइन में खड़ा मिला। आंखें मिलीं तो शरमा गया। बोला, भारी भरकम शरीर का फायदा उठाते हुए मैं सीनियर्स की टोली में शामिल हो गया था।’ इसे सुनकर लोगों ने खूब ठहाके लगाए।
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अपने 20 मिनट के संबोधन में जहां कॉलेज के दिनों की याद करके और विश्वविद्यालय बनाने की घोषणा करके उन्होंने सबके दिलों को छुआ, वहीं सियासत की भी तान छेड़ने से नहीं चूके। कहा, जो इंजीनियरिंग कर लेता है वह बहुत समझदार हो जाता है। बिजली की समस्या से सरकार की छवि पर असर पड़ता है। पिछली सरकार से उन्हें जर्जर इंन्फ्रास्ट्रक्चर मिला है। इसे इंजीनियर ही समझ सकता है और समझा भी सकता है।

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