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'भाजपा ने बिगाड़ा सांप्रदायिक माहौल'

Sat, 19 Apr 2014 06:34 PM IST
Updated Sat, 19 Apr 2014 06:34 PM IST
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akhilesh yadav exclussive interview

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आलोचक ये कहकर बराबर उन्हें घेरते रहे हैं कि उनके दो साल के कार्यकाल में मुज़फ़्फ़रनगर समेत 100 से अधिक दंगे हो चुके हैं। लेकिन अखिलेश इसके लिए अपनी पार्टी को नहीं बल्कि पूरी तरह भाजपा को ज़िम्मेदार बताते हैं। दरअसल दंगे और उसके आधार पर होने वाला ध्रुवीकरण पश्चिमी उत्तर प्रदेश और रुहेलखण्ड में चुनाव का मुख्य मुद्दा बनाया गया।

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भले ही इस ध्रुवीकरण के लिए सत्ताधारी समाजवादी पार्टी और भाजपा दोनों ही को ज़िम्मेदार माना जा रहा हो लेकिन अखिलेश यादव ने बीबीसी के साथ ख़ास इंटरव्यू में इसके लिए केवल भाजपा को ही दोषी ठहराया। उन्होंने कहा, "भारतीय जनता पार्टी का प्रयास था कि सांप्रदायिक ध्रुवीकरण हो जाए और एक डिवीज़न दिखाई दे। लेकिन समाजवादी पार्टी ने उस कोशिश को रोका है।"
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अखिलेश का कहना है कि 'धार्मिक सद्भावना और धर्म निरपेक्षता के पक्ष में मतदान हुआ है जो अच्छी बात है।' यह पूछने पर कि ध्रुवीकरण में समाजवादी पार्टी का क्या योगदान है, अखिलेश ने भाजपा को पूरी तरह ज़िम्मेदार ठहराते हुए कहा, "जो कम्युनल रास्ता है, जो साम्प्रदायिकता का रास्ता है वो उनको आसान दिखता है। वहीं सेक्युलर होना बहुत मुश्किल है। जो उत्तर प्रदेश में माहौल बना है, केवल सीट जीतने के लिए, उसके लिए पूरी ज़िम्मेदार भारतीय जनता पार्टी है।"

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मुसलमानों की रक्षक है सपा

akhilesh yadav exclussive interview

ध्रुवीकरण का जितना फ़ायदा भाजपा को होगा उससे थोड़ा ही कम समाजवादी पार्टी को होगा। अगर भाजपा हिन्दुओं और धर्म की रक्षा के नाम पर वोटरों पर ख़ामोशी से डोरे डाल रही है तो समाजवादी पार्टी मुसलमानों के रक्षक के रूप में अपनी सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रयास में है। लेकिन अखिलेश ज़ोर देकर कहते हैं कि उनकी सरकार धर्मनिरपेक्ष सरकार है। प्रदेश में हुए साम्प्रदायिक हिंसा और दंगों के लिए भी वे भाजपा को ही दोषी मानते हैं।

जब उनसे यह पूछा गया कि यदि ध्रुवीकरण के आधार पर ही चुनाव हो रहे हैं तो फिर विकास कोई मुद्दा ही नहीं है, इस पर मुख्यमंत्री का कहना है, "समाजवादी पार्टी और हमारी यह कोशिश रही है कि विकास का एजेंडा आगे रहे और कम्युनल लोगों को रोकें।"

भाजपा पर सांप्रदायिकता का दोष मढ़ते हुए अखिलेश यादव बोले, "भारतीय जनता पार्टी ने अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का प्रचार तो बहुत किया कि ये डेवलपमेंट करते हैं, इनका एक अलग गुजरात मॉडल है लेकिन उत्तर प्रदेश आते-आते ये लोग कम्युनल हो गए।" अखिलेश यादव आज़म खान के कारगिल युद्ध के बारे में दिए गए बयान का बचाव करते हुए कहते हैं, "कई बार आप जो कहना चाहते हैं वो नहीं निकलता है"।

पिता से डांट पर ये दिया जवाब

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यह पूछने पर कि उनके विकास के दावों को कितना सच माना जाए क्योंकि खुद उनके पिता और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव सबके सामने उनको इस बात के लिए डांट चुके हैं कि प्रदेश सरकार ठीक से काम नहीं कर रही है, इस पर अखिलेश कहते हैं कि मुलायम सिंह को जहां जानकारी मिली होगी उसे उन्होंने मंच के माध्यम से उन तक पहुंचाने की कोशिश की और जो सरकार को सुधार करना था वो सुधार भी किया है।

लेकिन अखिलेश ये मानने को तैयार नहीं हैं कि मुलायम द्वारा मंच से की गयी आलोचना से उनकी सरकार की छवि धूमिल हुई है। वह कहते हैं, "वह राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और मेरे पिताजी भी हैं। मैं समझता हूँ कि उन्होंने यह ठीक किया। अगर कोई बात उनकी जानकारी में आई है तो उन्होंने राय दी है, समझाया है और सरकार ने अमल किया है उस पर। मैं समझता हूँ कि इसमें कोई ग़लत बात नहीं है और न इससे छवि बिगड़ती है।"

पिता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हों और बेटा प्रदेश का मुख्यमंत्री ऐसे में पिता-पुत्र का संबंध थोड़ा जटिल हो जाता है। अखिलेश यादव से यह पूछना स्वाभाविक था कि क्या कभी उन्होंने अकेले में मुलायम से यह कहा है कि वो मंच से सरकार की आलोचना ना किया करें क्योंकि उससे जनता के बीच एक गलत संदेश जाता है? जवाब में अखिलेश कहते हैं कि उन्होंने यह बात उनसे नहीं, बल्कि प्रेस से कही है। हँसते हुए वह कहते हैं, "मैं कंफ्यूज हो जाता हूँ कि मैं उन्हें पिता कब समझूँ और राष्ट्रीय अध्यक्ष कब समझूँ।"

रेप वाले बयान पर पिता का बचाव

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अपने पिता के बलात्कार को 'लड़कों की ग़लती' वाले बयान पर अखिलेश कहते हैं, "बाद में नेताजी (मुलायम) ने और पार्टी ने भी कहा है कि फांसी से ज़्यादा कोई कड़ी कार्रवाई हो तो वो करनी चाहिए। आज बात साफ़ हो गई है और नेताजी ने भी कहा है कि हम महिलाओं का सम्मान करते हैं।"

चुनावों के बाद तीसरे विकल्प की बात करते हुए अखिलेश कहते हैं कि इस चुनाव में तीसरे मोर्चे को सबसे ज़्यादा सीट मिलेंगीं और देश चाहता है कि एक सेक्युलर और समाजवादी सोच कि सरकार बने।

अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनते ही यह चर्चा शुरू हो गई थी कि उनके चाचा शिवपाल, जो अखिलेश के मंत्रिमंडल में एक वरिष्ठ मंत्री हैं अपने भाई मुलायम के फैसले से नाखुश थे। और जब मुलायम ने सरेआम सरकार कि आलोचना करनी शुरू की तो यह कहा जाने लगा कि उत्तर प्रदेश में चार मुख्यमंत्री हैं, मुलायम, आज़म, शिवपाल और अखिलेश।

यहां काम ना हो पाने का कारण बताया गया आज़म और शिवपाल द्वारा अखिलेश की बात को अनसुनी करना। यूँ तो शिवपाल को मुलायम की सरकार में भी महत्वपूर्ण विभाग मिलते थे लेकिन अभी तक उनका जन्मदिन साधारण ढंग से मनाया जाता था। लेकिन इस बार उनका जन्मदिन एक विकास पुरुष के रूप में मनाया गया। आखिर प्रदेश के विकास का श्रेय किसको दिया जाना चाहिए, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को या शिवपाल को?

अखिलेश कहते हैं, "देखिए जो विकास कार्य हो रहे हैं वह सरकार की ज़िम्मेदारी हैं। हालांकि मैं मुख्यमंत्री हूँ। हमारे साथ बहुत से कैबिनेट और राज्य मंत्री भी हैं। सरकार के मुखिया को लाभ मिलता है और सरकार के मुखिया का ही नुक़सान भी होता है। मैं विकास करने में ज़्यादा विश्वास करता हूँ विकास पुरुष बनने में कम। विकास पुरुष बनने कि खुली छूट है, खुला मैदान है।"
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