यूपी के टीपू पर भी चढ़ा केजरीवाल का रंग!
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आम आदमी पार्टी की राह पर चलते हुए यूपी के सीएम और सपा के युवराज अखिलेश यादव ने भी अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या आधी कर दी है।
खबर के मुताबिक पहले उनके काफिले में करीब दस गाड़ियां होती थीं लेकिन अब उनके काफिले में मात्र पांच ही गाड़ियां हुआ करेंगी।
साथ ही उनके काफिले के लिए कहीं ट्रैफिक नहीं रोका जाएगा। इससे पहले अखिलेश ने जनता दरबार भी शुरू कर दिया था जिसे मायावती सरकार के दौरान बंद कर दिया गया था।
माना जा रहा है कि ये उसी आम आदमी पार्टी का असर है जिसकी नज़र दिल्ली के बाद अब यूपी पर टिकी हैं। ऐसे में मुलायम को पीएम की कुर्सी पर बैठाने का सपना देख रहे अखिलेश ने कमर कस ली है।
छत्तीसगढ़ में AAP का असर
सादगी की लहर ने छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह को भी अपनी लपेट में ले लिया। यूं तो छत्तीसगढ़ दिल्ली से दूर है लेकिन दिल्ली में झाड़ू के चलने से जो धूल उड़ी है वो छत्तीसगढ़ तक जा पहुंची है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने किसी भी वीआईपी को बंदूकों से सलामी देने की व्यवस्था खत्म कर दी है। इसके साथ-साथ छत्तीसगढ़ सरकार ने नया नोटिफिकेशन जारी करके वीआईपी लिस्ट को छोटा भी कर दिया है।
रमन सिंह सरकार ने मंत्रियों और अधिकारियों को भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पॉलिसी अपनाने की सलाह दी है। रमन सिंह ने कहा कि उन्होंने खुद ऐसे मामलों पर निगाह रखेंगे।
एमपी में AAP का असर
मध्यप्रदेश में भी आम आदमी पार्टी का असर नज़र आने लगा है। एमपी के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री नरोत्तम मिश्रा भी आज कल अस्पतालों का औचक निरीक्षण करने में लगे हैं।
आम आदमी पार्टी के नए नवेले मंत्री आजकल सर्दी की रातों में दिल्ली की सड़कों पर निकलते हैं और रैनबरेरों का हाल जानते हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने एक छह सदस्यों की कमेटी बनाने की कवायद भी शुरू कर दी है जो सरकारी भष्टाचार से मुकाबला करेगी।
फेसबुक पर शिवराज अपने इन भ्रष्टाचार विरोधी विचारों को रख रहे हैं और उनको जनता का रिस्पॉंस भी मिल रहा है।
राजस्थान में AAP का असर
राजस्थान में बीजेपी सरकार की मुख्या वसुंधरा राजे ने भी आम आदमी से नाता जोड़ने की कवायद शुरू कर दी है। सड़क पर एक महिला स्कूटर से गिरी तो राजे के सुरक्षाकर्मियों ने उसे उठाया और खुद सीएम ने उसका हाल चाल पूछा।
यही नहीं आजकल वसुंधरा ट्रैफिक सिग्नलों पर रुक कर लोगों से बात करती हैं और उनकी परेशानियां जानने की कोशिश करती हैं।
कई अन्य मुख्यमंत्रियों की तरह राजे ने भी रूट लगाने से परहेज किया है। पहले सीएम के लिए रास्ता खाली कर दिया जाता था, जिस वक्त सीएम का काफिला सड़क से गुजरता था उस वक्त वो बिल्कुल खाली होती थी लेकिन राजे ने ऐसा करने से इंकार कर दिया है।