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अखिलेश सरकार नहीं भेज रही कैंपों में हुई मौत का ब्यौरा

Tue, 31 Dec 2013 12:56 AM IST
गुंजन कुमार,अमर उजाला/ दिल्ली
गुंजन कुमार,अमर उजाला/ दिल्ली Updated Tue, 31 Dec 2013 12:56 AM IST
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akhilesh government is not sent death number of camp

अखिलेश सरकार दंगा पीड़ित के कैंपों में बच्चों की मौत पर केंद्र की ओर से मांगी गई रिपोर्ट की कोई सुध नहीं ले रही।

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उत्तर प्रदेश सरकार को तीन बार आग्रह कर चुके केंद्र ने सोमवार को एक बार फिर कैंपों में 34 बच्चों की मौत से संबंधित व्यौरा भेजने की गुजारिश की है। गृह मंत्रालय के मुताबिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर स्थित इन कैंपों के हालात को लेकर कई हलकों में सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में यह केंद्र की जिम्मेदारी है कि हालात का पता लगा कर उचित कार्रवाई करे। लेकिन अखिलेश सरकार लगातार इसकी अनदेखी कर रही है।
 
गृह मंत्रालय के मुताबिक बीते आठ दिसंबर से अबतक उत्तर प्रदेश सरकार को चार बार रिपोर्ट भेजने के कहा गया है। केंद्र सरकार यह जानना चाहती है कि  बच्चों की मौत की वजह क्या थी, मरने वालें बच्चों की संख्या वाकई कितनी है और राज्य सरकार इसके लिए क्या कर रही है।
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गौरतलब है कि अखिलेश सरकार की धुर विरोधी बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा) सांसदों ने शीतकालीन सत्र के दौरान बच्चों की मौत के मुद्दे पर लोकसभा और राज्यसभा को करीब हफ्ते भर बाधित रखा था। पिछले हफ्ते कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी दंगा पीड़ितो के कैंप का दौरा कर वहां के खराब हालात के लिए मुख्यमंत्री   अखिलेश यादव पर सवाल खड़ा किया था। और तो और राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू यादव ने भी एक दिन पहले कैंपों का दौरा किया है।
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उत्तर प्रदेश की ओर से गठित उच्चस्तरीय कमेटी ने इन कैंपों में 12 साल के कम आयु के 34 बच्चों के मरने की रिपोर्ट दी है। यह मौतें सात सितंबर के 20 दिसंबर के बीच हुई है। यह कैंप फिलहालत मुजफ्फरनगर के लोई और शामली के मदरसा तैमूल शाह, मलकपुर, बर्नवी और ईदगाह में लगे हैं। कड़ाके की ठंड में इस कैंपों में अभी भी 4,783 लोग रह रहे हैं।


राज्य सरकार के मुताबिक यह मौत ठंड ने नहीं हुई है। राज्य के प्रमुख सचिव (गृह) ए के गुप्ता ने यह कह कर विवाद खड़ा कर दिया था कि ठंड के किसी की मौत नहीं होती। अगर ऐसा होता तो ठंडे प्रदेश साइबेरिया में कोई जिंदा नहीं रहता।

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