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पार्टी नेताओं की जासूसी में लगी अखिलेश सरकार
अलीगढ़/ब्यूरो
Updated Tue, 30 Oct 2012 01:35 PM IST
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प्रदेशस्तरीय पदाधिकारी, जिला स्तरीय नेता हों या फिर चुनाव जीत कर आए विधायक। आलाकमान के पास लगातार पहुंच रही शिकायतों से सपा की सरकार बेचैन हो गई है। उलझन यहां तक बढ़ गई है कि अब सरकार अपने ही नेताओं की जासूसी में लग गई है। प्रदेश सरकार ने अपने खुफिया तंत्र के सहारे अपने ही नेताओं का फीडबैक जुटाना शुरू कर दिया है।
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यह खुफिया जांच काली कमाई को भी उजागर करेगी। इसके अलावा खुफिया तंत्र पार्टी की छवि को साफ सुथरा बनाए रखने के लिए अपराधियों से नेताओं की साठगांठ पर भी पैनी नजर रखेगी। इधर, सात नवंबर के बाद किसी भी विभाग की छापामारी कर विकास कार्यों का जायजा लेने का सीएम का एलान भी राजनीतिक और प्रशासनिक बेचैनी बढ़ा रहा है। सीएम कब, कहां आएंगे यह अब तक घोषित नहीं हुआ है।
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प्रकोष्ठों के पदों की सौदेबाजी
सत्तारूढ़ होने के बाद से ही समाजवादी पार्टी की मेन बॉडी से लेकर दूसरे प्रकोष्ठों में पदों को लेकर जबरदस्त मारामारी हो रही है। पार्टी के सभी 15 प्रकोष्ठों में ऐसी ही आपाधापी मच रही है। हालत यह है कि कुछ स्थानीय छुटभैये नेता युवाओं को पद देने को लेकर बाकायदा सौदेबाजी कर रहे हैं। पद दिलाने के नाम पर रोज किसी न किसी को ‘क्लाइंट’ बनाया जा रहा है।
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जांच के बिंदु
1-पांच साल पहले विधायकों और पदाधिकारियों की चल-अचल संपत्ति क्या थी? उनके पास कितने वाहन थे? अब वर्तमान में संपत्ति कितनी है और कितने वाहन है? इसमें किस तरह से इजाफा हुआ है? कहीं इसमें काली कमाई तो शामिल नहीं है?
2-चुनिंदा स्थानीय नेताओं के रिश्तेदारों, बिजनेस पार्टनर और खास दोस्तों की माली हालात कैसी है? इसमें कितनी बढ़ोत्तरी हुई है? यह बढ़ोत्तरी किस तरह से हुई है। बढ़ोत्तरी का आधार क्या है? इसके कागजात सही है या गलत?
3-क्या नेताओं के आसपास माफिया, अपराधियों और अराजक तत्वों का जमावड़ा हो रहा है? कौन से नेता अपराधियों को छुड़ाने के लिए थाने में कितनी सिफारिश कर रहे हैं। ऐसी सिफारिशों की लिस्ट तैयार हो रही है।
4-क्या नेता आम जनता को सुशासन और साफ छवि की तस्वीर पेश कर रहे हैं या नहीं? कहीं नेताओं की कार्यप्रणाली से समाजवादी पार्टी की छवि को अंदरूनी आघात तो नहीं हो रहा है। जनाधार बढ़ रहा है या फिर कम हो रहा है?
जिलाध्यक्ष डॉ. रक्षपाल सिंह ने बताया कि प्रकोष्ठों के पदों पर नेताओं के मनोनयन में आखिरी मुहर जिला संगठन को लगानी है। पदों की सौदेबाजी का एक भी मामला सामने आया तो संबंधित प्रकोष्ठ के जिला और महानगर अध्यक्ष को इसका जिम्मेदार माना जाएगा। जिस पर पार्टी आलाकमान से अनुमति लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई कराई जाएगी। सभी वरिष्ठ नेताओं का फीडबैक लेने का निर्णय सार्थक है। इससे पार्टी की स्पष्ट छवि जनता के बीच होगी। आलाकमान भी अपने नेताओं पर पूरा भरोसा कर सकेगा।