‘सच जानने वाले' आसाराम के रसोइये की हत्या
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संत आसाराम के रसोइया रहे अखिल गुप्ता (36) नाम के युवक की मुजफ्फरनगर में जानसठ रोड पर रविवार की रात गोली मारकर हत्या कर दी गई। आसाराम पर सूरत के आश्रम में दो बहनों के साथ दुष्कर्म के आरोप के मामले में अखिल सरकारी गवाह था। वारदात को आसाराम प्रकरण में सरकारी गवाह बनने के कारण से जोड़कर देखा जा रहा है।
एसएसपी हरिनारायण सिंह ने कहा कि मृतक के साथ लूटपाट भी नहीं हुई, कोई रंजिश भी सामने नहीं आई है। हत्या के कारणों की खोजबीन की जा रही है। सूचना पर तमाम पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और बदमाशों की तलाश में चेकिंग अभियान चलाया, लेकिन हत्यारों का कोई पता नहीं चला।
शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला अबूपुरा निवासी अखिल गुप्ता (36) पुत्र नरेशचंद मीनाक्षी चौक के निकट स्थित गंगा प्लाजा में दूध डेयरी चलाता था। तीन माह से अखिल का परिवार जानसठ रोड स्थित गीता एन्क्लेव में रह रहा था। रविवार रात करीब सवा आठ बजे अखिल दुकान बंद कर स्कूटर से घर लौट रहा था। जैसे ही वह जानसठ रोड स्थित महालक्ष्मी एन्क्लेव के निकट पहुंचा, पहले से खड़े बदमाशों ने पीछे से उसे गोली मार दी। सूचना पर पहुंची पुलिस उसे जिला अस्पताल ले गई, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
जानकारी मिलने पर मोर्चरी पहुंचे परिजनों ने बताया कि अखिल पहले आसाराम के अहमदाबाद स्थित आश्रम में बतौर रसोइया काम करता था। उसकी शादी भी आसाराम के आश्रम में ही रहने वाली रायपुर निवासी वर्षा से हुई थी। आसाराम के दुष्कर्म संबंधी आरोपों में घिरने से कुछ समय पहले ही अखिल पत्नी वर्षा के साथ अहमदाबाद से लौट आया था। आसाराम की गिरफ्तारी के बाद गुजरात पुलिस अखिल को पूछताछ के लिए साथ ले गई थी, जहां वह सरकारी गवाह बन गया था।
आसाराम का ‘सच’ जानता था रसोईया
संत आसाराम बापू के रसोईये की हत्या के पीछे का सच बड़ा गहरा है। 11 साल तक अहमदाबाद के आश्रम में रहे शहर के युवक अखिल गुप्ता की शादी भी आश्रम में हुई थी। वर्षा नाम की जिस लड़की से शादी हुई, वह भी आसाराम की सेवादार थी। सूरत की दो बहनों से जुड़े यौन उत्पीड़न के मामले में अखिल सरकारी गवाह बन गया था। शहर के अबूपुरा निवासी नरेश गुप्ता का बेटा अखिल गुप्ता सत्संग में रुचि के चलते वर्ष 1997 में संत आसाराम का भक्त बन गया था। सेवा की प्रवृत्ति के चलते बापू ने उसे अपना रसोईया बना लिया।
अहमदाबाद आश्रम में एक दशक तक वह संत का करीबी रहा। आश्रम की हर गतिविधि की अखिल को जानकारी होती थी। इसी बीच आश्रम में छत्तीसगढ़ के रायपुर की सेवादार वर्षा से अखिल की नजदीकियां बढ़ गईं। रसोइये ने अपने मन की बात संत आसाराम को बताई, तो उन्होंने भी दोनों की शादी पर मुहर लगा दी। वर्ष 2008 में अखिल और वर्षा ने आश्रम छोड़ दिया। अचानक सुर्खियों में अखिल को अहमदाबाद के चंद्रखेड़ा थाने की पुलिस उन्हें तलाशते हुए मुजफ्फरनगर पहुंची।
दरअसल, सूरत की दो बहनों ने आसाराम और उनके बेटे नारायण साईं पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। पीड़िताओं का आरोप था कि वर्ष 1997 से 2006 के बीच आसाराम के आश्रम में यौन उत्पीड़न के समय रसोईये अखिल और वर्षा भी आश्रम में मौजूद थे। इस मामले में 20 अक्तूबर 2013 को गुजरात पुलिस विमान से दंपति को अहमदाबाद ले गई थी। लंबी पूछताछ के दौरान अखिल सरकारी गवाह बन गया था। उसने यह स्वीकार किया था कि सूरत की बहनों को बुलाने के बाद आश्रम के कमरों में भेजा गया था। इसके बाद क्या हुआ, उन्हें नहीं मालूम। इस मामले के डेढ़ साल बाद अखिल की हत्या हो गई। पुलिस हत्या के पीछे के राज का सच जानने के लिए जुट गई है।
अचानक क्यों छोड़ना पड़ा आश्रम?
आश्रम में रहने वाली युवती वर्षा से मुलाकात के बाद संत आसाराम की सहमति मिलने के बाद परिजन भी अखिल की शादी को तैयार हो गए। आखिर ऐसा क्या हुआ कि शादी के कुछ दिन बाद ही दंपति को अहमदाबाद आश्रम छोड़ना पड़ा।
संत आसाराम की सेवा में लंबा वक्त गुजारने के बाद अखिल ने वर्षा से शादी करने की ठान ली थी। परिजनों की रजामंदी हुई और दोनों परिवारों ने रिश्ता जोड़ लिया, लेकिन शादी के कुछ दिन बाद ही दंपति ने मुजफ्फरनगर लौटने का मन बना लिया। वर्ष 2008 में शादी हुई और उसी वर्ष वह घर लौट आए। शहर के सिटी सेंटर मार्केट में दूध और आइसक्रीम बिक्री का काम शुरू कर दिया। परिवार में दो बच्चे भी हैं। पहले यह परिवार अबूपुरा में रहता था। बीते तीन माह से ही जानसठ रोड की कॉलोनी गीता एन्क्लेव में शिफ्ट हुआ था।
परिवार से जुड़े सूत्र बताते हैं कि बीच-बीच में कई बार अखिल बापू का आशीर्वाद लेने आश्रम जाता रहा। इतना ही नहीं बापू पर यौन उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराए जाने के विरोध में अखिल ने शहर के शिवचौक पर समर्थकों के साथ धरने-प्रदर्शन में भी हिस्सा लिया था। यौन उत्पीड़न के मामले में जब अहमदाबाद पुलिस का शिकंजा कसा तो अखिल ने चुप्पी साध ली थी। पुलिस भी लगातार उससे यही सवाल कर रही थी कि आखिर उन्होंने अचानक आश्रम क्यों छोड़ा।