भारत को मिला एक और सैनिक, आकाश की सुरक्षा करेगा ‘आकाश’
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भारतीय सेना को अपने आसमान की सुरक्षा करने के लिए मंगलवार को एक और सैनिक मिल गया। स्वदेश निर्मित सतह से हवा में मार करने वाली सुपरसोनिक मिसाइल आकाश को सेना में शामिल कर लिया गया है।
यह मिसाइल 25 किलोमीटर तक वार कर सकती है। मिसाइल का निर्माण डीआरडीओ द्वारा किया गया है। एक औपचारिक समारोह में मिसाइल को सेना को समर्पित किया गया।
इसकी अध्यक्षता करते हुए सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने कहा कि आकाश स्वदेशीकरण की दिशा में एक कदम है। उन्होंने बताया कि सेना हवाई सुरक्षा में निर्देश, नियंत्रण और युद्ध क्षेत्र प्रबंधन को नए तरीके से तैयार करने में लगी हुई है।
एक साथ कई लक्ष्य साधने में कारगर
आकाश लड़ाकू विमान, हेलिकाप्टर और मानवरहित विमानों समेत कई खतरों से निपटने में सक्षम है। यह एक साथ कई लक्ष्य साधने के साथ सभी तरह के मौसम में कारगर है।
यह युद्ध क्षेत्र में सेना को छोटी दूरी की मिसाइलों से भी सुरक्षा प्रदान कर सकती है। सेना ने फिलहाल छह फायरिंग बैटरी के साथ आकाश की दो रेजीमेंट का आर्डर दिया है।
रक्षा सूत्रों के अनुसार सौ मिसाइलों का पूरा आर्डर करीब 19,500 करोड़ रुपये का है। पहली रेजीमेंट जून-जुलाई तक और दूसरी 2016 के अंत तक तैयार हो जाएगी। इस हथियार प्रणाली को पश्चिमी सीमाओं पर तैनात किया जाएगा। भारतीय वायु सेना इस मिसाइल के परिवर्तित रूप को पहले ही अपना चुकी है।
जी चंद्रमौली, आकाश के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने बताया कि भारतीय वायु सेना से अलग सेना को दी गई मिसाइल एक जगह से दूसरी जगह जा सकती है और इसे वाहन पर भी लगा सकते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि जरूरत के अनुसार इसे तेजी से कहीं भी पहुंचाया जा सकता है।