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दलालों के आगे 'मिस्टर क्लीन' भी नाकाम

Wed, 13 Feb 2013 10:41 PM IST
नई दिल्ली/संजय मिश्र
नई दिल्ली/संजय मिश्र Updated Wed, 13 Feb 2013 10:41 PM IST
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ak antony also fail in front of defence brokers

अगस्ता वेस्टलैंड डील में रिश्वत के तूफान ने यह साबित कर दिया है कि मिस्टर क्लीन कहे जाने वाले रक्षा मंत्री एके एंटनी भी रक्षा सौदों को दलाली के गहरे दलदल से दूर रख पाने में नाकाम रहे हैं। भले ही विपक्ष ने ताजा मामले में एंटनी पर निजी तौर पर कोई आरोप न लगाकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया है।

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मगर उनके कार्यकाल में टैट्रा ट्रक में घपलेबाजी से लेकर पनडुब्बी समझौते में धांधलियों के सवालों का सामने आना यूपीए सरकार के लिए झटका माना जा रहा है। साथ ही एंटनी के कार्यकाल में रक्षा सौदों में देरी का मामला भी तूल पकड़ता जा रहा है, जिससे सेना के सामने गोला बारूद की कमी की बात सार्वजनिक हो गई है।
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कांग्रेस ही नहीं सत्ता के गलियारों में एंटनी अपनी ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं। उनकी इसी खासियत को देखकर ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सबसे अहम और संवेदनशील रक्षा मंत्रालय का जिम्मा उन्हें सौंपा था। इससे पहले प्रणब मुखर्जी के पास यह मंत्रालय था।
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मगर उनके वित्त मंत्रालय में जाने के बाद यूपीए वन सरकार में खुद सोनिया और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रक्षा सौदों से जुड़े विवादों के मद्देनजर किसी और को इस मंत्रालय में भेजना मुनासिब नहीं समझा। एनडीए सरकार के समय ताबूत और बुलेट प्रूफ जैकेट जैसे रक्षा सौदों में दलाली के आरोपों को लेकर तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस को लेकर कांग्रेस ने जमकर बवाल मचाया था। मगर अब खुद के समय में एक के बाद एक रक्षा सौदों में घपलों के सामने आने से कांग्रेस की सियासत भी हिलती नजर आ रही है।

पिछले साल ही पूर्व सेना प्रमुख वीके सिंह के समय टैट्रा ट्रक सौदे में घूसखोरी के आरोप सामने आए थे। खुद वीके सिंह ने कहा था कि उन्हें टैट्रा ट्रक मामले में रिश्वत की पेशकश की गई और उन्होंने यह बात एंटनी को बताई थी। इस मामले में भी एंटनी के चुप रहने को लेकर सवाल उठाए गए थे। फ्रांस के साथ पनडुब्बी समझौते में अभी कोई घोटाला सामने नहीं आया है मगर कुछ सवाल तो उठाए ही जा रहे हैं।


दलाली के इस दलदल को नहीं तोड़ पाने की वजह से ही जरूरी रक्षा उपकरणों की खरीद समय पर नहीं हो पा रही है। एंटनी पर अपने कार्यकाल में रक्षा सौदों को समय पर सिरे नहीं चढ़ा पाने का सवाल भी प्रमुखता से उठाया जा रहा है। एक-एक सौदे को अंतिम रूप देने में रक्षा मंत्रालय सालों साल लगा रहा है, जिसके चलते सेना के सामने गोला बारूद समेत सैन्य उपकरणों की जबरदस्त किल्लत की बात सामने आई है।

पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने यह बात प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर बताई थी। गौरतलब है कि यह पत्र लीक होने पर जबरदस्त राजनीतिक बवाल भी मचा था।

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