फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   ajnath believe upa will collapse before lok sabha elections

भाजपा को यकीन, चुनाव तक बिखर जाएगा यूपीए

Fri, 30 Aug 2013 12:07 AM IST
नई दिल्ली/विनोद अग्निहोत्री
नई दिल्ली/विनोद अग्निहोत्री Updated Fri, 30 Aug 2013 12:07 AM IST
विज्ञापन
ajnath believe upa will collapse before lok sabha elections

भले ही रुपए और बाजार की सेहत से मनमोहन सरकार चिंतित है लेकिन इसने विपक्ष को अहम हथियार दे दिया है। विपक्षी दल भाजपा को पूरा यकीन है कि यूपीए सरकार की नीतियों की वजह से ही ऐसे हालात पैदा हुए हैं।

विज्ञापन


अमर उजाला से विशेष बातचीत में भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने बताया कि अगली सरकार भाजपा की ही बनेगी। चुनाव तक यूपीए पूरी तरह बिखर जाएगा और भाजपा को अकेले ही पूर्ण बहुमत मिलेगा।
विज्ञापन


बतौर भाजपा अध्यक्ष आपका यह कार्यकाल पिछले से कैसे अलग है?
तब भी चुनावी चुनौती थी। अब भी है। पहले भी कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा जीती थी। इस बार भी पांच राज्यों के चुनावों में पार्टी की जीत के प्रति मैं आश्वस्त हूं। जनता यूपीए सरकार के कुशासन के खिलाफ है, इसलिए भाजपा को लोकसभा चुनावों में भी शानदार सफलता मिलेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


केंद्र सरकार को कैसे आंकते हैं?
आर्थिक मोर्चा, आंतरिक सुरक्षा, कूटनीतिक मोर्चा, हर मोर्चे पर कांग्रेस नेतृत्व की यूपीए सरकार विफल है। दुनिया में भारत की साख को चोट पहुंची है। लोगों का विश्वास है कि इस संकट के दौर से देश को सिर्फ भाजपा ही निकाल सकती है।

एनडीए में तीन दल ही हैं। एनडीए का विस्तार कैसे करेंगे?
एक ही दल बाहर गया है। चुनाव से पहले कुछ दलों से गठबंधन की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। भाजपा ने सरकार बनाने लायक 272 सीटों का बहुमत अकेले जुटाने का लक्ष्य तय किया है। किंतु जिनके साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे, भाजपा को बहुमत मिलने के बावजूद उन्हें सरकार में हिस्सेदारी मिलेगी।

विफलताओं के बावजूद यूपीए गठबंधन कैसे बना हुआ है?
अब तक कई दल यूपीए से बाहर जा चुके हैं। शेष सिर्फ सत्ता के चुंबक से चिपके हैं। चुनाव तक इनमें से कई और बाहर आएंगे। चुनाव के बाद तो यूपीए बिखर ही जाएगा।

छोडऩे वाले क्या एनडीए में शामिल हो सकते हैं?
राजनीति में किसी संभावना को नकारा नहीं जा सकता। हम अपनी तरफ से किसी को नहीं तोड़ेंगे।

आपकी अध्यक्षता और लाल कृष्ण आडवाणी के नेतृत्व के बावजूद 2009 में हार क्यों हुई?
अटल जी की सरकार ने जो आर्थिक उपलब्धियां हासिल की थीं उसका प्रतिफल 2008 तक बना रहा। तब भी यूपीए सरकार की नीतियां विफल होने लगी थीं, लेकिन लेकिन वह विफलता लोगों तक नहीं पहुंची थी। इसलिए यूपीए दोबारा जीत गया। अब यूपीए की नीतियों की विफलता और कुशासन को लोग महसूस कर रहे हैं।

भाजपा का मुख्य चुनावी मुद्दा हिंदुत्व या सुशासन क्या होगा?
भाजपा एक अच्छी सरकार देने के प्रति संकल्पबद्ध है, जिसमें समाज के सभी वर्गों का कल्याण हो। अधिकतम रोजगार के अवसर सृजित हों, देश की सीमाएं सुरक्षित रहें। इन सारे मुद्दों को लेकर चुनाव मैदान में जाएंगे। हिंदुत्व कोई चुनावी मुद्दा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट तक ने कहा है कि यह एक जीवन शैली है। भारत को एक सशक्त देश समाज के सभी वर्गों को लेकर ही बनाया जा सकता है।

जब भाजपा में नरेंद्र मोदी सबसे लोकप्रिय नेता हैं तो उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने में झिझक क्यों है?
कोई झिझक नहीं है। यह भाजपा के लिए सौभाग्य की बात है कि पार्टी में नरेंद्र मोदी जैसे लोकप्रिय नेता हैं, जिसका लाभ मिलेगा। अभी उन्हें चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। कौन प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार होगा, इसके लिए संसदीय बोर्ड की बैठक होगी जिसमें यह फैसला होगा।

उम्मीद कब तक है? विधानसभा चुनावों से पहले या बाद में?
सबसे बातचीत करके तय करेंगे। संसद सत्र चल रहा है। उसके बाद बातचीत करके बैठक बुलाएंगे। उसमें नाम तय करके घोषणा करेंगे।

क्या नरेंद्र मोदी के नाम पर भाजपा में मतभेद हैं?
नहीं, इस संबंध में अभी तक कोई चर्चा नहीं हुई है। हमारे यहां जो भी फैसला होगा वह सर्वसम्मति से होगा।

चुनाव के बाद मोदी के नाम पर सहमति न होने पर क्या राजनाथ सिंह विकल्प हो सकते हैं?
भाजपा को स्पष्ट बहुमत हासिल होगा। शेष प्रश्न तो काल्पनिक हैं।

गुजरात या किस भाजपा शासित राज्य के सुशासन मॉडल को आप देश के लिए उपयुक्त मानते हैं?
किसी राज्य विशेष का मॉडल नहीं बल्कि भाजपा का सुशासन मॉडल देश के लिए उपयुक्त है। हर राज्य की परिस्थिति के मुताबिक सरकारें विकास का अपना मॉडल बनाती हैं। वह देश पर लागू नहीं हो सकता। हमारी राज्य सरकारों को राजनीतिक विश्लेषक सबसे अच्छी और सुशासित सरकारें मानते हैं। केंद्र में भी यूपीए सरकार से अटल जी की सरकार को लोग बेहतर मानते हैं। इसका अर्थ है कि अच्छी सरकार चलाने की दृष्टि और क्षमता भाजपा के ही पास है।


उत्तर प्रदेश में भाजपा कैसे मजबूत होगी?
उत्तर प्रदेश में भाजपा के पक्ष में अच्छी हवा है। पार्टी को चालीस से ज्यादा सीटें मिलेंगी।शेष दलों के लिए वहां चौंकाने वाले परिणाम आ सकते हैं।

बिहार में क्या तस्वीर बनेगी?
सर्वेक्षणों के अनुसार भाजपा काफी आगे जा रही है। मुझे विश्वास है कि पहले से ज्यादा सीटें भाजपा को बिहार में मिलेंगी। हम बिहार की सभी चालीस सीटों पर चुनाव लड़ेंगे।

चुनावों के बाद क्या जद(यू) से गठबंधन संभव है?
भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलेगा।

आरोप है कि भाजपा के पक्ष में हिंदू ध्रुवीकरण के लिए विहिप अयोध्या की चौरासी कोस की परिक्रमा पर आमादा है?
कांग्रेस, सपा और बसपा घोर सांप्रदायिक राजनीतिक पार्टियां हैं, जो बराबर हिंदू मुसलमान के बीच दूरी पैदा करने की राजनीति करती हैं। उनके पास चुनाव जीतने का यही सबसे बड़ा हथियार है। इसका खामियाजा इन्हें चुनाव में भुगतना होगा। परिक्रमा विहिप का अपना धार्मिक कार्यक्रम है जिसमें कुछ संत शामिल हो रहे हैं। लेकिन समाजवादी पार्टी सोची समझी रणनीति के तहत ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed