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अजीत डोवल होंगे अगले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार!

Sun, 25 May 2014 08:18 AM IST
Updated Sun, 25 May 2014 08:18 AM IST
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Ajit doval will become chief security adviser in new government

खुफिया ब्यूरो(आईबी) के पूर्व निदेशक और लाल डेंगा से लेकर जम्मू कश्मीर और पंजाब में आतंकवादियों के छक्के छुड़ाने वाले अजीत कुमार डोवल का नरेंद्र मोदी सरकार में देश का नया राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनना तय हो गया है।

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1999 में कंधार में आतंकवादियों द्वारा अपह्रत एअर इंडिया के विमान आईसी 814 केसंकट से निबटने में भी डोवल ने अहम भूमिका अदा की थी। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते ही केंद्र सरकार में सबसे पहली नियुक्ति संभवत यही होगी।
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यह जानकारी देने वाले उच्च स्तरीय सूत्रों का यह भी कहना है कि अपनी नियुक्ति से पहले ही डोवल ने अनौपचारिक तौर पर नरेंद्र मोदी सरकार के आंतरिक सुरक्षा का खाका तैयार करना और सलाह देना शुरु कर दिया है।

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डोवाल ने ही दी राष्ट्राध्यक्ष बुलाने की सलाह

Ajit doval will become chief security adviser in new government

यहां तक कि सार्क देशों के राष्ट्राध्यक्षों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में बुलाकर एक नई परंपरा शुरु करने की सलाह भी डोवाल ने ही दी है।

आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के लिए डोवल एनसीटीसी जैसी केंद्रीय कृत व्यवस्था के पक्ष में हैं।

लेकिन श्री डोवल का कहना है कि इस मामले में मीडिया में जो भी चल रहा है वह अटकलबाजी है और उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं है और न ही वह किसी को कई सलाह दे रहे हैं।

बताया जाता है कि लाल कृष्ण आडवाणी और संघ परिवार के भरोसेमंद माने जाने वाले अजीत डोवल चुनाव नतीजे आने केबाद राजनाथ सिंह, नरेंद्र मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत से मिले थे।

भाजपा के करीबी रहे हैं अजीत डोवल

Ajit doval will become chief security adviser in new government

तभी उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनने की अटकलें तेज हो गई थीं। आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर डोवल का नजरिया बेहद स्पष्ट है और वह इस मामले में यूपीए सरकार की नीतियों के आलोचक रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि यह डोवल का ही सुझाव था कि मोदी सरकार के शपथ ग्रहण में पाकिस्तान समेत सभी सार्क देशों के प्रमुखों को आमंत्रित करके एक नई परंपरा शुरु की जाए।

इससे जहां क्षत्रीय सहयोग और परस्पर सद्भावना का वातावरण बनेगा, वहीं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि एक क्षेत्रीय शक्ति की भी बनेगी और यह संदेश जाएगा कि कमजोर यूपीए सरकार की जगह भारत में अब एक मजबूत और निर्णय लेने वाली सरकार आ गई है।

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