मोदी और मुलायम ने समाज को बांटा: अजीत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्रीय उड्डयन मंत्री चौधरी अजित सिंह ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव पर निशाने साधते हुए कहा कि दोनों ने समाज को बांटकर जहर घोलने का काम किया है।
उन्होंने मुजफ्फरनगर दंगों के लिए दोनों नेताओं को जिम्मेदार ठहराया। सांसद जयंत चौधरी ने भी प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सपा की सरकार पर तीखे प्रहार किए।
रविवार को यूपी के शामली में आयोजित रालोद की जनसंदेश रैली में चौधरी अजित ने कहा कि मोदी और मुलायम दोनों पीएम बनने के लिए परेशान हैं, इसलिए दोनों मिल गए और समाज को दो हिस्सों में बांट दिया।
दंगे और गन्ने पर चले सियासी तीर
अजीत सिंह ने कहा कि मुजफ्फरनगर दंगा राजनीतिक साजिश है। रालोद को इन दंगों की सीबीआई जांच के सिवा कुछ मंजूर नहीं है। सपा सरकार पर वार करते हुए उन्होंने कहा कि दंगों के बाद नौजवानों के वारंट आ रहे हैं, उनका कॅरियर चौपट होने को है, कैंपों में बच्चे मर रहे हैं, लेकिन सरकार के माथे पर चिंता की कोई लकीर नहीं है।
उन्होंने केंद्र सरकार ने किसानों के बकाया गन्ना भुगतान के लिए 6600 करोड़ का लोन मिल मालिकों को देने के लिए मंजूरी दे दी, लेकिन बैंकों को गारंटी नहीं दे रही, जिस कारण किसानों को बकाया अटका है।
इस मौके पर सांसद जयंत चौधरी ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और टूटी सड़कों की हालात के लिए सूबे की सरकार को दोषी ठहराया। जयंत ने कहा कि खराब कानून-व्यवस्था के कारण ही यूपी में कोई उद्योग लगाने को तैयार नहीं है। प्रदेश में किसान को बिजली नहीं मिलती। आम आदमी पार्टी दिल्ली में सरकार चलाने से ज्यादा धरना-प्रदर्शन में ही लगी रही, कुछ हुआ नहीं तो चलती बनी।
छोटे चौधरी ने जाटों के जख्मों पर लगाया मरहम
रालोद ने दंगों के बाद जाट-मुस्लिमों में आई खटास को भांपते हुए रालोद ने रैली में मंच से लेकर भाषण तक दोनों वर्गों को बराबर की तरजीह दी। छोटे चौधरी अजित सिंह और जयंत ने दंगों के बाद दर्ज मुकदमों पर सरकार को कोसते हुए जाटों के जख्मों पर मरहम लगाने की कोशिश। साथ ही राहत शिविरों में बच्चों की मौत का मुद्दा उठाकर मुस्लिमों का हमदर्द दिखाने का प्रयास किया गया।
वेस्ट यूपी का इतिहास गवाह है कि जाट और मुस्लिम ही रालोद की जीत में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। कैराना लोकसभा सीट पर जाट-मुस्लिमों के सहारे ही रालोद का दबदबा रहा है।
वर्ष 2004 में रालोद प्रत्याशी अनुराधा चौधरी ने जाट-मुस्लिम मतों के सहारे ही 64 फीसदी मत लेकर एकतरफा जीत हासिल की थी, जबकि बसपा से चुनाव लड़े शहनवाज को केवल 22 फीसदी वोट मिले।
जाट और मुस्लिम को रैली में तरजीह
वर्ष 2009 में भाजपा से गठबंधन के कारण सीट भाजपा के खाते में चली गई और मुस्लिम वोट नहीं मिलने से गठबंधन प्रत्याशी हुकुम सिंह को हार का मुंह देखना पड़ा। इसी तरह बागपत लोकसभा सीट पर भी चौधरी अजित सिंह जाट और मुस्लिमों के सहारे ही एकतरफा जीत हासिल करते हैं, लेकिन इस बार मुजफ्फरनगर दंगों के कारण हालात बदले हुए हैं।
जाट और मुस्लिमों में आई खटास को नेता भी अच्छी तरह भांपते हैं। इसलिए रालोद की रैली में इसका खास ध्यान रखते हुए मंच से लेकर भाषण तक जाट और मुस्लिम दोनों को बराबरी की तरजीह दी गई थी। रैली की अध्यक्षता पूर्व विधायक अब्दुल वहीद कुरैशी ने की, जबकि पहला संबोधन भी कारी मुस्तफा का कराया गया। संचालन भी मुस्लिम नेता अशरफ अली खान ने किया। जाटों का भी खास ख्याल रखा गया।
रालोद में शामिल हुए पूर्व विधायक बाबू सिंह को मुख्य मंच पर बुलाकर उन्हें पार्टी में शामिल करने की घोषणा की गई और सोफे पर अजित ने उन्हें अपनी बगल में बैठाया। इसके अलावा जाट नेता रालोद जिलाध्यक्ष सत्यवीर पवार के अलावा छपरौली विधायक वीरपाल भी मंच पर रहे।