जानिए, मोदी को कितनी महंगी पड़ेगी दो दुश्मनों की दोस्ती
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काशी के सियासी कड़ाहे में कौमी एकता दल ने तड़का लगा दिया। नरेंद्र मोदी की जीत पक्की मानकर बैठी भाजपा का मुंह एकाएक कड़वा हो गया। सेक्युलर वोटों की नई दावेदार आम आदमी पार्टी का दिमाग भी भन्ना गया।
चुनावी अखाड़े में कल तक दूसरे पायदान के लिए अरविंद केजरीवाल के साथ दो-दो हाथ कर रहे अजय राय रातोंरात नरेंद्र मोदी को पटखनी देने की स्थिति में आ गए।
वाराणसी में पिछले छह लोकसभा चुनावों में से पांच में कामयाब रही भाजपा एक बार फिर मुश्किल में फंस गई। कौमी एकता दल के समर्थन के बाद काशी में कांग्रेस के हौंसले बुलंद हो गए।
कौएद ने पलट दिए सभी चुनावी समीकरण
कौमी एकता दल ने मंगलवार को लोकसभा चुनाव में वाराणसी सीट पर कांग्रेस के समर्थन की घोषणा की। कौएद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अफजाल अंसारी ने कहा कि कौएद कार्यकर्ता और पदाधिकारी कांग्रेस उम्मीदवार के समर्थन में चुनाव प्रचार करेंगे।
सियासी बाजार में कौएद के समर्थन को लेकर कई दिनों से अटकलें लगाई जा रही थी। कभी खबर उड़ती कि कौमी एकता दल आम आदमी पार्टी का समर्थन करेगा, कभी कयास लगता कि पुरानी दुश्मनी को भूलाकर अफजाल और मुख्तार अंसारी कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय का समर्थन करेंगे।
अफजाल ने चंद दिनों पहले भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र मोदी की तारीफ कर भाजपा के रणनीतिकारों मुस्कुराने का मौका दे दिया था।
वाराणसी के लिए भुला दी गई पुरानी दुश्मनी
हालांकि भाजपा या आप के कयासों का झुठलाते हुए कौएद ने कांग्रेस खेमे में जाना ठीक समझा। अफजाल अंसारी और मुख्तार अंसारी ने इसकी खातिर अजय राय से अपनी पुरानी दुश्मनी भी किनारे लगा दी।
खुद अजय राय ने भी अपने भाई अवधेश राय की हत्या को दरकिनार कर अंसारी बंधुओं से समर्थन मांगा।
अफजाल ने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस में कहा, 'जहां तक अजय राय का मामला है तो उनके और हमारे बीच जो भी है वो व्यक्तिगत है। इसका पार्टी और चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है।'
'वाराणसी को बचाने के लिए आगे आना जरूरी था'
अफजाल अंसारी ने कहा कि सांप्रदायिक ताकतों को हराने के लिए साझा प्रत्याशी के रूप में मुख्तार अंसारी का साथ देने भी कोई पार्टी नहीं आई। ऐसे में वाराणसी को बचाने के लिए आगे आना जरूरी था। कांग्रेस को समर्थन के एलान का उद्देश्य भी यही है।
उन्होंने कहा कि वाराणसी में लोकसभा का चुनाव बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ गया है। कौमी एकता दल की घोषणा के बाद वाराणसी को चुनाव वाकई दिलचस्प मोड़ पर आ गया।
राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो कौएद की घोषणा के ठीक पहले तक वाराणसी में नरेंद्र मोदी के जीत की अंतर की ही चर्चा हो रही थी। अजय और अरविंद दूर-दूर तक संघर्ष में नहीं थे।
दूसरे पायदान से पहले पायदान की लड़ाई तक
वाराणसी में दूसरे पायदान के लिए आम आदमी प्रत्याशी अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय के बीच संघर्ष हो रहा था। नरेंद्र मोदी की जीत तय मानी जा रही थी, लेकिन कौएद ने चुनावी समीकरणों को उलटपलट कर रख दिया।
अजय राय अपने जनाधार और मुश्लिम वोटों की समर्थन की बदौलत वाराणसी में भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र मोदी को कांटे की टक्कर देने की स्थिति में आ गए। दरअसल, पिछले चुनावों में अजय राय ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था और 18.61 फीसदी वोट हासिल कर तीसरे पायदान पर रहे थे।
कौमी एकता दल अध्यक्ष अफजाल अंसारी के छोटे भाई मुख्तार अंसारी ने तब बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था और 27.94 फीसदी वोट पाकर दूसरे पायदान पर रहे थे।
नई दोस्ती से क्या बन रहे हैं नए समीकरण
2009 में भाजपा प्रत्याशी मुरली मनोहर जोशी महज 17,211 वोटों से ही चुनाव जीत पाए थे। उन्हें 2,03,122 वोट मिले थे, जबकि दूसरे पायदान पर रहे मुख्तार अंसारी को 1,85,911 वोट और तीसरे पायदान पर रहे अजय राय को 1,23,874 वोट।
वोटों के इन समीकरणों के आधार पर देखें तो कांग्रेस और कौएद की दोस्ती भाजपा को मुश्किल में डाल सकती है। ये समीकरण पांच साल पुराने हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो वाराणसी में आज भी कमोबेस तस्वीर ऐसी है।
वाराणसी कोलअसला सीट से चार बार और परिसीमन के बाद बनी पिंडरा सीट से एक बार विधायक बने अजय राय के पास स्वाजातीय वोटों को बड़ा जनाधार है। ये संख्या तकरीबन एक लाख के आसपास है।
लगभग 15 लाख वोटर, 3.5 लाख मुस्लिम वोटर
वाराणसी लोकसभा क्षेत्र में लगभग 15 लाख वोटर हैं। मुस्लिम वोटरों की संख्या 3.5 लाख के आसपास है। कौएद के समर्थन के बाद इन वोटरों का बड़ा हिस्सा कांग्रेस के साथ जा सकता है।
अजय राय के स्वजातीय जनाधार और कौएद समर्थक मुस्लिम वोटों का जोड़ निर्णायक साबित हो सकता है। नरेंद्र मोदी की उम्मीद अगड़ी जातियों के वोट हैं, जिनकी संख्या 6-7 लाख के आसपास है।
लेकिन समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशियों के कारण इन वोटों में सेंधमारी की पूरी संभावना है।
बनिया वोटों के तीन दावेदार, किसके साथ जाएं!
वाराणसी में हिंदु वोटों का लगभग 30 फीसदी हिस्सा बनिया वोटरों का है। इन वोटों पर भाजपा, बसपा और आप तीनों ने ही अपनी दावेदारी ठोकी है।
बनिया समुदाय पारंपरिक रूप से भाजपा का वोटर रहा है। शंकर प्रसाद जायसवाल यहां से भाजपा के टिकट पर तीन बार सांसद चुने गए हैं। शहर उत्तरी से भाजपा विधायक रविंद्र जायसवाल भी इस समुदाय से हैं। मोदी अपने नामांकन जुलूस में उन्हें बगल में खड़ा कर बनिया समुदाय को लुभाने की कोशिश भी की थी।
लेकिन बसपा ने उन्हें लुभाने के लिए विजय प्रकाश जायसवाल को टिकट दिया है, जो उसी समुदाय से हैं। अरविंद केजरीवाल खुद भी बनिया है, इस नाते आप भी बनिया वोटों की उम्मीद कर रही है।