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ऐश्वर्या जो कभी थी अनचाही बेटी

Fri, 20 Nov 2015 04:11 PM IST
स्वाति बक्शी/बीबीसी संवाददाता
स्वाति बक्शी/बीबीसी संवाददाता Updated Fri, 20 Nov 2015 04:11 PM IST
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Aishwarya when she was unwanted child

पश्चिम महाराष्ट्र के सतारा जिले के एक गांव में रहने वाली निकिता 11 साल की हैं, लेकिन ये नाम उसे 11 बरस पहले उसके माता-पिता ने नहीं दिया। चार साल पहले 2011 में उसे ये नाम यहां की जिला परिषद ने दिया है।

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निकिता को इससे पहले ‘नकुशा’ या ‘नकोशी’ कहा जाता था जिसका मतलब है 'अनचाही'। बेटे की चाह रखने वाले मां-बाप अक्सर तीसरी बेटी होने पर उसे नकुशा कहते हैं ताकि इसके बाद अगर घर में बच्चा हो तो लड़का हो और किसी बेटी का मुंह ना देखना पड़े।
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साल 2011 में सतारा की जिला परिषद ने लड़कियों के प्रति नकारात्मक रवैये को बदलने के लिए उन्हें नाम देने की रस्म अदा करने का फैसला किया। अबतक 285 नकुशाओं की पहचान हुई। उनमें से करीब 265 का नामकरण कर दिया गया है।
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उम्मीद जताई गई कि नया नाम लोगों के मन में बेटियों को अनचाही कहने की प्रवृत्ति को खत्म करने में मदद करेगा। पर क्या नाम बदलने से इन लड़कियों की जिंदगी पर कोई असर पड़ा?

चार साल पहले नकुशा से निकिता बनने की बात उत्साह से बताते हुए 11 साल की निकिता कहती हैं कि "पहले मुझे घर पर और बाहर भी नकुशा कहा जाता था। सब मुझे नकुशा कहकर चिढ़ाते तब मुझे बहुत गुस्सा आता था। फिर मेरा नामकरण निकिता कर दिया गया। अब घर और स्कूल में सब मुझे निकिता ही कहते हैं। मुझे अपना नया नाम बहुत पसंद है। मैं छठी में पढ़ती हूँ और बड़ी होकर पुलिस अधिकारी बनना चाहती हूँ।"

डाक्टर बनना चाहती है ऐश्वर्या

Aishwarya when she was unwanted child

जिन 285 लड़कियों के नाम बदले गए उनमें से ज्यादातर की या तो शादी हो चुकी है या फिर वो पढ़ने के लिए आस-पास के जिलों में चली गई हैं।

13 साल की एक और लड़की जिसे चार साल पहले ऐश्वर्या नाम दिया गया, भावुक होकर कहती है मैं अपनी माँ के साथ सतारा में नाम बदलने गई थी फिर मेरा नाम ऐश्वर्या रखा गया। नकुशा नाम मुझे बिल्कुल पसंद नहीं था।

मेरी चार बड़ी बहने हैं जिनमें से दो की शादी हो चुकी है। मैं रोज अपने गांव से पैदल चलकर स्कूल आती हूँ। मैं डॉक्टर बनना चाहती हूँ लेकिन मेरे घर में गरीबी है। अगर आर्थिक मदद मिली तो पढ़ाई पूरी करूंगी और डॉक्टर बनूंगी।

वो बताती हैं, "जब से मेरा नाम ऐश्वर्या रखा गया है तब से मेरे परिवार वाले और सहेलियां ऐश्वर्या कहकर पुकारते हैं। स्कूल में मेरा नाम ऐश्वर्या पड़ने पर मुझे बहुत खुशी हुई।"

नाम बदलना मानसिकता में बदलाव लाना है

Aishwarya when she was unwanted child

नाम बदलने से लड़कियों के लिए सोच बदलने की ये उम्मीद क्या वाकई कारगर साबित हुई है?

महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली वकील वर्षा देशपांडे कहती हैं, "नाम रखने का मकसद मानसिकता में बदलाव की तरफ एक कदम था। मैं फिर भी उन लोगों को बुरा नहीं कहूँगी जो कम से कम लड़कियों को नकुशा कह कर भी जीने देते हैं। ज्यादा बड़ी समस्या तो ये है कि विदेशी मशीनों के जरिए बेटियों को गैर-कानूनी तरीके से मारा जा रहा है।"

वर्षा बताती हैं, "हमने कन्या भ्रूण की पहचान कर उसे खत्म करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ अभियान चलाया। कई डॉक्टरों के खिलाफ केस चला और चल रहा है। उनमें छह को जेल की सजा भी हुई है। प्रशासन पर पीसीपीएनडीटी एक्ट का सख्त क्रियान्वयन करवाने का दबाव डाला मेरे ख्याल से वो ज्यादा अहम है।"

नामकरण सामाजिक जागरूकता के लिए अहम साबित हुआ

Aishwarya when she was unwanted child

जिलाधिकारी अश्विन मुदगल मानते हैं कि नामकरण सामाजिक जागरूकता के लिए अहम साबित हुआ है। सतारा के जिलाधिकारी अश्विन मुदगल कहते हैं, "2011 में नाम रखने की पहल का सबसे बड़ा असर लिंगानुपात में लड़कियों के हक में सुधार है। अगर आप देखें तो उस वक्त ये 881 था आज ये सुधर कर 923 हो चुका है। ये उस नामकरण कार्यक्रम का ही असर है कि उन गांवों में जहां सबसे ज्यादा संख्या में हमें नकुशा मिलीं, वहां अब लोगों ने उन्हें नकुशा कहना बंद कर दिया है।"

अश्विन कहते हैं कि "उस रस्म से जो संदेश गया और उसके बाद हमने जन्म से पहले भ्रूण की जांच नियंत्रित करने वाले कानून का बहुत सख्ती से क्रियान्वयन किया। हमने करीब 100 सोनोग्राफी सेंटर बंद कराए हैं और लगातार चेकिंग होती है।"

प्रशासन का कहना है कि इन सभी लड़कियों के नाम स्कूलों में भी बदले जा चुके हैं जबकि वर्षा कहती हैं कि उनकी जानकारी के मुताबिक कई स्कूलों में नाम बदले नहीं जा सके हैं।नाम बदलना लड़कियों के लिए अहम है।

सामाजिक संदर्भ में उसके सकारात्मक असर से भी इंकार नहीं किया जा सकता, लेकिन अहम ये भी है कि इस तरह के कार्यक्रम क्या लड़कियों के हालात बदलकर उनके लिए नए अवसर भी पैदा कर सकेंगे।

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