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चीन के माथे पर पसीना लाया ‘आईएनएस विक्रांत’

Tue, 13 Aug 2013 01:17 AM IST
नई दिल्ली/बीजिंग/एजेंसी
नई दिल्ली/बीजिंग/एजेंसी Updated Tue, 13 Aug 2013 01:17 AM IST
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aircraft carrier ins vikrant raises hackles in china

आईएनएस विक्रांत के साथ भारत ने जहां रक्षा क्षेत्र में एक अहम मुकाम हासिल कर लिया वहीं इस कामयाबी ने चीन के माथे पर चिंता की लकीरें भी उकेर दी हैं।

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सोमवार को विक्रांत के जलावतरण की रस्म के बाद चीन के रक्षा विशेषज्ञों ने विक्रांत को भारत के लिए मील का पत्थर करार दिया और कहा कि इससे प्रशांत महासागर जिसे चीन अपना आंगन सरीखा समझता है, में भारत और भारतीय नौसेना की स्थिति काफी मजबूत हो जाएगी।
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चीन नेवल रिसर्च इंस्टीट्यूट के उपाध्यक्ष कैप्टन झांग जुनशे ने सरकारी टीवी चैनल सीसीटीवी पर कहा कि यह भारतीय नौसेना के लिए काफी महत्वपूर्ण है। चीन से आगे निकलते हुए भारत दुनिया के उन पांच देशों में शामिल हो गया है जो इस तरह की क्षमता रखते हैं।
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झांग ने विक्रांत के आने के बाद क्षेत्र में युद्धपोतों की होड़ बढ़ने जैसी संभावनाओं का बचाव करते हुए कहा कि  भारत और चीन दोनों के पास बड़ी तटीय सीमा है, बड़ी आबादी है और बड़े पैमाने पर होने वाले विदेशी व्यापार को देखते हुए दोनों के लिए समुद्री सीमा की सुरक्षा बेहद जरूरी है।

इससे पहले कैप्टन झांग ने एक सरकारी अखबार को दिए बयान में आईएनएस विक्रांत पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह भारतीय नौसेना की सुदूर समुद्री क्षेत्रों में पेट्रोलिंग की क्षमता को तो बढ़ाएगा लेकिन इससे दक्षिण एशियाई क्षेत्र में सैन्य असंतुलन भी बढ़ेगा।

झांग के अलावा चीन के कई रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशांत क्षेत्र में जहां फिलहाल चीन और अमेरिका का दबदबा है, वहां अपनी सशक्त मौजूदगी दर्ज कराने के लिए भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है।

चीनी रक्षा विशेषज्ञों में बेचैनी
आईएनएस विक्रांत और परमाणु पनडुब्बी अरिहंत के लांच के बाद से चीनी रक्षा विशेषज्ञ हैरान और परेशान हैं। सामरिक और हथियारों के मामले पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ वांग डुगॉन्ग के मुताबिक अब भारत उन देशों के और करीब आएगा जो हथियारों के बड़े सौदागर हैं।

सैन्य मामलों के एक अन्य जानकार सांग शियोजुन के मुताबिक विक्रांत में भारत ने 1980 की तकनीक का प्रयोग किया है। जिससे भविष्य के युद्धपोतों के लिए तकनीकी मानक तय किए जा सकें।


चीनी युद्धपोत की गोपनीय योजना
पिछले साल चीन ने अपने पहले विमान वाहक युद्धपोत लॉयनिंग को लांच किया था। इसके कुछ हिस्सों को यूक्रेन से आयात किया गया था। इसके अलावा युद्धपोत से उड़ान भरने वाले जे-15 एयरक्राफ्ट भी लांच किए गए थे। इस युद्धपोत का वजन करीब 50 हजार टन बताया जाता है। चीन की योजना दो और युद्धपोत बनाने की है हालांकि इनके निर्माण कार्यक्रम की कोई घोषणा नहीं की गई है।

आईएनएस विक्रांत और विक्रमादित्य के नौसेना में शामिल होने के बाद भारत एशिया क्षेत्र में एकमात्र देश होगा जिसके पास दो विमानवाहक युद्धपोत होंगे। इससे भारतीय नौसेना की हर तरह की कार्यक्षमता में तो इजाफा होगा ही साथ ही उसकी शक्ति प्रदर्शन की क्षमता भी काफी बढ़ जाएगी।--कैप्टन झांग जुनशे, उपाध्यक्ष, चीन नेवल रिसर्च इंस्टीट्यूट

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