अपनी लुटिया डुबोने में लगी कर्ज में फंसी एयर इंडिया!
भारी कर्ज में डूबी राष्ट्रीय विमानन कंपनी एयर इंडिया कई सालों से खड़े विमानों के बीमा पर ही सालाना 36 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर रही है। मामले के खुलासे के बाद सरकार के 30,000 करोड़ रुपये के राहत पैकेज पर किसी तरह संचालित हो रही कंपनी के इस कदम की अब जांच कराने की मांग शुरू हो गई है।
एयरलाइंस के पायलट यूनियन इंडियन कमर्शियल पायलटस एसोसिएशन (आईसीपीए) ने यह आरोप लगाते हुए इसकी जिम्मेदारी तय करने के साथ साथ स्वतंत्र जांच की मांग की है। यूनियन के महासचिव शैलेंद्र सिंह ने एयर इंडिया के चेयरमैन रोहित नंदन को लिखे पत्र में कहा, ‘छह बोइंग 737-200 एफएस जो कि पिछले तीन साल से संचालन में नहीं हैं, उन पर हर साल 36 करोड़ रुपये से ज्यादा बीमा के तौर पर खर्च किए जा रहे हैं। इस वित्तीय अनियमितता की किसी बाहरी एजेंसी से जांच की मांग की गई है।’
आरोपों से भरे इस पत्र की एक प्रति विमानन मंत्री अशोक जी राजू और मुख्य सतर्कता आयुक्त को भी भेजा गई है। इस बीच एयर इंडिया ने आरोपों को झूठा, शरारत से भरा और भ्रामक बताया है। एयर इंडिया के एक प्रवक्ता ने कहा कि पांच बोइंग 737-200 का पिछले वर्ष बीमा केवल 6 करोड़ 12 लाख 40 हजार में किया गया था और इस वर्ष केवल 30 लाख 62 हजार में किया गया है, चूंकि ये विमान अभी भी एयर इंडिया के रजिस्ट्रेशन पर है।
उन्होंने कहा कि यह दुखद है कि आईसीपीए जैसे जिम्मेदार एसोसिएशन इस प्रकार के आधारहीन आरोप लगा रहे हैं। मालूम हो कि एक अक्तूबर को एयर इंडिया ने अपने 132 विमानों की देखरेख के लिए एक अरब 77 करोड़ 59 लाख रुपये में बीमे का नवीनीकरण कराया है। इस बार गत वर्ष के मुकाबले 18 प्रतिशत अधिक में बीमा कराया गया है।
यह दशा रही तो विलुप्त हो जाएगी एयर इंडिया: सुप्रीम कोर्ट
एयर इंडिया में वित्तीय संकट और सुविधाजनक व लाभदायक रूट निजी कंपनियों को दिए जाने पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि यही अवस्था रही तो एयर इंडिया विलुप्त हो जाएगी। केंद्र सरकार को लताड़ लगाते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि एयर इंडिया को उबारने के लिए योजना बनाई जाए।
न्यायाधीश विक्रमजीत सेन और कुरियन जोसेफ की खंडपीठ ने कहा कि क्यों लाभदायक रूट निजी विमानन कंपनियों को दिए जा रहे हैं। कोर्ट ने एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस के विलय के बाद कंपनी के पिछड़ने पर चिंता व्यक्त की है। नागर उड्डयन मंत्रालय से एयर इंडिया के हालात पर चिंता करने की अपेक्षा करते हुए खंडपीठ ने कहा कि यह चिंताजनक बात है कि निजी विमान को प्राथमिकता देते हुए हवाई अड्डे पर लैंडिंग के वक्त एयर इंडिया के विमानों को हवा में प्रतीक्षा करने को कहा जाता है, जिससे ईंधन पर पैसे की बर्बादी होती है।
एयर इंडिया प्रबंधन और कर्मचारी यूनियन की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि हालात यहां तक बदतर हो गए हैं कि निजी विमानों में यात्रा करने के बाद एयर इंडिया के विमान पर बैठने पर पछतावा होता है कि इससे यात्रा क्यों कर रहे हैं। ऐसा कहने के लिए दुख है लेकिन हालात वास्तव में बहुत ज्यादा खराब है। एयर इंडिया की ओर से अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी पक्ष रख रहे थे।