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खुलासा: इजाज ने पाक भेजी थी नौसेना के युद्धपोतों की जानकारी

Fri, 04 Dec 2015 06:42 AM IST
Updated Fri, 04 Dec 2015 06:42 AM IST
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aijaz pak spy send naval warships information to ISI

भारत की सैन्य सुरक्षा में सेंध लगा चुके पाक जासूस इजाज के नापाक मंसूबों का एक के बाद एक खुलासा हो रहा है। इजाज ने सेना ही नहीं बल्कि नौसेना युद्धपोतों से जुड़ी जानकारियां भी पाक में बैठे आईएसआई के आकाओं को भेजी थीं।

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कोलकाता में बैठे उसके गुरू आईएसआई एजेंट इरशाद अंसारी ने इस काम के लिए इजाज और अपने भाई इरफान का इस्तेमाल किया था। सूचनाएं भेजने के लिए इजाज करीब 20 माह तक कोलकाता में रहा था।
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यह खुलासा इरशाद के कोलकाता एसटीएफ की गिरफ्त में आने के बाद हुआ है। कोलकाता स्थित सिटी गार्डन रीच एरिया निवासी इरशाद अंसारी काफी समय से गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) में संविदा कर्मचारी के तौर पर काम कर रहा था।
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इरशाद के भाई इरफान ने ही पाक जासूस इजाज को बांग्लादेश के ढाका एयरपोर्ट पर रिसीव किया था। उसने ही इजाज को अपने गार्डन रीच होम में पनाह दी थी। यही नहीं इजाज का नाम बदलकर मोहम्मद कलाम कर उसके फर्जी दस्तावेज भी बनवाए थे।


इजाज की गिरफ्तारी और फिर सभी के नाम लेने के बाद सक्रिय हुई कोलकाता एसटीएफ ने 28 नवंबर को इरशाद, उसके बेटे अशफाक और रिश्तेदार जहांगीर को कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया था, जबकि इरफान अभी फरार है। वह ढाका में बताया जाता है।

युद्धपोत के स्केच और सूचनाएं भेजीं

aijaz pak spy send naval warships information to ISI

कोलकाता एसटीएफ ने गिरफ्तारी के दौरान इरशाद के पास से पांच लाख रुपये की नकली करेंसी, जीआरएसई का हाथ से बनाया गया नक्शा व अन्य चित्र बरामद किए थे। खुफिया एजेंसियों की मानें तो संविदा कर्मचारी के तौर पर काम करते हुए इरशाद ने इजाज को आईएसआई तक सूचनाएं पहुंचाने का जरिया बनाया।

अशफाक का टीएमसी कनेक्शन
पाक जासूस इजाज के फर्जी दस्तावेज बनाने वाला अशफाक तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद का जनरल सेक्रेटरी रहा है। कोलकाता एसटीएफ द्वारा गिरफ्तारी के बाद तृणमूल कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक रुद्र ने अपने बयान में यह बात स्वीकार की थी। हालांकि, उन्होंने बताया था कि अशफाक को दो महीने पहले ही पार्टी से निकाला जा चुका है।

यह है जीआरएसई
कोलकाता स्थित जीआरएसई रक्षा मंत्रालय के तहत एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है। 20 हेक्टेयर यानी करीब एक किलोमीटर में फैले इस उपक्रम में भारतीय नौसेना के पोतों से लेकर व्यापारिक जलपोतों तक का निर्माण व मरम्मत का काम होता है।

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