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वीवीआईपी हेलीकॉप्टर डील में जमकर हुआ घपला

Wed, 14 Aug 2013 12:04 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Wed, 14 Aug 2013 12:04 AM IST
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agustawestland chopper deal comes under attack from cag

टूजी, कोयला घोटालों, पाकिस्तान, रॉबर्ट वाड्रा और किश्तवाड़ दंगा जैसे मामलों में पहले से घिरी यूपीए सरकार की मुश्किल कैग की एक रिपोर्ट ने भी बढ़ा दी।

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संसद में पेश कैग की इस रिपोर्ट में अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे में कई अनियमितताओं का खुलासा किया गया है।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि करीब 5000 करोड़ रुपये का हेलीकॉप्टर सौदा अगस्ता वेस्टलैंड को देने के लिए रक्षा खरीद के नियमों को तोड़ा मरोड़ा गया।
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विपक्ष को मिला धारदार हथियार
कैग ने अपने निष्कर्ष में इटली की फिनमेकानिका कंपनी से जुड़ी अगस्ता वेस्टलैंड के खिलाफ चल रही सीबीआई की अब तक की जांच की पूरी तरह से तस्दीक कर दी है। इस रिपोर्ट ने यूपीए के खिलाफ विपक्ष को धारदार राजनीतिक हथियार दे दिया है।
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गौरतलब है कि इस हेलीकॉप्टर सौदे की जांच सीबीआई के साथ इटली की सरकार भी कर रही है।

इटली की अदालत में चल रहे मुकदमे के मुताबिक वेस्टलैंड के अधिकारियों ने यह डील हासिल करने के लिए रक्षा मंत्रालय और सरकार को कुछ लोगों को घूस के तौर पर बड़ी रकम दी है।

कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रक्षा मंत्रालय ने इस डील को हरी झंडी देने के लिए रक्षा खरीद के नियमों और रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) में कई बार फेरबदल किया।

रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि मंत्रालय ने हेलीकॉप्टर का बेंचमार्क प्राइस यानी आधार मूल्य 4871.5 करोड़ रुपये तय किया जबकि कंपनी की तरफ से ऑफर प्राइस 3966 करोड़ रुपये ही था।

टेंडर में भी नियमों की अनदेखी
रिपोर्ट के मुताबिक 12 हेलीकॉप्टरों की खेप के टेंडर जारी करने में भी नियमों की अनदेखी की गई। रिपोर्ट में तत्कालीन एयर चीफ मार्शल के कुछ फैसलों पर भी उंगली उठाई है। पूर्व एयर चीफ मार्शल एसपी त्यागी को सीबीआई ने भी आरोपी बना रखा है।

रिपोर्ट में साफ तौैर पर कहा गया है कि हेलीकॉप्टर के ट्रायल में भी अगस्ता वेस्टलैंड को ऐसी छूट दी गई जिसका कोई तर्क नहीं समझ आता। हेलीकॉप्टर का ट्रायल भारत के विभिन्न परिस्थितियों और मौसम में करने के बजाय इटली में किया गया।

इतना ही नहीं इटली में किए गए इस ट्रायल में असल हेलीकॉप्टर नहीं बल्कि उसी तर्ज पर बने प्रोटोटाइप का इस्तेमाल किया गया।

गौरतलब है कि अगस्ता वेस्टलैंड मामले की इटली में शुरू हुए मुकदमे और उसके खुलासों के बाद विपक्ष ने सरकार पर तीखा प्रहार किया था।

इस मामले को ठंडा करने के लिए रक्षा मंत्री एके एंटनी ने जांच सीबीआई के हाथों दे दी। हालांकि इस मामले की अंदरूनी जांच में मंत्रालय के किसी अधिकारी या मंत्री को दोषी नहीं पाया गया है।

एफएच मेजर पर उठाई उंगली
रिपोर्ट में पूर्व वायुसेना प्रमुख एफएच मेजर का नाम लिए बिना कहा गया है कि तत्कालीन वायुसेना प्रमुख ने हेलीकॉप्टरों का परीक्षण देश से बाहर कराने की वर्ष 2008 में अनुमति दे दी, जबकि रक्षा मंत्री एके एंटनी ने इसका विरोध किया था।


शर्मा के रक्षा मंत्रालय में रहते हुआ था सौदा
दिलचस्प यह है कि फिलहाल कैग शशिकांत शर्मा ही हैं जो इस सौदे की शुरुआत होने से लेकर इसे अंतिम रूप दिए जाने तक रक्षा मंत्रालय में कई महत्वपूर्ण पदों पर थे लेकिन उनके पूर्ववर्ती कैग विनोद राय ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में ही इस रिपोर्ट को अंतिम रूप दे दिया था। संसद में पेश 23 अप्रैल की इस रिपोर्ट पर राय के ही हस्ताक्षर हैं।

कैग के खुलासेः-
--सौदे की होड़ में शामिल हेलीकॉप्टरों के विदेश में परीक्षणों की अनुमति दी गई।
--अगस्ता वेस्टलैंड के एडब्लू-101 और सिकोर्स्की के एस-92 हेलीकॉप्टरों को बराबरी के अवसर नहीं दिए गए।
--परीक्षण के समय अगस्ता का हेलीकॉप्टर तो तैयार ही नहीं था, उसे विकसित किया जा रहा था। इसके चलते अगस्ता ने असली हेलीकॉप्टर नहीं, बल्कि मर्लिन एमके-3 हेलीकॉप्टर परीक्षण के लिए दिया था।
--अगस्ता ने 12 हेलीकॉप्टरों के लिए 3966 करोड़ रुपये में सौदे की पेशकश की थी, लेकिन सौदे का बेस प्राइस इससे कहीं ज्यादा 4871 करोड़ रखा गया।
--1240 करोड़ की लागत से चार अतिरिक्त हेलीकाप्टरों की खरीदारी की जरूरत ही नहीं थी।

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