'किसानों की आत्महत्या के पीछे प्रेम संबंध और नपुंसकता'
कृषि मंत्री राधामोहन सिंह किसानों की आत्महत्या के प्रयासों के पीछे उनके प्रेम सम्बंधो को भी एक कारण मानते हैं। उनके इस जवाब के बाद वह विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। विपक्षी पार्टियों ने उनके इस जवाब को किसानों के प्रति बीजेपी सरकार की संवेदनहीनता करार दिया है।
राधामोहन सिंह ने राज्यसभा को दिए एक लिखित जवाब में कहा कि किसानों के आत्महत्या के पीछे जो प्रमुख कृषि प्रधान कारण वो कर्ज, फसल की बर्बादी, सूखा, सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति और कुछ निजी कारण हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो का संदर्भ देते हुए उन्होंने आत्महत्याओं के पीछे कुछ और कारण भी बताएं जिनमें प्रेम संबंध, दरिद्रता और नपुंसकता जैसे कारण भी शामिल हैं।
उनके इस जवाब से विपक्षी पार्टियां काफी आक्रोशित हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि किसानों की आत्महत्याओं के मुद्दे पर बीजेपी पूरी तरह संवेदनहीन है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है वह अपने मंत्रियों से कहें की वे किसानों के घर जाकर देखें कि वहां क्या चल रहा है।
26 फीसदी बढ़े हैं मामले
सपा नेता नरेश अग्रवाल ने मंत्री से मांग की है कि वह अपने इस गैर जिम्मेदाराना बयान पर माफी मांगे। वहीं सीपीआईएम नेता सीताराम येचुरी का कहना है कि किसानों के आत्महत्या के पीछे जो तर्क दिया गया है वह काफी हास्यास्पद है जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जबसे एनडीए की सरकार बनी है तब से किसानों की आत्महत्याओं के मामले में 26 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि कृषि मंत्री अपने इस जवाब से मुख्य मुद्दे से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश कर रहे हैं। चारों तरफ से खुद को घिरता देख राधामोहन सिंह ने अपने सफाई में कहा कि उन्होंने अपने मन से उसमें कुछ नहीं लिखा। जो भी आंकड़े दिए गए हैं वे एनसीआरबी के रिपोर्ट के आधार पर ही दिए गए हैं जिसका सरकार ने अपने जवाब में उल्लेख भी किया है।
एनसीआरबी के आंकड़ो के आधार पर साल 2012, 2013 और 2014 में क्रमशः 13,754, 11,772 और 5650 किसानों ने आत्महत्याएं की। ये वे लोग है जो किसानी या कृषि के क्षेत्र में आत्म निर्भर थे। वहीं राज्य सरकारों ने जो आंकड़े दिए हैं उनमें कृषि सम्बंधित समस्याओं के कारण 2012, 2013, और 2014 में 1,066, 890 और 1,400 किसानों ने आत्महत्या की।