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EXCLUSIVE: बिछड़ने-मिलने की कहानी रुला देगी आपको

Sat, 21 Mar 2015 08:42 AM IST
धर्मेंद्र यादव/अमर उजाला, आगरा
धर्मेंद्र यादव/अमर उजाला, आगरा Updated Sat, 21 Mar 2015 08:42 AM IST
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agra real story.

शादी के पंद्रह साल बाद गोद में नन्हा बाबू आया तो सुनीता को पता था कि ये खुशियां हमेशा के लिए नहीं हैं। एक महीने में सुनीता मानो इस सच्चाई को भुला बैठी। दो दिन पहले जब असली माता-पिता उसे लेने आए तो वह जुदाई का सदमा बर्दाश्त न कर सकी।

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तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उसके पति सोनू ने कलेजे पर पत्थर रखकर बच्चा सौंपा तो एक माह से तड़पती मां ने उसे छाती से लगा लिया।

बता दें, टेढ़ी बगिया चौराहे पर मिष्ठान्न भंडार के पास गत 17 फरवरी की शाम को दो माह का बालक को कूड़े के ढेर के पास पड़ा पाया गया। पार्षद करमवीर सिंह की सूचना पर पुलिस आई तभी पास में रहने वाले सोनू भी पहुंचे। फर्नीचर कारीगर सोनू और सुनीता के शादी के 15 साल बाद भी कोई संतान नहीं है। पुलिस ने सोनू के आग्रह पर बच्चा उनके सुपुर्द की पर इस हिदायत के साथ कि जब उसके माता-पिता मिल जाएंगे तो उन्हें सौंपना होगा।
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नूरजहां को मिला उसका बच्चा

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सुनीता की गोद में आते ही नन्हा बच्चा खिल उठा। सुनीता को तो मानो जहान की खुशियां मिल गईं। दिन-रात उसी में खोई रहती। बाबू नाम भी रख दिया। 18 मार्च की शाम रोरावर, अलीगढ़ निवासी मुकीत अली और नूरजहां वहां की पुलिस के साथ सोनू के घर आए। बताया कि वे ही बच्चे के माता पिता हैं, जिसका असली नाम उवैश है।

नूरजहां ने बताया कि 15 फरवरी की शाम उनके घर के बाहर से कोई उवैश को उठा ले गया। उन्होंने थाना देहली गेट में गुमशुदगी लिखाई थी। थाना एत्माद्दौला में जब बच्चा नूरजहां को सौंपने की बारी आई तो सुनीता की हालत बिगड़ गई। सोनू ने कहा कि तकलीफ तो हुई पर खुशी है कि वह अपने मां-बाप की गोद में पहुंच गया। हां, कुछ साल बाद ऐसा करना बहुत मुश्किल होता। एसओ एत्माद्दौला ने बताया कि बच्चा अलीगढ़ से चोरी हुआ था।

24 घंटे के अंदर मिलनी चाहिए जानकारी
बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष कमलेश कुमारी ने बताया कि गुम हुआ 10 साल तक का बच्चा कहीं भी मिले नियमत: पुलिस को उसके बारे में 24 घंटे के अंदर समिति को सूचित करना चाहिए। समिति बच्चे को राजकीय बाल गृह में रखती है। सभी कागजी कार्रवाई पूरी कर ही उसे घरवालों के सुपुर्द किया जा सकता है। चाइल्ड लाइन के नरेंद्र परिहार ने बताया कि बच्चों के मामलों की सुनवाई के लिए हर थाने में बाल कल्याण अधिकारी नियुक्त हैं। फिर भी पुलिस लापरवाही करती है।

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