अग्नि- 4 का प्रायोगिक परीक्षण सफल, 4 हजार किमी है मारक क्षमता
भारत ने सोमवार को परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम लंबी दूरी के रणनीतिक बैलेस्टिक मिसाइल अग्नि-4 का सफल प्रायोगिक परीक्षण किया। 4000 किलोमीटर तक की दूरी पर मौजूद लक्ष्य को भेद सकने वाली इस मिसाइल का परीक्षण ओडिशा के तट पर स्थित एक परीक्षण रेंज से किया गया। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता सितांशु कर ने कहा लंबी दूरी के बैलेस्टिक मिसाइल का परीक्षण सोमवार सुबह 9:45 बजे डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम (व्हीलर) द्वीप लॉन्च कॉम्प्लेक्स से किया गया।
अग्नि-1, 2, व 3 और पृथ्वी मिसाइल पहले ही सैन्य बलों के युद्धक बेड़े में शामिल है, जिसकी पहुंच 3000 किलोमीटर से अधिक की है। यह सेना को प्रभावी प्रतिरोध क्षमता उपलब्ध कराती है। प्रवक्ता ने कहा कि सतह से सतह तक मारने में सक्षम स्वदेशी मिसाइल अग्नि-4 में द्विचरणीय शस्त्र प्रणाली है। यह 20 मीटर लंबी और 17 टन भारी है।
अग्नि-4 मिसाइल में पांचवी पीढ़ी के कम्प्यूटर लगे हैं। इसकी आधुनिकतम विशेषताएं उड़ान के दौरान होने वाले अवरोधों के दौरान खुद को ठीक एवं दिशा निर्देशित कर सकती हैं। सूत्रों ने कहा कि यह अग्नि मिसाइल का पांचवां परीक्षण था। इसका अंतिम परीक्षण रणनीतिक बल कमान द्वारा 2 दिसंबर 2014 को सफलतापूर्वक किया गया।
प्रक्षेपित होगा जीसैट-15
वहीं दूसरी ओर भारत का नवीनतम संचार उपग्रह जीसैट-15 आगामी 11 नवंबर की सुबह कोउरोउ स्थित स्पेस पोर्ट से एरियनस्पेस रॉकेट के जरिये प्रक्षेपित किया जाएगा। जीसैट-15 और उसके सहयात्री सऊदी अरब के उपग्रह अरबसैट-6बी को एरियन-5 वीए-227 प्रक्षेपण वाहन के जरिये अंतरराष्ट्रीय समयानुसार 3:04 बजे प्रक्षेपित किए जाने की योजना है।
इसरो ने कहा कि उड़ान के समय कुल 3,164 किलोग्राम के वजन वाला जीसैट-15 इनसैट जीसैट व्यवस्था में शामिल किया जाने वाला उच्च क्षमता संपन्न उपग्रह है। इसमें कू-बैंड के 24 संचार ट्रांसपोंडर्स हैं और गगन जीपीएस एडेड जियो ऑग्यूमेंटेड नेविगेशन पेलोड एल1 और एल5 बैंड में संचालित हो रहा है।
जीसैट-8 और जीसैट-10 के बाद जीसैट-15 ऐसा तीसरा उपग्रह है जो गगन पेलोड को लेकर जा रहा है। इसमें कू-बैंड प्रकाश स्तंभ भी लगा है जिससे जमीन पर लगे एंटीना को उपग्रह की ओर सटीक ढंग से संतुलित किया जा सके।