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फिर होगा यूजीसी-नेट के प्रारूप में बदलाव
इलाहाबाद/ब्यूरो
Updated Tue, 02 Apr 2013 11:11 AM IST
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यूजीसी की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) की तैयारी में जुटे छात्र-छात्राएं बदलाव के लिए एक बार फिर तैयार हो जाएं। इसके लिए यूजीसी ने दो सदस्यीय कमेटी भी बना दी है।
कमेटी परीक्षा के नए फार्मेट के साथ प्रक्रिया, रिजल्ट के प्रारूप समेत अन्य पहलुओं का भी खाका तैयार करेगी। साल भर में यह दूसरा मौका है जब यूजीसी को इस तरह की पहल करनी पड़ी है।
पिछले साल जून की परीक्षा में यूजीसी ने बड़ा बदलाव करते हुए तृतीय पेपर को वस्तुनिष्ट आधारित कर दिया था। पहले तीसरे प्रश्नपत्र में विस्तृत उत्तरीय सवाल हुआ करते थे लेकिन इस बदलाव के बाद व्यापक स्तर पर गड़बड़ियां सामने आईं। आयोग की ओर से जारी आंसर की को लेकर हजारों आपत्तियां मिली थीं।
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अधिकतर आपत्तियां सही भी थीं, जिसे संज्ञान में लेते हुए आयोग को दोबारा रिजल्ट घोषित करना पड़ा। नतीजतन, पास होने वालों की संख्या डेढ़ गुना से भी अधिक हो गई।
इसके मद्देनजर दिसंबर में हुई पिछली परीक्षा के रिजल्ट के प्रारूप में भी बदलाव किया गया है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने आंसर-की को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। अभ्यर्थियों का कहना है कि तीन ऐसे सवाल हैं जिसमें आयोग ने अलग-अलग सीरीज के उत्तरों में अंतर है। इसके अलावा विशेषज्ञों ने भी इस प्रारूप को लेकर आपत्ति जताई है।
पिछली दो परीक्षाओं में देखा गया कि परीक्षार्थियों ने निर्धारित अवधि से काफी पहले ही पेपर हल कर लिए। एक घंटा पहले वे बाहर भी निकल गए। इससे नकल की आशंका बनी रही। यह मुद्दा यूजीसी की बैठकों में भी उठा। इस तरह के सवालों को देखते हुए यूजीसी ने इसमें फिर परिवर्तन की पहल की है। इसी सिलसिले में प्रो. योगेंद्र यादव और प्रो. डी.नरसिम्हा रेड्डी की कमेटी बनाई गई है।
हर विषय के लिए जारी किया अलग कटऑफ
यूजीसी-नेट दिसंबर-2012 के रिजल्ट में आयोग हर विषय के लिए अलग-अलग कटऑफ जारी किया है। इस बार आयोग ने फाइनल रिजल्ट के लिए चार चरण अपनाए।
पहले चरण में तीनों पेपर में न्यूनतम क्वालीफाइंग अंक पाने वालों की सूची तैयार की गई। फिर विषयवार एग्रीगेट कटऑफ तैयार कर सूची बनाई गई। इनमें शीर्ष 15 फीसदी अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया।
चौथी सूची में जेआरएफ के लिए क्वालीफाई करने वालों का नाम था। इसके तहत प्रमुख विषयों में पात्रता परीक्षा के लिए सबसे अधिक मेरिट 65.71 फीसदी सामाजिक विज्ञान, रक्षा अध्ययन और लोक प्रशासन की रही।
अर्थशास्त्र और दर्शनशास्त्र की 65.14 प्रतिशत रही। इससे पहले जून में हुई परीक्षा में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा के लिए सभी के लिए एक ही कटऑफ निर्धारित किया था, जिसमें रिकार्ड संख्या में अभ्यर्थी सफल हुए थे। हालांकि जेआरएफ के लिए दोनों ही बार विषयवार मेरिट जारी की गई थी।
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कमेटी परीक्षा के नए फार्मेट के साथ प्रक्रिया, रिजल्ट के प्रारूप समेत अन्य पहलुओं का भी खाका तैयार करेगी। साल भर में यह दूसरा मौका है जब यूजीसी को इस तरह की पहल करनी पड़ी है।
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पिछले साल जून की परीक्षा में यूजीसी ने बड़ा बदलाव करते हुए तृतीय पेपर को वस्तुनिष्ट आधारित कर दिया था। पहले तीसरे प्रश्नपत्र में विस्तृत उत्तरीय सवाल हुआ करते थे लेकिन इस बदलाव के बाद व्यापक स्तर पर गड़बड़ियां सामने आईं। आयोग की ओर से जारी आंसर की को लेकर हजारों आपत्तियां मिली थीं।
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अधिकतर आपत्तियां सही भी थीं, जिसे संज्ञान में लेते हुए आयोग को दोबारा रिजल्ट घोषित करना पड़ा। नतीजतन, पास होने वालों की संख्या डेढ़ गुना से भी अधिक हो गई।
इसके मद्देनजर दिसंबर में हुई पिछली परीक्षा के रिजल्ट के प्रारूप में भी बदलाव किया गया है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने आंसर-की को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। अभ्यर्थियों का कहना है कि तीन ऐसे सवाल हैं जिसमें आयोग ने अलग-अलग सीरीज के उत्तरों में अंतर है। इसके अलावा विशेषज्ञों ने भी इस प्रारूप को लेकर आपत्ति जताई है।
पिछली दो परीक्षाओं में देखा गया कि परीक्षार्थियों ने निर्धारित अवधि से काफी पहले ही पेपर हल कर लिए। एक घंटा पहले वे बाहर भी निकल गए। इससे नकल की आशंका बनी रही। यह मुद्दा यूजीसी की बैठकों में भी उठा। इस तरह के सवालों को देखते हुए यूजीसी ने इसमें फिर परिवर्तन की पहल की है। इसी सिलसिले में प्रो. योगेंद्र यादव और प्रो. डी.नरसिम्हा रेड्डी की कमेटी बनाई गई है।
हर विषय के लिए जारी किया अलग कटऑफ
यूजीसी-नेट दिसंबर-2012 के रिजल्ट में आयोग हर विषय के लिए अलग-अलग कटऑफ जारी किया है। इस बार आयोग ने फाइनल रिजल्ट के लिए चार चरण अपनाए।
पहले चरण में तीनों पेपर में न्यूनतम क्वालीफाइंग अंक पाने वालों की सूची तैयार की गई। फिर विषयवार एग्रीगेट कटऑफ तैयार कर सूची बनाई गई। इनमें शीर्ष 15 फीसदी अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया।
चौथी सूची में जेआरएफ के लिए क्वालीफाई करने वालों का नाम था। इसके तहत प्रमुख विषयों में पात्रता परीक्षा के लिए सबसे अधिक मेरिट 65.71 फीसदी सामाजिक विज्ञान, रक्षा अध्ययन और लोक प्रशासन की रही।
अर्थशास्त्र और दर्शनशास्त्र की 65.14 प्रतिशत रही। इससे पहले जून में हुई परीक्षा में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा के लिए सभी के लिए एक ही कटऑफ निर्धारित किया था, जिसमें रिकार्ड संख्या में अभ्यर्थी सफल हुए थे। हालांकि जेआरएफ के लिए दोनों ही बार विषयवार मेरिट जारी की गई थी।