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जस्टिस गांगुली के खिलाफ पर्याप्त सुबूत: अटॉर्नी जनरल
एजेंसी/नई दिल्ली
Updated Sat, 21 Dec 2013 02:11 PM IST
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लॉ इंटर्न के यौन शोषण के आरोपों में घिरे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एके गांगुली पर शिकंजा और कसता जा रहा है।
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जस्टिस गांगुली को पश्चिम बंगाल के मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने के लिए राष्ट्रपति का संदर्भ लाने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर अटॉर्नी जनरल जीई वाहनवती ने भी मुहर लगा दी है।
वाहनवती ने गृह मंत्रालय को भेजी राय में जस्टिस गांगुली के खिलाफ पर्याप्त सुबूत होने की बात कही है और राष्ट्रपति के संदर्भ के लिए इसे बिलकुल सही मामला बताया है।
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सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित पैनल ने भी अपनी रिपोर्ट में जस्टिस गांगुली के व्यवहार को अशोभनीय करार दिया था। सरकार ने राष्ट्रपति के संदर्भ पर अटॉर्नी जनरल से उनके विचार जानने को प्रस्ताव भेजा था।
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सूत्रों का कहना है कि कानून और गृह मंत्रालय पहले ही इस बात पर सहमत हैं कि प्रथम दृष्टया सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज के खिलाफ मामला बनता है।
कानून मंत्रालय और अटॉर्नी जनरल का यह रुख सुप्रीम कोर्ट द्वारा लॉ इंटर्न द्वारा लगाए गए आरोपों पर गठित तीन सदस्यीय पैनल की रिपोर्ट पर आधारित है।
गृह मंत्रालय ने हाल ही में मामले को कानून मंत्रालय के पास भेजा था। गृह मंत्रालय अब इस मामले में अंतिम निर्णय लेगा।
सरकार ने ये कदम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पत्रों को गृहमंत्रालय के विचारार्थ भेजे जाने के बाद उठाए हैं।
बनर्जी ने अपने पत्रों में राष्ट्रपति से जस्टिस गांगुली को प्रदेश के मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन पद से बर्खास्त करने की मांग की थी।
हालांकि जस्टिस गांगुली लगातार यौन शोषण के आरोपों से इनकार करते रहे हैं। राष्ट्रपति के सुप्रीम कोर्ट के लिए संदर्भ को पहले कैबिनेट मंजूरी देगी, उसके बाद इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा।
बर्खास्त करने की प्रक्रिया
मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम में साफ कहा गया है कि राष्ट्रीय और प्रदेशों के मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन और सदस्यों को केवल राष्ट्रपति के आदेश पर ही बर्खास्त या हटाया जा सकता है लेकिन इसके लिए उन्हें उच्चतम न्यायालय को सिफारिश करनी होती है।
उच्चतम न्यायालय राष्ट्रपति की सिफारिश मिलने के बाद मामले की जांच करता है जिसमें दोषी पाए जाने के बाद ही मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को हटाया जा सकता है।
फैसला अगले हफ्ते: शिंदे
केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि उनका मंत्रालय जस्टिस गांगुली के मामले पर कानूनी राय ले रहा है। विधि मंत्रालय की राय अगले हफ्ते मिलने की उम्मीद है, जिसके बाद इस मसले पर राष्ट्रपति की सिफारिश उच्चतम न्यायालय को भेज दी जाएगी।