बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
INSTALL APP

अफजल: वादी से फांसी की सजा तक का सफर

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Sat, 09 Feb 2013 03:33 PM IST
विज्ञापन
afzal guru profile

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

ख़बर सुनें
तेरह दिसंबर 2001 को संसद पर हुए आत्मघाती हमले के लिए मृत्यु दंड पाने वाले मोहम्मद अफजल गुरु का जीवन शिक्षा, कला, कविता और आतंकवाद का अनूठा मिश्रण है।
विज्ञापन


बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार 37 वर्षीय अफजल उत्तरी क्षेत्र सोपोर के एक मध्यमवर्गीय परिवार से हैं जो सोपोर से छह किलोमीटर दूर आबगाह गांव में झेलम नदी के किनारे बसा हुआ है।


अफजल के सहपाठियों का कहना है कि वह स्कूल के कार्यक्रमों में इतने सक्रिय थे कि उन्हें भारत के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर परेड की अगुवाई करने के लिए विशेष रूप से चुना जाता था। क्षेत्रीय स्कूल से अफजल ने 1986 में मैट्रिक की परीक्षा पास की।

मेडिकल के छात्र
हायर सेकेंड्री के लिए जब उन्होंने सोपोर के मुस्लिम एजुकेशन ट्रस्ट में दाखिला लिया तो वहां उनकी मुलाकात नवेद हकीम से हुई जो शांतिपूर्ण भारत विरोधी गतिविधियों में सक्रिय थे लेकिन अफजल ने पढ़ाई को प्राथमिकता दी और 12वीं पास कर मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया और पिता के सपने को पूरा करने में जुट गए।

जब कश्मीर में 1990 के आसपास हथियारबंद आतंकवाद शुरू हुआ तो अफजल एमबीबीएस के तीसरे साल में थे, तब तक उनके दोस्त नवीद हकीम आतंकवादी बन चुके थे।

इसी दौरान श्रीनगर के आसपास के क्षेत्र छानपुरा में भारतीय सेना ने एक कार्रवाई के दौरान कथित रुप से कई महिलाओं के साथ बलात्कार किया।

अफजल के साथियों का कहना है कि इस घटना से उन्हें गहरा आघात पहुंचा इसलिए उन्होंने अपने साथियों के साथ नवेद से संपर्क स्थापित किया और भारत विरोधी जम्मू-कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट में शामिल हो गए।

आतंकवाद का सफर

अफजल नियंत्रण रेखा के पार मुजफ्फराबाद में हथियारों के प्रशिक्षण के बाद वापस लौटे तो संगठन की सैन्य योजना बनाने वालों में शामिल हो गए। सोपोर में लगभग 300 कश्मीरी नौजवान उनकी निगरानी में आतंकवादी गतिविधियों में हिस्सा लेते रहे।

ऐसे ही एक नौजवान फारूक अहमद उर्फ कैप्टन तजम्मुल (जो अब चरमपंथ छोड़ चुके हैं) ने बीबीसी को बताया कि अफजल खून-खराबे को पसंद नहीं करते थे।

पुरानी यादें दोहराते हुए फारूक का कहना है कि जब कश्मीर में लिबरेशन फ्रंट और हिज्बुल मुजाहिदीन के बीच टकराव शुरू हुआ तो अफजल ने 300 सशस्त्र लड़कों की बैठक सोपोर में बुलाई और ऐलान किया कि हम इस मार-काट में भाग नहीं लेंगे। यही कारण है कि सारे क्षेत्र में आपसी लड़ाई में सैकड़ों मुजाहिदीन मारे गए लेकिन हमारा इलाका शांत रहा।

अपने चचेरे भाई शौकत गुरू (संसद पर हमले के एक और अभियुक्त) की मदद से उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया और स्नातक के बाद अर्थशास्त्र में डिग्री ली।

कई जगह नौकरी की
शौकत के छोटे भाई यासीन गुरु का कहना है कि अफ़ज़ल दिल्ली में अपना और अपनी पढ़ाई का खर्च ट्यूशन देकर चलाते थे। डिग्री के बाद थोड़े समय के लिए शौकत और अफजल दोनों ने बैंक ऑफ अमेरिका में नौकरी की। अंत में दिल्ली में सात वर्षों तक रहने के बाद 1998 में वह अपने घर कश्मीर वापस लौटे। यहां उनकी शादी बारामूला की तबस्सुम के साथ हुई।

तबस्सुम कहती हैं कि वह अफजल के अतीत से परिचित थीं लेकिन अफजल की संगीत में दिलचस्पी से उन्होंने यह मतलब निकाला कि आतंकवादी बनना एक दुर्घटना थी। उनका कहना है कि गालिब की शायरी उनके सर पर सवार थी, यहां तक कि हमारे बेटे का नाम भी गालिब रखा गया। वह माइकल जैक्सन के गाने भी शौक से सुनते थे।

उस दौर में अफजल ने दिल्ली की एक दवा बनाने वाली कंपनी में एरिया मैनेजर की नौकरी कर ली और साथ-साथ खु़द भी दवाइयों का कारोबार करने लगे। अफजल के दोस्तों का कहना है कि यह समय अफजल के लिए वापसी का दौर था, वह सामान्य रूप से सैर-सपाटे, गाने-बजाने और सामाजिक कामों में दिलचस्पी लेने लगे थे।

अफजल के बचपन के साथी मास्टर फैयाज का कहना है कि क्षेत्रीय फौजी कैंप पर हर रोज हाजिर होने की पाबंदी और पुलिस टास्क फ़ोर्स की कथित ज़्यादतियों ने अफजल की सोच को वापस मोड़ दिया। अफजल की भाभी बेगम एजाज का कहना है कि 2000 में टास्क फोर्स ने अफजल को गिरफ़तार कर लिया और 'उन्हें काफी यातनाएं दीं'।

इसके बाद अफजल ने सोपोर में रहना छोड़ दिया और अधिकतर दिल्ली और श्रीनगर में रहने लगे। हिलाल गुरु का कहना है कि जब 13 दिसंबर को संसद पर हमला हुआ तो वह अफ़ज़ल के साथ दिल्ली में मौजूद थे।

अफजल गुरु ऐसा दूसरा कश्मीरी है जिसे अलगाववादी गतिविधियों के लिए फांसी पर लटकाया गया है। इससे पहले जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के नेता मकबूल बट्ट को फांसी दी गई थी।
 

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us