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अफजल को फांसीः सरकार ने नहीं लगने दी पहले भनक
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Sat, 09 Feb 2013 07:42 PM IST
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संसद हमले के दोषी अफजल गुरू को जल्द फांसी पर लटकाए जाने की परिस्थितियां तो कसाब की मौत के बाद से ही बनने लगी थीं, लेकिन कसाब की तर्ज पर यह प्रक्रिया भी इतनी गुपचुप होगी, शायद इसका अंदाजा किसी को नहीं था। समूची कार्रवाई को इतने गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया कि मीडिया सहित किसी को भी इसकी भनक तक नहीं लगी।
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पिछले दो हफ्ते से जब देश का अधिकांश मीडिया मोदी की पीएम उम्मीदवारी की खबरों में व्यस्त था, यूपीए सरकार गुपचुप अफजल को फांसी देने की तैयारियों में जुटी थी। राष्ट्रपति की ओर से दया याचिका खारिज किए जाने के बाद 4 फरवरी को अफजल की फांसी का दिन और समय तय कर दिया गया। इस फैसले को लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाने में केवल उन्हीं चुनिंदा लोगों को शामिल किया गया जो इस प्रक्रिया का हिस्सा थे।
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तिहाड़ जेल का मामला होने के कारण गृह मंत्रालय ने दिल्ली सरकार को इसकी सूचना दी। तिहाड़ में आठ फरवरी तक केवल महानिदेशक विमला मेहरा को ही इस फैसले की खबर थी। गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को भी इसकी सूचना दे दी थी, लेकिन मीडिया को फिर भी इसकी भनक नहीं लगने दी गई। आखिरकार शनिवार सुबह आठ बजे अफजल को फांसी पर चढ़ाए जाने के साथ ही इस सस्पेंस को खत्म कर सरकार ने सबको चौंका दिया।
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कसाब के बाद लग गया था अफजल का नंबर
अफजल की फांसी पर जो फैसला यूपीए सरकार लगभग नौ साल में नहीं ले पाई, उसे मुंबई हमले के गुनहगार अजमल कसाब की फांसी के महज ढाई महीनों में अंजाम दे दिया। दरअसल, अफजल की फांसी पर सरकार ने ‘आपरेशन एक्स’ (कसाब को फांसी पर चढ़ाए जाने की प्रक्रिया का नाम) के बाद ही राजनीतिक फैसला ले लिया था।
कसाब की फांसी के बाद गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने संकेत दिए थे कि अफजल की फांसी पर जल्द फैसला लिया जाएगा। शिंदे ने एक प्रेस कांफ्रेंस में यह भी स्वीकार किया कि दिल्ली गैंगरेप की घटना के चलते वह अफजल की फांसी के मामले पर ध्यान नहीं दे पाए।
कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह भी इस मुद्दे पर सरकार से जल्द फैसला करने की बात कहकर इस बात का संकेत दे रहे थे कि फांसी के इस संवेदनशील मामले में सरकार के भीतर अंदरखाने सरगर्मी है। सरकार में गुरू को फांसी पर फैसला लटकने का सबसे बड़ा कारण जम्मू-कश्मीर के हालात और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का इस मुद्दे पर खुलकर सामने नहीं आना था। मगर ऑपरेशन एक्स के बाद सही मौके का इंतजार देखा जाने लगा।