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हार के बाद 'आप' में जबरदस्त बवाल

Sun, 18 May 2014 01:02 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Sun, 18 May 2014 01:02 AM IST
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After the defeat in Delhi blame game start in AAP

चुनाव नतीजे आने के साथ ही कई पार्टियों में विरोध के सुर तेज होने लगे हैं। इसमें अव्वल आम आदमी पार्टी नजर आ रही है।

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करीब चार महीने पहले दिल्ली विधान सभा के चुनावों में जिस पार्टी ने 28 सीटें जीत कर चुनावी पंडितों को चौंका दिया था। ये कयास लगने लगे थे कि लोकसभा चुनावों में भी पार्टी का प्रदर्शन कुछ वैसा ही होगा।

लेकिन जैसी उम्मीद थी मोदी लहर के आगे सब फेल हो गई। राजधानी में आम आदमी पार्टी का कोई दांव नहीं चला। दिल्ली की सात लोकसभा सीटों में से एक भी सीट उसके खाते में नहीं गई।
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जनता के इस फैसले के बाद जहां बीजेपी नई सरकार के गठन की तैयारी में जुट गई है। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी में घमासान शुरू होता दिख रहा है। पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ उंगलियां उठनी शुरू हो गई है।

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केजरीवाल पर निशाना

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इसकी शुरूआत आम आदमी पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति के एक सदस्य ने की। पार्टी के सदस्य इलियास आजमी ने पार्टी की हार के लिए अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा है। उन पर निरंकुश शैली में काम करने का आरोप लगाया है।

उन्होंने कहा, "पंजाब के अलावा पार्टी का प्रदर्शन और कहीं भी अच्छा नहीं रहा। इसके पीछे उन्होंने सीधे तौर पर केजरीवाल को ही वजह बताया।"

आजमी ने कहा, "उन्होंने स्वराज के नाम पर पार्टी में जबरन अपने फैसले थोपे। पार्टी में कोई आंतरिक लोकतंत्र नहीं बचा है। पीएसी के सामने न तो दिल्ली में सरकार छोड़ने को लेकर कोई फैसला लिया गया और न ही उम्मीदवारों के टिकट वितरण में इसकी कोई राय ली गई।"

उनका कहना था कि पार्टी में केवल केजरीवाल-मनीष गुट ही है जो फैसले लेता है। इलियास आजमी ने बताया कि पार्टी को सबसे ज्यादा नुकसान पार्टी के दिल्ली में सरकार छोड़ने का हुआ है। जिसका खामियाजा लोकसभा चुनाव में नजर आया।

इसके साथ ही उन्होंने देश भर की 443 सीटों पर उम्मीदवार उतारने को लेकर भी सवाल खड़ा किया।

कई नेताओं में नाराजगी

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इसके अलावा केजरीवाल ने दिल्ली की बजाय वाराणसी से चुनाव लड़ा। केजरीवाल को उम्मीद थी कि मुस्लिमों के वोट मिल जाएंगे। लेकिन नतीजों में ऐसा कुछ नहीं हुआ।

पार्टी के भीतर और बाहर यही राय थी कि केजरीवाल को दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़ना था। अगर केजरीवाल ऐसा करते तो पार्टी पांच सीटें हासिल कर सकती थी।

इसके साथ ही केजरीवाल के इंडिया इस्लामिक सेंटर में दिए गए उस बयान पर भी सवाल उठाया जिसमें उन्होंने साम्प्रदायिकता को भ्रष्टाचार से बड़ी समस्या बताया था। इसको लेकर उनकी काफी आलोचना हुई थी।

इसके साथ ही खबर आ रही है कि पार्टी की नेता शाजिया इल्मी भी केजरीवाल से नाराज हैं। उन्होंने पार्टी की हार के लिए अरविंद केजरीवाल को ही दोषी ठहराया है।

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