सुभाष चंद्र बोस पर मोदी सरकार की पलटी
केंद्र की भाजपा नेतृत्व वाली सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के रहस्यमय ढंग से लापता होने से जुड़ी 39 गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है। विपक्ष में रहते हुए भाजपा नेताजी के लापता होने और उससे जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग करती रही है।
इसी वर्ष जनवरी में लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान के दौरान तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने नेताजी की 117वीं जयंती के मौके पर उनके जन्मस्थान कटक में यूपीए सरकार से मांग की थी कि महान स्वतंत्रता सेनानी से जुड़े रिकार्ड देश की जनता के सामने लाया जाए।
पीएमओ ने हाल में ही इस संबंध में आरटीआई के जरिए मांगी गई जानकारी के जवाब में स्वीकार किया कि बोस से जुड़ी 41 फाइलें हैं, जिनमें से दो सार्वजनिक की जा चुकी हैं। लेकिन वर्तमान सरकार ने भी पिछली सरकार की तरह बाकी फाइलों को जगजाहिर करने से इनकार कर दिया।
सरकार के रूख में आया बदलाव
आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल को उत्तर में पीएमओ ने कहा, "इन फाइलों के तथ्यों को सार्वजनिक करने से विदेश से रिश्ते प्रभावित होंगे। इस प्रकर के तथ्यों को आरटीआई एक्ट की धारा 8 (1) और 8 (2) के तहत सार्वजनिक न करने से छूट प्राप्त है।"
मालूम हो कि वर्तमान में देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सत्ता में आने से पहले चुनाव के दौरान दावा किया था कि जनहित को देखते हुए कागजातों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा था कि देश जानना चाहता कि किन हालातों में नेताजी की मौत हुई थी। लेकिन पीएम मोदी का कार्यालय इस ओर तत्पर नहीं दिख रहा है।