फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   After tamilnadu maharatra and asam create trouble for Congress

महाराष्ट्र और असम में फंसी कांग्रेस, जानिए कैसे

Sun, 16 Nov 2014 02:19 PM IST
धीरज कनोजिया/अमर उजाला, दिल्ली
धीरज कनोजिया/अमर उजाला, दिल्ली Updated Sun, 16 Nov 2014 02:19 PM IST
विज्ञापन
After tamilnadu maharatra and asam create trouble for Congress

नई दिल्ली में कांग्रेस के मुख्यालय 24 अकबर रोड में भले ही कांग्रेस हाईकमान के खिलाफ बगावत के सुर ज्यादा तेज नहीं सुनाई दे रहे हों, मगर केंद्र की सत्ता में मोदी सरकार के आने के बाद राज्यों में कांग्रेस बिखरती नजर आ रही है।

विज्ञापन


तमिलनाडु के बाद अब महाराष्ट्र और असम में कांग्रेस दो फाड़ होने की स्थिति में आ गई है। दिलचस्त बात यह है कि दोनों राज्यों में कांग्रेस की इस हालत के बारे में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी अच्छी तरह जानते हैं। मगर दिल्ली के संकट में फंसे होने की वजह से राज्यों में स्थितियां आंखों के सामने बेकाबू होते देखना ही मजबूरी हो गई है।
विज्ञापन


असम में पूर्व मंत्री हेमंत विश्वशर्मा और महाराष्ट्र में नारायण राणे पार्टी छोड़ने की तैयारी में है। हिमंता  भाजपा में शामिल होने की तैयारी में है, जबकि राणे के अपनी पुरानी पार्टी शिवसेना या भाजपा में जाने की बात है। पार्टी के लिए मुश्किल यही नहीं खत्म हो जाती। इनकेसाथ कई विधायक और समर्थक भी पार्टी छोड़ने के लिए तैयार बैठे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


हिमंता के साथ दर्जन भर से ज्यादा युवा विधायक हैं। जबकि राणे भले ही चुनाव हारे हो लेकिन कई विधायक उनके समर्थन में है। हिमांता असम के मुख्यमंत्री तरूण गोगोई को हटाने की मांग लंबे समय से कर रहे हैं। लेकिन हाईकमान उनकी मांग लगातार नजरअंदाज कर रहा है।

हिमंता दरअसल भाजपा में जाने की तैयारी में है। लेकिन भाजपा में उन्हें लेकर काफी विरोध सामने आ रहा है। प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रोद्युत्त बोरा ने खुले आम उनका विरोध कर दिया। हालांकि भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और सांसद उनको पार्टी में लाने की वकालत कर रहे हैं।

लेकिन सूत्र बता रहे है कि वह कांग्रेस छोड़ने का मन बना चुके हैं। दूसरी तरफ माना जा राह है कि राणे का मोह कांग्रेस से खत्म होने लगा है। वह चाहते है कि पार्टी उनको प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बना दे। लेकिन हाईकमान उनके चुनाव हारने के बाद उन्हें कोई जिम्मेदारी देने के लिए तैयार नहीं है।


राणे ने हाईकमान को पार्टी से इस्तीफा देने के संकेत दिए है। दोनों राज्यों में अगर पार्टी के दिग्गज नेता जाते है तो इसका असर दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के वर्चस्व पर भी पड़ सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed