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एडमिशन लेने के बाद दोबारा दे सकेंगे सीपीएमटी
अमित यादव/लखनऊ
Updated Thu, 20 Sep 2012 03:27 PM IST
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करना चाहते थे एमबीबीएस, लेकिन रैंक कम होने के चल बीडीएस करना पड़ रहा है वह भी मनमाफिक संस्थान से नहीं। अब इसके लिए निराश होने की जरूरत नहीं। ऐसे छात्र दोबारा कम्बाइंड प्री मेडिकल टेस्ट (सीपीएमटी) देकर बेहतर रैंक ला सकते हैं और मनमाफिक कोर्स व कॉलेज में दाखिला ले सकते हैं।
सीपीएमटी के माध्यम से चयनित स्टूडेंट्स किसी पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के बावजूद दोबारा सीपीएमटी परीक्षा देने और काउंसलिंग में शामिल होने के पात्र हो गए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने 18 सितंबर को एक शासनादेश जारी कर नियमों को शिथिल कर दिया है। चिकित्सा शिक्षा में सुधार और छात्रों के भविष्य को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
शासनादेश के अनुसार, एक बार चयन के बाद यदि छात्र बीएचएमएस में प्रवेश लेता है तो वह दोबारा फिर सीपीएमटी परीक्षा दे सकेगा। यदि इस परीक्षा में उसकी रैंक बेहतर आती है तो वो बीएचएमएस पाठ्यक्रम को छोड़कर एमबीबीएस या किसी भी अन्य कोर्स में प्रवेश ले सकेगा। यही नहीं, यदि एक काउंसलिंग के बाद छात्र को अच्छा कॉलेज नहीं मिलता है तो वह प्रवेश लेने के बावजूद अपनी सीट छोड़कर बाद में बेहतर कॉलेज में प्रवेश ले सकेगा।
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22 अप्रैल, 1996 के शासनादेश में सीपीएमटी की परीक्षा में चयनित होकर यदि छात्र ने किसी पाठ्यक्रम में प्रवेश ले लिया हो तो वो दोबारा सीपीएमटी परीक्षा में नहीं बैठ सकता था। अब छात्रों को इस बाध्यता से मुक्त कर दिया गया है। महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. सौदान सिंह ने शासनादेश जारी होने की पुष्टि की है।
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सीपीएमटी के माध्यम से चयनित स्टूडेंट्स किसी पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के बावजूद दोबारा सीपीएमटी परीक्षा देने और काउंसलिंग में शामिल होने के पात्र हो गए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने 18 सितंबर को एक शासनादेश जारी कर नियमों को शिथिल कर दिया है। चिकित्सा शिक्षा में सुधार और छात्रों के भविष्य को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
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शासनादेश के अनुसार, एक बार चयन के बाद यदि छात्र बीएचएमएस में प्रवेश लेता है तो वह दोबारा फिर सीपीएमटी परीक्षा दे सकेगा। यदि इस परीक्षा में उसकी रैंक बेहतर आती है तो वो बीएचएमएस पाठ्यक्रम को छोड़कर एमबीबीएस या किसी भी अन्य कोर्स में प्रवेश ले सकेगा। यही नहीं, यदि एक काउंसलिंग के बाद छात्र को अच्छा कॉलेज नहीं मिलता है तो वह प्रवेश लेने के बावजूद अपनी सीट छोड़कर बाद में बेहतर कॉलेज में प्रवेश ले सकेगा।
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22 अप्रैल, 1996 के शासनादेश में सीपीएमटी की परीक्षा में चयनित होकर यदि छात्र ने किसी पाठ्यक्रम में प्रवेश ले लिया हो तो वो दोबारा सीपीएमटी परीक्षा में नहीं बैठ सकता था। अब छात्रों को इस बाध्यता से मुक्त कर दिया गया है। महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. सौदान सिंह ने शासनादेश जारी होने की पुष्टि की है।