संघ की मंजूरी के बाद ही बन पाएंगे मंत्री के बाबू
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूपीए सरकार में हुए घोटालो से सबक लेते हुए एनडीए सरकार अब मंत्रियों के निजी स्टॉफ की नियुक्ति में भी सतर्कता बरत रही है। फिर चाहे मंत्री के पर्सनल सेक्रेटरी हों या फिर ओएसडी या फिर एपीएस। भाजपा इन पदों पर नियुक्ति से पहले अधिकारियों के अतीत के कार्यकाल, उनके व्यवहार सहित अन्य सभी तरह की जांच कर रही है।
जांच में पॉजिटिव रिपोर्ट के बाद ही अधिकारियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जा रहा है। खास बात यह है कि चयनित अधिकारियों या कर्मचारियों को किस मंत्री के यहां नियुक्त किया जाना है, इसका फैसला पार्टी या संघ ही कर रहा है। जानकारी के मुताबिक, मंत्री का सरकारी अधिकारी या प्राइवेट अधिकारी कौन होगा, यह संघ तय करेगा।
मोदी सरकार में मंत्रियों का कद घटेगा?
मंत्री केवल इतना ही कर सकते हैं कि उनका बायोडाटा संघ के पास भेज सकते हैं। यह भी जरूरी नहीं है कि बायोडाटा वाला व्यक्ति उसी मंत्री के यहां नियुक्त हो जहां से उनका बायोडाटा भेजा गया। हो सकता है कि बायोडाटा भेजने वाला मंत्री कोई और हो और उनकी नियुक्तियां कहीं और की जाएं।
किस अधिकारी को किस मंत्री के साथ जोड़ा जाए यह संघ तय करेगा। बताया जा रहा है कि संघ की ओर से भाजपा पर निगरानी रखने वाले एक पदाधिकारी इस काम को देख रहे हैं। पर्सनल सेक्रेटरी से लेकर ओएसडी, एपीएस तक का बायोडाटा इन्हीं पदाधिकारी के पास जमा हो रहे हैं।
विचार धारा की होगी जांच
अब यह पदाधिकारी इस पद के इच्छुक व्यक्ति के पिछले कार्यकाल से लेकर अन्य जरूरी जांच पड़ताल अपने स्तर से करवाएंगे। खासकर ऐसे पद के इच्छुक व्यक्तियों की विचारधारा को अच्छी तरह से परखा जाएगा। इसके बाद ही मंत्रियों के साथ इन लोगों को जोड़ा जाएगा।
भाजपा कार्यालय में अब तक 500 से ज्यादा अधिकारी व कर्मचारी अपनी नियुक्ति के लिए आवेदन कर चुके हैं। आलम यह है कि मंत्रालय में मंत्रियों के साथ काम करने की इच्छा रखने वाले अधिकारी इन दिनों भाजपा में संघ का प्रतिनिधि करने वालों के साथ अपनी नजदीकियां बढ़ाने के रास्ते तलाश रहे हैं ताकि मंत्री महोदय का बाबू बना जा सके। संघ की इस निगरानी व्यवस्था की वजह से अभी तक ज्यादातर मंत्री बगैर स्टॉफ के ही काम कर रहे हैं।