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रिटायर होते ही 'बाबुओं' को छोड़ना होगा सरकारी घर

Wed, 12 Jun 2013 12:47 AM IST
नई दिल्ली/विजय गुप्ता
नई दिल्ली/विजय गुप्ता Updated Wed, 12 Jun 2013 12:47 AM IST
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after retirement officers have to leave government house

नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बावजूद लंबे समय तक सरकारी क्वार्टरों में जमे रहने वाले केंद्र सरकार के बाबुओं के लिए बुरी खबर है।

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राजधानी दिल्ली के सामान्य पूल से आवास पाए बाबुओं को रिटायर होने के बाद एक महीने तक ही आवास में रुकने की सुविधा मिलेगी। पहले यह सुविधा शिक्षा, बीमारी आदि कारणों के आधार पर छह महीने तक की थी।

यह बात अलग थी कि इन छह महीनों का लाभ उठाने के लिए उन्हें कारणों की सत्यता को साबित करने को प्रमाण पत्र भी मुहैया कराना पड़ता था। जो अब संशोधित नियम में एक महीने की सुविधा प्राप्त करने के लिए नहीं है।
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पहले सरकारी आवास सामान्य पूल दिल्ली के नियम 1963 के उपनियम 317 -बी-11 के तहत सरकारी बाबू या अधिकारी रिटायरमेंट के बाद पहले दो महीने तक आवास में सामान्य किराए पर और उसके बाद अगले दो महीने सामान्य किराए या लाइसेंस फीस के दो गुनी राशि देकर रह सकता था।
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सरकार ने इस उपनियम को एक बार फिर संशोधन किया था। नए नियम 317-बी-22 में किराया यानी लाइसेंस फीस की दर को बढ़ा दिया गया था।

नए उपनियम में अधिकारी को अवकाश प्राप्त करने या टर्मिनल लीव समाप्त होने के बाद पहले दो महीने लाइसेंस फीस के चार गुने और उसके अगले दो महीने में लाइसेंस फीस के छह गुनी राशि को चुकता करके वह सरकारी आवास में कानूनन रह सकता था।

परंतु हाल में हुए संशोधन के बाद अब बाबू अवकाश अथवा टर्मिनल लीव समाप्त होने के बाद केवल एक महीने ही आवास में रह सकेंगे। इस महीने के लिए भी उन्हें सामान्य लाइसेंस फीस की छह गुना राशि चुकानी पड़ेगी।


सूत्रों ने बताया कि दिल्ली में महंगे किराए को देखते हुए अवकाश ग्रहण करने के बाद भी अधिकारी लंबे समय तक विभिन्न कारणों के आधार पर आवास खाली ही नहीं करते हैं। जिसकी वजह से प्रतीक्षा सूची वाले अफसरों को सरकारी घर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।

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