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राजनाथ के बाद अब सुषमा के भी 'पर' कतरने की तैयारी

Tue, 02 Sep 2014 02:53 PM IST
Updated Tue, 02 Sep 2014 02:53 PM IST
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after rajnath singh modi government take charges from Foreign ministry.

मोदी सरकार में गृह मंत्री राजनाथ सिंह के ही नहीं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के भी पर कतरे जा रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री कार्यालय में जापान प्लस कमेटी स्थापित करने की घोषणा को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

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कमेटी स्थापित होते ही जापान से संबंधित मामलों में विदेश मंत्रालय की भूमिका करीब करीब खत्म हो जाएगी। इससे पहले भी विदेश नीति सलाहकार लाकर सुषमा के पर कतरने की कोशिश की गई थी, मगर विरोध के कारण यह कोशिश परवान नहीं चढ़ पाई थी।
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इसके अलावा ब्राजील में हुए ब्रिक्स सम्मेलन के बाद जापान के अहम दौरे से प्रधानमंत्री की सुषमा से बनाई गई दूरी को भी इसी रूप में देखा जा रहा है।

राजनाथ सिंह को नहीं मिली थी निजी सचिव

after rajnath singh modi government take charges from Foreign ministry.

इन दोनों ही मंत्रालयों के कबीना मंत्री की जगह राज्य मंत्रियों को ज्यादा अहमियत मिलने की भी चर्चा राजनीतिक गलियारे में जमकर हो रही है।

उल्लेखनीय है कि सरकार में नंबर दो का ओहदा रखने वाले गृह मंत्री राजनाथ सिंह को अपने पसंद का निजी सचिव रखने की अनुमति न देने के बाद प्रधानमंत्री ने नगा शांति वार्ता के लिए भी उनके द्वारा भेजे गए नाम को खारिज कर दिया था।

जापान दौरे पर गए प्रधानमंत्री की अपने कार्यालय में जापान प्लस कमेटी स्थापित करने की घोषणा से अटकलों का बाजार गर्म है। चूंकि जापान से जुड़े सभी मामले अब पीएमओ में स्थापित की जाने वाली यह कमेटी देखेगी, इसलिए इस निर्णय को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पर कतरने के रूप में देखा जा रहा है।

इससे पहले अमेरिका में भारत के राजदूत एस जयशंकर को विदेश नीति सलाहकार के रूप में लाने की कोशिश हो चुकी है।

राजनाथ को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा

after rajnath singh modi government take charges from Foreign ministry.

सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री कार्यालय में भी गृह और विदेश मंत्रालय के कबीना मंत्रियों की जगह राज्य मंत्रियों की पूछ ज्यादा है। वैसे भी पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय का बतौर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जिम्मा संभाल रहे जनरल वीके सिंह को विदेश मंत्रालय के राज्य मंत्री के अतिरिक्त प्रभार को इसी रूप में देखा जा रहा है।

दरअसल ऐसा पहले कभी नहीं हुआ जब स्वतंत्र प्रभार वाला मंत्री किसी अन्य मंत्रालय में बतौर राज्य मंत्री भी मौजूद हो। सरकार के स्तर पर चल रही उठापटक के बीच विदेश मंत्री को हरियाणा का मुख्यमंत्री बनाए जाने और गृह मंत्री को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा को भी इसी रूप में देखा जा रहा है।

जूनियर-सीनियर का भी खेल

सरकार में कबीना मंत्रियों के पर कतरने के साथ ही कबीना मंत्री द्वारा अपने राज्य मंत्री के भी पर कतरने की चर्चा है। वी के सिंह की तरह स्वतंत्र प्रभार के साथ-साथ राज्य मंत्री का भी जिम्मा संभालने वाली निर्मला सीतारमण इसी खेल के कारण अंतिम समय में म्यांमार नहीं जा पाईं।

यहां उन्हें सेवा और निवेश से संबंधित आसियान-भारत समझौता करने जाना था। चूंकि उन्हें इसी बीच महत्वाकांक्षी परियोजना जन धन योजना में लगा दिया गया, इसलिए अंतिम समय में उन्हें अपना म्यांमार दौरा रद्द करना पड़ा।

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