भारत-पाक: NSA के बाद एक और बातचीत पर ग्रहण!
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भारत और पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (एनएसए) की बातचीत रद्द होने के बाद डीजी बीएसएफ-पाक रेंजर्स और डीजीएमओ की मुलाकात पर भी ग्रहण नजर आने लगा है।
हालांकि दोनों देशों के डीजी बीएसएफ-पाक रेंजर्स की मुलाकात की तारीख 6 सितंबर तय हो चुकी है। उफा कार्यक्रम के मुताबिक, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और पाकिस्तान की सीमा पर निगरानी रखने वाली फोर्स पाक रेंजर्स के महानिदेशकों को अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर शांति कायम रखने के एजेंडे पर बातचीत करनी है।
उफा में यह भी तय हुआ था कि एनएसए की बातचीत के बाद भारत और पाकिस्तानी सेना के मिलिट्री ऑपरेशन के महानिदेशकों (डीजीएमओ) की नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर सीजफायर उल्लंघन के एजेंडे पर बातचीत होगी।
पाकिस्तान की मंशा पर खड़े किए सवाल
हालांकि पाकिस्तान ने भारत की ओर से प्रस्तावित डीजीएमओ की तारीख पर अपनी हामी नहीं भरी है। एसएसए
बातचीत पर पाकिस्तान के पीछे हटने के फैसले से कुछ घंटे पहले शनिवार को
बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इन दोनों
मुलाकातों पर भी सवाल खड़े किए थे।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पहले से ही
एनएसए सहित इन दोनों मुलाकातों को भी खटाई में डालने का मन बना चुका है।
यही वजह है कि पाकिस्तान ने सबसे पहले डीजी बीएसएफ-पाक रेंजर्स की मुलाकात
की भारत की पहल को ठुकराते हुए इसकी तारीख 6 सितंबर रखी।
सुषमा ने
पाकिस्तान की मंशा पर शक जाहिर करते हुए कहा कि पाकिस्तान कश्मीर के बिना
बातचीत नहीं करने का मन पहले ही बना चुका था और डीजी स्तर की बातचीत में
कश्मीर की गुंजाइश नहीं थी।
न ही वह गुंजाइश डीजीएमओ मुलाकात में बनेगी।
सुषमा के मुताबिक उफा के बाद पाकिस्तान पर कश्मीर के बिना बातचीत में शामिल
नहीं होने का घरेलू दबाव पड़ा।
इसलिए सरताज अजीत एनएसए स्तर की बातचीत की
तारीख पहले तय कर उसे खटाई में डालने की स्क्रिप्ट लिख चुके थे ताकि इसी
बहाने बाकी दो बातें भी फिलहाल टल जाएं।