क्या NCP भी देगी कांग्रेस को झटका?
लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस चौतरफा मुश्किलों से घिरती जा रही है। एक ओर पार्टी के भीतर से बगावत सुर उभरने लगे हैं, वहीं दूसरी ओर सहयोगी भी कांग्रेस से पल्ला झाड़ने के फिराक में हैं।
जम्मू कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेस से गठबंधन टूटने के बाद महाराष्ट्र में भी संकट के बादल छाए हुए हैं।
महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री नारायण राणे के इस्तीफे के बाद सहयोगी दल एनसीपी ने भी कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सीटों को लेकर चल रही खींचतान के कारण एनसीपी और कांग्रेस के बीच तल्खी बढ़ती जा रही है।
सीट को लेकर चल रही खींचतान
एनसीपी के वरिष्ठ नेता मजीद मेमन ने कांग्रेस को चेताते हुए कहा कि कांग्रेस अपना अहंकार छोड़े वरना भविष्य को लेकर कुछ नहीं कहा जा सकता है।
मजीद ने कांग्रेस को याद दिलाते हुए कहा कि कांग्रेस न भूले की एनसीपी सबसे वफादार सहयोगी रहा है और पार्टी इसकी इज्जत करनी चाहिए। कांग्रेस को एनसीपी की मांगों पर ध्यान देना चाहिए।
144 सीटों की मांग है एनसीपी की
महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों को देखते हुए एनसीपी ने कांग्रेस से मांग की है कि उसे 288 में से 144 सीट दी जाए, जबकि कांग्रेस इस पर राजी नहीं है।
2009 विधानसभा चुनावों में 114 सीटों पर एनसीपी ने चुनाव लड़ा था, जिसमें से 62 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
वहीं, कांग्रेस-एनसीपी के बीच चल रही खींचतान पर शिवसेना ने चुटकी ली है। शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने कहा है कि 'जहाज डूबने लगा है तो चूहे भागने लगे हैं।'