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हार के बाद राहुल ने बनाया ये खास प्लान

Sun, 25 May 2014 01:14 AM IST
Updated Sun, 25 May 2014 01:14 AM IST
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After massive defeat rahul gandhi want young leader in congress party

हाल के लोकसभा चुनाव में अब तक के सबसे खराब प्रदर्शन के बाद कांग्रेस पार्टी नेतृत्व हरकत में आ गया है। नेतृत्व अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) में बड़े फेरबदल की तैयारी में जुट गया है।

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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने संकेत दे दिया है फेरबदल में ‘यूथ एजेंडा’ आगे रहेगा यानी युवाओं को तरजीह देकर आगे लाया जाएगा, जबकि बुजुर्ग नेताओं की भूमिका सलाहकार की होगी।
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16 मई को लोकसभा चुनाव नतीजों की घोषणा के बाद से ही राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, राज्यों के पार्टी नेतृत्व, मुख्यमंत्रियों और उन नेताओं से बातचीत कर रहे हैं जो यह लोकसभा चुनाव लड़े या चुनाव में नजदीकी से जुड़े रहे।

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अब स‌िर्फ सलाह देंगे बुज‌ुर्ग नेता

After massive defeat rahul gandhi want young leader in congress party

यह अब बिल्कुल साफ है कि निकट भविष्य में पार्टी में बड़ा फेरबदल तय है, इसके लिए कवायद शुरू हो चुकी है। हाई कमान पार्टी के विभिन्न स्तरों से इसके लिए इनपुट मांग रहा है।

लेकिन अपना रास्ता बदलकर पार्टी चेहरा नहीं बदलेगी, केंद्र व राज्यों में युवाओं को और मौका देकर पार्टी को नया आकार दिया जाएगा। इस मुद्दे पर बुजुर्ग नेताओं की सलाह अवश्य ली जाएगी।

एआईसीसी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अब समय आ गया है जब पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए नई टीम और नेतृत्व देना होगा, पुराने नेतृत्व में बदलाव करना होगा।

मुख्य‌मंत्रियों पर फैसला सुरक्ष‌ित

After massive defeat rahul gandhi want young leader in congress party

यह भी पता चला है कि जल्द ही कांग्रेस विभिन्न राज्यों में केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करेगी, ये राज्यों में कांग्रेस कैडर का मूड देखेंगे और कांग्रेस सरकार के प्रदर्शन पर उनकी राय जानेंगे।

इनमें वे राज्य भी शामिल होंगे जहां कांग्रेस शासन है। यह संभवत: विभिन्न राज्यों में पार्टी नेतृत्व में बदलाव की दिशा में उठाया जाने वाला पहला कदम होगा।

इस संबंध में हाई कमान जल्द ही पहला केंद्रीय पर्यवेक्षक असम भेजेगा, जो मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की कार्य शैली के खिलाफ विद्रोह और वहां नए नेतृत्व की आवश्यकता का आकलन करेगा।

‘जनता दरबार’ शुरू कर सकते हैं राहुल

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राहुल दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में ‘जनता दरबार’ शुरू कर सकते है, इसका मकसद लोगों तक पहुंच बढ़ाना और आकलन करना होगा।

जब राहुल लोगों से संपर्क कार्यक्रम के लिए राज्यों में जाएंगे तो वहां के मुख्यमंत्री की अपेक्षा राज्य के पार्टी अध्यक्ष और स्थानीय नेताओं के साथ ज्यादा दौरा करेंगे।

राहुल गांधी को विपक्ष का नेता बनाए जाने की कोशिश के अलावा ‘राहुल ब्रिगेड’ उन वरिष्ठ पार्टी नेताओं पर कड़ा रुख अख्तियार करती जा रही है जो अपने ही गढ़ में अच्छा चुनाव नतीजा देने में विफल रहे।

राहुल की गैरमौजूदगी भी बनी सवाल

After massive defeat rahul gandhi want young leader in congress party

लोकसभा चुनाव में बड़ी संख्या में कैबिनेट मंत्री और बुजुर्ग नेता अपने-अपने गढ़ में ही बुरी तरह हारे हैं।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है, ‘प्रिया दत्त और मिलिंद देवड़ा जैसे नेता राहुल गांधी के कम उपलब्ध होने की बात कहते रहे हैं और आरोप लगाते रहे हैं कि कुछ लोग उनके आसपास ऐसे हैं जो पार्टी उपाध्यक्ष से मिलने नहीं देते हैं। यह ठोस मुद्दा हो सकता है।

लेकिन उनकी अपने ही गढ़ में बुरा प्रदर्शन करने पर क्या सफाई हो सकती है? वहां उनका अपना क्षेत्र, अपने कैडर, पार्टी कार्यकर्ता और संसाधन थे। तब ऐसा गलत क्या हुआ। किसी एक को खराब प्रदर्शन के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

अंब‌िका सोनी पर ग‌िर सकती है गाज

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राज्यों खासकर हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और आंध्र प्रदेश के नेतृत्व को भी यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर उनके राज्य में पार्टी ने इतना खराब प्रदर्शन क्यों किया।’

कांग्रेस महासचिव अंबिका सोनी पंजाब के आनंदपुर साहिब सीट से करारी हार और खराब प्रदर्शन को लेकर हाई कमान के निशाने पर हैं, क्योंकि सीधे तौर पर राज्य का प्रभार उनके पास ही था।

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