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दो मंत्रियों की विदाई के बाद भाजपा ने पीएम को घेरा
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Sat, 11 May 2013 12:21 AM IST
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एक घंटे के अंदर दो मंत्रियों के इस्तीफे के बाद भाजपा ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को खुद को भी नैतिकता की कसौटी पर कसने की नसीहत दी है।
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पार्टी ने दोनों मंत्रियों के इस्तीफे को देर से लिया गया सही फैसला करार देते हुए कहा है कि अब प्रधानमंत्री को भी नैतिकता के आधार पर अपने बारे में निर्णय करने का साहस दिखाना चाहिए।
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इसके साथ ही पार्टी ने बजट सत्र में संसद की कार्यवाही ठप होने के लिए भी सरकार और कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि अगर यह फैसला पहले ले लिया गया होता तो संसद का कीमती समय बर्बाद नहीं होता।
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पार्टी प्रवक्ता कैप्टन अभिमन्यु ने रेल मंत्री पवन कुमार बंसल और कानून मंत्री अश्विनी कुमार के इस्तीफे का स्वागत किया है।
उन्होंने को कहा कि इन दोनों ही मंत्रियों के खिलाफ अकाट्य सबूत थे। इसलिए सरकार को बहुत पहले ही इन्हें मंत्रिमंडल से बाहर कर देना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि दरअसल सरकार ने अंत समय तक दोनों मंत्रियों को बचाने की कोशिश की, लेकिन अंत में सरकार को वही फैसला करना पड़ा, जिसकी मांग भाजपा काफी समय से करती आ रही थी।
भाजपा ने दोनों मंत्रियों के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री को भी घेरना शुरू कर दिया है। अभिमन्यु ने कहा कि जहां तक कोलगेट मामले की बात है तो पीएम अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट में छेड़छाड़ मामले में शीर्ष अदालत ने पीएम कार्यालय के प्रति भी नाराजगी जताई है। कोल ब्लॉक आवंटन में घपले के दौरान स्वयं प्रधानमंत्री कोयला मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे थे।
ऐसे में कानून मंत्री के खिलाफ कार्रवाई के बाद अब पीएम को चाहिए कि वह खुद को नैतिकता के तराजू पर तौलें और इसी आधार पर अपने बारे में भी निर्णय लेने का साहस दिखाएं।
पार्टी प्रवक्ता ने हंगामे की वजह से बजट सत्र के दूसरे चरण के व्यर्थ जाने के लिए भी कांग्रेस और सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अगर यही फैसला सत्र के दौरान हो गया होता तो संसद का कीमती वक्त जाया नहीं होता।
उन्होंने इस दौरान 2जी मामले में जेपीसी गठित करने में हुई देरी का हवाला देते हुए कहा कि पहले भी फैसलों में देरी के कारण संसद का समय जाया हुआ है।