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केंद्र के एजेंडे में फिर ऊपर आया एनसीटीसी

Fri, 22 Feb 2013 08:08 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 22 Feb 2013 08:08 PM IST
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after hyderabad blast nctc came up center agenda

ठंडे बस्ते में चली गई आतंकवाद रोधी केंद्र यानी एनसीटीसी बनाने की योजना हैदराबाद बम धमाकों के बाद एक बार फिर केंद्र सरकार के प्रमुख एजेंडे में आ गई है।

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शुक्रवार को गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने एनसीटीसी को लेकर खुलकर विपक्ष से सहयोग मांगते हुए इस मसले पर बैठक कर चर्चा करने की बात कही। साथ ही इसका विरोध करने वाले दलों को उन्होंने कठघरे में खड़ा करने की कोशिश भी की।
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शिंदे ने तो संकेत भी दिया कि वह इस मसले पर विपक्ष शासित राज्यों के ऐतराज को दूर करने के लिए भी तैयार हैं। खास बात यह रही कि शिंदे की अपील के दौरान एनसीटीसी का प्रमुख तौर पर विरोध करने वाले सियासी दलों ने चुप्पी साध ली।
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एनसीटीसी पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम का ड्रीम प्रोजेक्ट था। आतंकी वारदातों पर लगाम कसने के लिए उन्होंने केंद्र और राज्य के बीच खुफिया सूचनाओं के समन्वय के लिए एनसीटीसी गठित करने का प्रस्ताव रखा था। मगर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार, तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इसका खुलकर विरोध किया था।
वहीं चिदंबरम के वित्त मंत्रालय में जाने के बाद माना जा रहा था कि एनसीटीसी का मुद्दा भी ठंडे बस्ते में चला गया है। मगर बृहस्पतिवार को हैदराबाद धमाके के बाद एनसीटीसी गठित करने को लेकर सरकार ने एक बार फिर गंभीरता दिखाई है।

शुक्रवार को राज्यसभा में शिंदे ने कहा कि केंद्र आतंकवादी घटनाओं पर लगाम कसने के लिए एनसीटीसी का गठन करना चाहता है। मगर कई राज्य सरकारें इसके विरोध में हैं। अगर राज्य सरकारों को कुछ ऐतराज है। तो उसे दूर किया जाएगा। सरकार दुबारा इस योजना को लेकर विचार विमर्श की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।

गृह मंत्री ने कहा कि पिछले कई सालों से आतंकवादी वारदातें कम हो रही हैं। 2008 में 10, 2010 में पांच, 2011 में 4 और 2012 में दो बार आतंकी घटनाएं देश में हुई हैं। शिंदे ने कहा कि मल्टी एजेंसी कॉर्डीनेशन, नेशनल इंटेलीजेंस ग्रिड और एनआईए बनने के बाद आतंकवादी घटनाओं में कमी हुई है। इसमें रोज सुबह शाम बैठकें होती है। खुफिया सूचनाओं का आदान प्रदान होता है।


उन्होंने कहा कि अजमल कसाब और अफजल गुरू की फांसी के बाद देशभर में कई बार अलर्ट भेजे गए थे। उन्होंने आतंकवाद का मुकाबला दृढ़ता से करने की बात कही तो साथ ही इस मुद्दे पर राजनीतिकरण नहीं करने की अपील भी की। उन्होंने सभी दलों से सहयोग करने की बात के लिए शुक्रिया अदा भी किया।

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