महाराष्ट्र में शिवसेना दे सकती है भाजपा को बड़ा झटका!
जिस तरह से भाजपा ने हरियाणा में हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) को गठबंधन तोड़ने पर मजबूर किया, क्या कुछ वैसा ही वह महाराष्ट्र में कर सकती है।
अंदरखाने से आ रही खबरों से तो ऐसा नहीं लगता, पर शिवसेना को यह डर है कि भाजपा ने जो बर्ताव हजकां के साथ किया है, वही शिवसेना के साथ भी कर सकती है।
इस आशंका को भांपते हुए शिवसेना के कुछ नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को सलाह दी है कि वह भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर सतर्क रहें।
शिवसेना महाराष्ट्र में भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी है। अब तक भाजपा हमेशा शिवसेना के साथ छोटे भाई की भूमिका में रही है लेकिन केंद्र में स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद भाजपा के तेवर बदल गए हैं।
सूत्रों के अनुसार भाजपा महाराष्ट्र में चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद और उससे पहले 288 विधानसभा सीटों में से आधी हिस्सेदारी चाहती है, जबकि शिवसेना पुराने फॉर्मूले पर ही आगे बढ़ना चाहती है।
सेना के शाह से रिश्ते तनावपूर्ण
हरियाणा में मुख्यमंत्री पद और सीट बंटवारे को लेकर ही हजकां और भाजपा में अनबन हुई और उसके बाद हजकां ने भाजपा से नाता तोड़ लिया है। महाराष्ट्र में भी इसी मुद्दे पर भाजपा-शिवसेना के रिश्ते तनावपूर्ण हैं।
दूसरी तरफ आरपीआई समेत अन्य घटक दलों ने भी ज्यादा सीट की मांग कर दबाव बढ़ा दिया है। इससे भी शिवसेना की परेशानी बढ़ गई है।
शिवसेना हालांकि भाजपा से अलग होने की हिमाकत नहीं कर सकती, लेकिन यदि भाजपा नए फार्मूले पर अडिग रहती है तो शिवसेना की परेशानी जरूर बढ़ जाएगी। यही वजह है कि शिवसेना के नेता भाजपा से सिर्फ सतर्क रहने की ही सलाह दे रहे है।
नए नेतृत्व से असहज शिवसेना
दिवंगत शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे का भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से, तो उद्धव ठाकरे का आडवाणी समेत पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह से अच्छा तालमेल रहा है। पर, भाजपा के नए अध्यक्ष अमित शाह से शिवसेना के संबंध उतने मधुर नहीं है, इसलिए शिवसेना असहज स्थिति में है।