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यूपी: बवाल की FIR पर उबाल, आंदोलन का ऐलान

Tue, 30 Jun 2015 08:02 AM IST
Updated Tue, 30 Jun 2015 08:02 AM IST
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After FIR controversy rises, big movement announced.

सहारनपुर के रामपुर मनिहारान में छेड़छाड़ के बाद शनिवार रात हुए सांप्रदायिक बवाल में वसीम की मौत के बाद दर्ज एफआईआर में नगर पंचायत चेयरमैन प्रतिनिधि को नामजद करने पर अब गुर्जर समाज में उबाल है।

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सोमवार को गुर्जर समाज और भारतीय किसान यूनियन ने अलग-अलग पंचायत कर चेयरमैन प्रतिनिधि का खुला समर्थन किया। पंचायत में साफ किया गया कि अगर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो सड़क पर आंदोलन किया जाएगा।
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उधर, काजी नदीम अख्तर के आवास पर बैठक कर पूर्व विधायक इमरान मसूद ने पुलिस और प्रशासन को चेताया है। उन्होंने कहा कि वसीम की हत्या पुलिस की गोली से हुई है। इन पंचायतों के बाद पुलिस-प्रशासन भी बेहद अलर्ट हो गया है।
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दरअसल, बवाल में शनिवार रात वसीम पुत्र अख्तर की मौत के बाद रविवार के दर्ज एफआईआर में कोतवाली प्रभारी के साथ चेयरमैन प्रतिनिधि प्रदीप चौधरी को नामजद करते हुए मुकदमा दर्ज कराया गया।

इस मामले में गलत नामजदगी को लेकर गुर्जर समाज की पंचायत मोहल्ला गंगाराम में चौधरी भूपेंद्र सिंह के आवास पर हुई। इसमें वक्ताओं ने कहा कि यह एक सोची-समझी साजिश के तहत प्रदीप चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। यह पूरे समाज को बदनाम करने की साजिश भी है। जिस वक्त वहां बवाल हो रहा था, उस समय चेयरमैन प्रतिनिधि झगड़ा शांत कराने में जुटे थे।

पंचायत में कहा गया है कि यदि प्रदीप चौधरी का मुकदमे से नाम वापस नहीं लिया गया तो वह सड़कों पर उतर आएंगे। वहां मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने सपा नेताओं के दबाव में प्रदीप चौधरी का नाम राजनीति प्रतिद्वंद्वता को लेकर मुकदमे में दर्ज किया है।

समाज के लोगों ने कहा कि यदि कोई सभ्य व्यक्ति किसी भी विवाद का  फैसला कराता है और फिर उसके खिलाफ इस तरह कार्रवाई हुई तो भविष्य में कोई व्यक्ति फैसलों में आगे नहीं आएगा। पंचायत में नाजिम, मंसूर, दुष्यंत कुमार  मुन्ना, साहब सिंह, मा. ओमपाल आदि सहित समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

किसानों ने भी आंदोलन की चेतावनी

After FIR controversy rises, big movement announced.

प्रदीप चौधरी की नामजदगी के बाद सोमवार को मुहल्ला शिवपुरी में आयोजित किसानों की पंचायत में चौधरी जगपाल ने कहा कि नगर पंचायत चेयरमैन पति को वसीम हत्याकांड में राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया है। इसे किसान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे।

उन्होंने कहा कि बवाल कराने वाले पुलिस के सामने थे, जिस समय बवाल हुआ वहां प्रदीप चौधरी नहीं थे। पुलिस का इस बात की पूरी जानकारी है। इसके बाद भी प्रदीप चौधरी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।

उन्होंने कहा कि चौधरी परिवार को नगर व देहात की सर्व समाज की जनता जानती है थी कि यह परिवार हमेशा से अमन पसंद है। उन्होंने सदा लोगों के फैसले व विवाद निपटाने का काम किया है।

पंचायत में किसानों ने पुलिस-प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि घटना की निष्पक्ष जांच कर प्रदीप चौधरी का नाम मुकदमे से वापस लिया जाए, अन्यथा क्षेत्र का किसान आंदोलन का मजबूर होगा। पंचायत में तीर्थपाल, रणवीर, रोशन लाल, केहर सिंह, कान सिंह, सुरेंद्र सिंह, कलम सिंह, अशोक चौहान आदि रहे।

'नहीं बर्दाश्त होगी पुलिस की मनमानी'

After FIR controversy rises, big movement announced.

पूर्व विधायक इमरान मसूद ने कहा सपा नेताओं ने मृतक वसीम परिवार को बरगलाकर जो रिपोर्ट दर्ज कराई है, उसमें पुलिस ने खुद को बचाने की बड़ी साजिश में है।

शहर काजी नदीम के आवास पर आयोजित मुस्लिम समुदाय के लोगों की बैठक में इमरान मसूद ने कहा कि कस्बे में पुलिस और मुस्लिम समुदाय के बीच बवाल हुआ है, इसका सांप्रदायिक दंगे से कोई मतलब नहीं है। सपा नेता इसे सांप्रदायिक दंगे का रूप देना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि अब सच्चाई सामने आने लगी है। सपा नेताओं ने मृतक वसीम के परिवार को बरगलाकर निर्दोष लोगों के खिलाफ एक सोची समझी साजिश के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई है। वसीम की हत्या पुलिस की गोली से हुई है।

उन्होंने कोतवाली प्रभारी और सपा नेताओं के गठजोड़ का आरोप लगाया और कहा कि तहरीर इस प्रकार से लिखाई है कि पुलिस इस हत्याकांड में साफ बच जाए। झगड़े के बाद सपा नेताओं ने लोगों को भड़काया। छेड़खानी का मामला अलग है, मगर पुलिस ने दोनों घटनाओं को जोड़कर सांप्रदायिक रुप दे दिया। इस कांड में मुख्य रूप से पुलिस दोषी है।

बैठक में निर्णय लिया गया कि 30 जून को कस्बे में हिंदू-मुस्लिम के गणमान्य लोगों को एक साथ बैठाकर एकता भाईचारा बनाने के बात की जाएगी और पुलिस की मनमानी को बेनकाब किया जाएगा। बैठक में मुकेश चौधरी, आबिद हसन, अनवर अहमद, जहीर अहमद, हाजी जान मुहम्मद,शफीक अहमद, खलील अहमद, फरहान, नौशाद कुरैशी, हाजी फुरकान आदि रहे।

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