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आपातकाल के बाद संविधान में हुए ये बदलाव

Thu, 25 Jun 2015 09:42 AM IST
Updated Thu, 25 Jun 2015 09:42 AM IST
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संविधान का (39वां संशोधन) अधिनियम, 1975

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राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव को न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर करने के लिए 1975 में 39 संविधान संशोधन किया गया।

इसके अधिनियम को पूर्वप्रभावी बनाया गया यानी इस संशोधन से राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव के खिलाफ लंबित मामलों को भी समाप्त करने की व्यवस्था की गई।
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इस संशोधन के जरिए सरकार द्वारा लागू मीसा समेत 47 विवादित कानूनों पर मंजूरी मिल गई। इसका मकसद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ चल रहे चुनाव से संबंधित विवादित मामलों को खत्म करना था।
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1976
अभिव्यक्ति एवं बोलने की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाने के लिए भारतीय संसद में 1976 में द प्रिवेंशन ऑफ पब्लिकेशन ऑफ ऑब्जेक्सनेबल मैटर एक्ट पारित किया गया। इसके तहत हिंसा या तोड़फोड़ या गंभीर अपराधों को उकसाने जैसे आपत्तिजनक मामले प्रकाशित करने पर मीडिया को दंडित करने का प्रावधान किया गया।

हालांकि इस अधिनियम को आपातकाल के बाद समाप्त कर दिया गया। आपातकाल के चलते संसद ने ‘द हाउस ऑफ पीपुल्स (एक्सटेंसन ऑफ ड्यूरेशन) एक्ट, 1976’ के तहत लोक सभा का कार्यकाल दो वर्ष के लिए बढ़ा दिया।

संविधान (42वां संशोधन) अधिनियम, 1976

after emergency

इस संविधान संशोधन के तहत संविधान के अनुच्छेद 13 में संशोधन किया गया। इसके तहत मौलिक अधिकारों के खिलाफ राज्य के कानून को मजबूत किया गया।

साथ ही राष्ट्र विरोधी गतिविधियों और राष्ट्र विरोधी संगठनों को रोकने वाले कानूनों को सुरक्षित किया गया। इसके अलावा संशोधन करके हाईकोर्ट के याचिका सुनने के क्षेत्राधिकार को कम किया गया। साथ ही केंद्र सरकार के कानूनों को रद्द करने के लिए संविधान पीठ की दो तिहाई बहुमत की अनिवार्यता का प्रावधान किया गया।

प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव के खिलाफ सुनवाई करने के अधिकार को समाप्त करने को 1977 में विवादित चुनाव (प्रधानमंत्री एवं लोकसभा अध्यक्ष) अधिनियम पारित किया गया।

हालांकि इस अधिनियम के तहत लोक सभा की ओर से याचिका प्रस्तुत करके पर ही सुनवाई का अधिकार दिया गया। खास बात यह है कि इस पर विधि आयोग ने 2014 में विधि मंत्रालय को अपनी चौथी आंतरिक रिपोर्ट सौंपी। इसमें आयोग ने इस कानून को समाप्त करने की सिफारिश की।

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