मोदी के आते ही इस संगठन की लगी लॉटरी
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आम चुनाव के नतीजे आते ही राजधानी के चाणक्यपुरी स्थित संस्था विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन (वीआईएफ) अचानक चर्चा में है।
संघ की विचारधारा के निकट माने जाने वाला यह थिंक टैंक तब से अचानक चर्चा में है जब से इसके मुखिया और आईबी के पूर्व निदेशक अजीत डोभाल को मोदी सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाया गया है।
इसके तत्काल बाद इसी संस्था से जुड़े नृपेंद्र मिश्र पीएम नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव बना दिए गए।
संघ का करीबी रहा है संगठन
माना जा रहा है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रति सौहार्दपूर्ण रिश्ते रखने वाले संस्था के न केवल कई अन्य सदस्यों की नई सरकार में लॉटरी लग सकती है, बल्कि नई सरकार की विदेश, सामरिक, आंतरिक और आर्थिक नीतियों में संस्था के विचार को काफी अहमियत भी मिल सकती है।
उल्लेखनीय है कि 2009 में स्थापित यह संस्था यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में उसकी करीब करीब हर नीतियों की मुखर आलोचक रही है। संस्था के सदस्य मीडिया के साथ-साथ अन्य माध्यमों से पूर्ववर्ती यूपीए सरकार पर हमला बोलते रहे हैं।
हालांकि संस्था संघ से अपनी नजदीकी को स्वीकार नहीं करती, मगर इसके सलाहकार मंडल में न केवल संघ के विचारक एस गुरुमूर्ति शामिल हैं, बल्कि कई ऐसे नौकरशाह भी हैं जो राजग सरकार के कार्यकाल के दौरान बतौर गवर्नर उपकृत किए गए।
राज्यपाल बना सकती है मोदी सरकार
तो बीएसएफ के पूर्व महानिदेशक प्रकाश सिंह, पूर्व गृह सचिव अनिल बैजल, पूर्व राजदूत टीसीए रंगाचारी, पूर्व एयर मार्शल एसजी इनामदार, पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल, पूर्व राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा, रॉ के पूर्व सचिव एके वर्मा के लिए सरकार में नई जगहों की खोज की जा रही है।
चर्चा है कि इनमें से कई लोगों का नाम नए राज्यपाल के तौर पर विचाराधीन है। चूंकि संस्था के कई दिग्गजों को नई सरकार में जगह मिलनी तय है, इसलिए संस्था का महत्व बनाए रखने के लिए इसमें जल्द ही कुछ और दिग्गज पूर्व नौकरशाहों को शामिल किया जा सकता है।
फिलहाल तैयारी डोभाल की जगह संस्था की कमान पूर्व सेना प्रमुख एनसी विज को देने और नई टीम गठित करने की है। नई टीम के सदस्यों के विचार को जाहिर तौर पर प्रमुख मुद्दों पर नीति और रणनीति तय करते समय अहमियत दी जाएगी।
यूपीए सरकार की मुखर विरोधी रही है संस्था
दरअसल इस संस्था से जुड़े पूर्व दिग्गज नौकरशाहों ने बीते पांच साल तक यूपीए सरकार की हर नीतियों को जमकर विरोध किया।
इस दौरान कई मुद्दों और विवादों पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने संस्था से जुड़े पूर्व नौकरशाहों से सलाह लेने से न तो गुरेज किया, बल्कि संस्था के कई कार्यक्रमों में शिरकत भी की।
यूपीए सरकार के दौरान संस्था से जुड़े दिग्गज नौकरशाह न केवल सरकार पर हमलावर दिखे, बल्कि जिन मुद्दों पर भाजपा घिरी दिखी, उन मुद्दों पर पार्टी का बचाव करने से भी परहेज नहीं किया।
अमेरिकी थिंक टैंक की तरह काम करेगा
संस्था के एक शीर्ष अधिकारी का कहना था कि नई सरकार की कार्यशैली अमेरिका की तर्ज पर थिंक टैंक से सलाह के आधार पर नीति, रणनीति तय करने की दिखती है।
बीते दिनों खुद पीएम ने नीतियां तय करने के लिए विशेषज्ञों और थिंक टैंक की सार्वजनिक रूप से सलाह मांगी थी।
अब जबकि यह संस्था अरसे से विदेश, सामरिक, इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, कूटनीति, पड़ोसी देशों से संबंध और आर्थिक पक्ष का अध्ययन कर रही है और अध्ययन करने वाले लोग अपने अपने क्षेत्र के अनुभवी और दिग्गज हैं। ऐसे में संस्था के विचारों को नई सरकार की नीतियों में जगह मिलनी तय है।