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अफजल के बाद इनको भी है फांसी का इंतजार

Sat, 09 Feb 2013 06:26 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Sat, 09 Feb 2013 06:26 PM IST
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after afzal guru accused who are still waiting for execution

भारत की संप्रभुत्ता को चुनौती देने वाले और संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को आखिरकार फांसी दे दी गई। इससे पहले नवंबर 2012 में मुंबई हमले के दोषी अजमल कसाब को फांसी दी गई थी। इन दोनों के बाद फांसी की सजा पा चुके अन्य अपराधियों की फांसी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। भारत में अभी ऐसे कई अपराधी हैं, जिन्हें फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है।

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लाल किले पर हमले का दोषी अशफाक
लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने 22 दिसंबर 2000 को लालकिले पर हमला किया था। इस मामले में अशफाक उर्फ आरिफ को गिरफ्तार किया गया। दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने 31 अक्टूबर 2005 को अशफाक को फांसी की सजा सुनाई। फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। हाई कोर्ट ने 13 सितंबर 2007 को अशफाक की सजा बरकरार रखी। फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने 10 अगस्त 2011 को अशफाक की फांसी की सजा को बरकरार रखा।
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अपने ही परिवार के लोगों के हत्यारे
वर्ष 2007 में संपत्ति के लिए अपने ही परिवार के 8 लोगों को मौत के घाट उतारने के मामले में सोनिया और संजीव को सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई। दोनों ने गृह मंत्रालय के पास अपनी दया याचिका भेजी, जिसे मंत्रालय ने खारिज कर दिया।
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राजीव गांधी की हत्या के दोषी
राजीव गांधी की हत्या के मामले में दोषी लिट्टे के आतंकी मुरूगन, संथान और पेरारिवलन को 1998 में फांसी की सजा सुनाई गई थी। इन्हें पिछले साल 9 सितंबर 2011 को फांसी दी जानी थी, लेकिन इन्होंने हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा कि इनकी दया याचिका के निपटारे में 11 साल लगे हैं और ऐसे में इन्हें फांसी की सजा दिया जाना सही नहीं होगा। 11 अगस्त 2011 को राष्ट्रपति ने इनकी दया याचिका खारिज कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट में अभी इस मामले की सुनवाई चल रही है।

रायसीना पर बम ब्लास्ट के आरोपी

दिल्ली के रायसीना रोड स्थित यूथ कांग्रेस के दफ्तर के बाहर आतंकवादियों ने 11 सितंबर 1993 को एक कार में बम धमाका किया। इसमें 9 लोगों की मौत हुई और 35 घायल हुए। इस मामले में दोषी देविंदर पाल सिंह भुल्लर को पटियाला हाउस कोर्ट स्थित टाडा कोर्ट ने 25 अगस्त 2001 को फांसी की सजा सुनाई। सुप्रीम कोर्ट ने भी भुल्लर की फांसी की सजा को बरकरार रखा। राष्ट्रपति ने भी मई 2011 में भुल्लर की दया याचिका खारिज कर दी। इसके बाद भुल्लर के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर फांसी की सजा कम किए जाने की गुहार लगाई, जो अभी पेंडिंग है।


पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह का हत्यारा राजोआना
31 अगस्त, 1995 को बेअंत सिंह जब चंडीगढ़ में सचिवालय स्थित अपने दफ्तर से बाहर निकले तो आत्मघाती हमलावर दिलावर सिंह के हमले में उनका निधन हो गया। उस हमले में और 17 मारे गए थे। दिलावर के विफल होने की स्थिति में राजोआना दूसरे मानव बम के तौर पर हमले के लिए तैयार था। पुलिस ने राजोआना और जगतार सिंह हवारा समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया। चंडीगढ़ की विशेष सीबीआई अदालत ने राजोआना और जगतार सिंह हवारा को एक अगस्त 2007 को फांसी की सजा सुनाई। राजोआना ने न तो फैसले के खिलाफ अपील की और न ही कोई दया याचिका दाखिल की। हवारा को सुनाई गई मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया गया था। उसने फैसले के खिलाफ अपील की थी।

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