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32 साल बाद वायुसेना को मिला पहला तेजस

Sun, 18 Jan 2015 11:06 AM IST
Updated Sun, 18 Jan 2015 11:06 AM IST
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after 32 years tejas join indian air force

वायुसेना में स्वदेश निर्मित लड़ाकू विमान शामिल करने का 32 साल पहले देखा गया सपना आखिरकार शनिवार को पूरा हुआ। रक्षा मंत्री  मनोहर परिकर ने वायुसेना को 4.5वीं पीढ़ी का पहला हल्का लड़ाकू विमान तेजस सौंप दिया।

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इस विमान का डिजाइन तैयार करने और विकास करने के दौरान एचएएल ने 15 विमानों का निर्माण किया। विभिन्न परिस्थितियों में विमान को परखने के लिए 2800 से अधिक बार इसका परीक्षण भी किया गया।
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पुराने हो चुके मिग-21 विमानों की जगह लेने वाले तेजस विमान को इस साल के अंत तक अंतिम ऑपरेशनल क्लियरेंस मिलने की उम्मीद है। वर्ष 2017-18 में वायुसेना को 20 तेज विमानों का पहली स्क्वाड्रन मिल जाएगी।
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सभी फोटो: तेजस डॉट जीओवी डॉट इन

तेजस एक नजर

after 32 years tejas join indian air force

एक इंजन और एक सीट वाला बहुउद्देशीय हल्का लड़ाकू विमान
- पुराने पड़ चुके मिग-21 विमानों की जगह लेगा
- कीमत करीब 200 करोड़ रुपये, जो दुनिया के किसी भी विमान से सस्ती
- दुनिया का सबसे बेहतर हल्का लड़ाकू विमान, अधिक मात्रा में कार्बन फाइबर का हुआ है इस्तेमाल
- डिजिटल फ्लाइ-बाई-वायर सिस्टम, फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम जैसी तकनीक
- हर मौसम में उड़ान भरने में सक्षम
- विस्फोटकों के साथ कुल वजन-12 टन
- लंबाई- 13.2 मीटर
- ऊंचाई- 4.4 मीटर
- ईंधन क्षमता : 3,000 लीटर
- स्पीड- 1350 किमी/घंटा
- एक बार में उड़ान- 400 किमी

स्वदेश निर्मित पहला लड़ाकू विमान ‘तेजस’

after 32 years tejas join indian air force

दशकों के इंतजार के बाद आखिरकार शनिवार को भारतीय वायुसेना को स्वदेश निर्मित पहला हल्का लड़ाकू विमान ‘तेजस’ मिल गया। रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने एक कार्यक्रम में वायुसेना प्रमुख अरुप राहा को 4.5वीं पीढ़ी के इस पहले विमान को सौंपा। इसके साथ ही तेजस को वायुसेना में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
 
करीब 32 साल पहले वर्ष 1983 में शुरू हुई इस परियोजना पर अब तक 8000 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जबकि इस पूरी परियोजना पर कुल 30 हजार करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है।

राजस्थान के रेगिस्तान से लेकर पूर्वोत्तर के पहाड़ी इलाकों के ऊपर गरजने में सक्षम तेजस लड़ाकू विमान की सबसे बड़ी खासियत इसका बेहद हल्का होना है। इस विमान को दूसरे चरण का ऑपरेशन क्लियरेंस मिला है, जिसका मतलब यह है कि विमान विभिन्न परिस्थितियों में अहम भूमिका निभा सकता है।

विमान को इस साल के अंत तक अंतिम ऑपरेशनल क्लियरेंस मिल जाएगा। विमान के वर्तमान संस्करण में आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक जंगी उपकरण, हवा में ईंधन भरने और लंबी दूरी तक मिसाइल दागने क्षमता नहीं है। विमान के अंतिम ऑपरेशन क्लियरेंस के वक्त तक ये सारी चीजें इसमें लग जाएंगी। विमान को जनवरी 2011 में शुरुआती ऑपरेशन क्लियरेंस मिला था।

वर्ष 2018 तक वायु सेना को मिलेंगे 20 तेजस

after 32 years tejas join indian air force

इस बड़ी वैज्ञानिक सफलता के लिए रक्षा मंत्री परिकर ने एचएएल और परियोजना से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी। उन्होंने वैज्ञानिकों से आज की चुनौतियों से निपटने के लिए लीक से हटकर सोचकर की अपील की।

उन्होंने कहा कि एचएएल जैसी कंपनियों के पास मौजूद जानकारियों के आधार पर शोध और तकनीक पर जोर दिया जाना चाहिए। कोई भी व्यक्ति रातों-रात उपलब्धियां हासिल नहीं कर लेता। इस मौके पर वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल राहा ने कहा कि हल्के लड़ाकू विमान समय की जरूरत हैं।

एचएलएल के प्रमुख आरके त्यागी ने विमान को वायु सेना को सौंपे जाने को एक ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने कहा कि विमान की 60 फीसदी चीजें स्वदेश निर्मित है।

वर्ष 2018 तक वायु सेना को मिलेंगे 20 तेजस
वर्ष 2015-16 में एचएएल छह तेजस विमानों का निर्माण करेगी। दूसरे साल में आठ और उसके बाद हर साल 16 विमान बनेंगे। वर्ष 2017-18 तक 20 विमान बन जाएंगे। इससे वायु सेना का पहला स्क्वाड्रन बनेगा।

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